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स्पर्श का नाता एहसास से है

प्यार भरे रिश्तों का स्पर्श

“मैं एक दिन खुद को तन्हां महसूस कर रही थी कि अचानक मेरे पति ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा कि ‘मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं’. फिर मुझे एहसास हुआ कि ‘हर स्पर्श’ कुछ कहता है.” यह कहानी दिव्या की है. ऐसी ही कहानी ना जाने कितने लोगों की है. सिर पर मां का दुलार भरा हाथ हो या दोस्तों के कंधे पर हाथ रखकर मौज-मस्ती की बातें या फिर जीवनसाथी के हाथों का मीठा स्पर्श हो, पर हर स्पर्श खास होता है. स्पर्श प्यार का भी हो सकता हैं और तकरार का भी हो सकता है पर हर रिश्ते के स्पर्श का अलग-अलग स्वाद, एहसास और आनंद होता है. एक छोटा सा स्पर्श बिना कहे बहुत कुछ कह जाता है और कई बार आपकी दुनिया तक बदल जाती है.


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स्पर्श है या जादू की झप्पी

हर स्पर्श इतना खास होता है कि ऐसा लगता है कि किसी ने जादू की झप्पी दी हो. हां, किसी ने सही ही कहा है कि किसी के स्पर्श से दुनिया ही बदल जाती है और ऐसा लगने लगता है कि जैसे हमारे आसपास कोई जादू हो गया हो.


”जादू है या उसका स्पर्श है,

जो बिना बोले बहुत कुछ कह जाता है”



जरूरी है स्पर्श

मानवीय रिश्तों में स्पर्श उतना ही जरूरी होता है जितना कि सांस लेना. स्पर्श आपको सही-गलत का अहसास कराने में भी अहम रोल अदा करता है. जब आप किसी से पहली बार मिलते हैं तो आप हैंडशेक जरूर करते हैं. यह भी एक किस्म का स्पर्श होता है. अगर आप सेंसिटिव हैं तो एक स्पर्श से ही समझ जाते हैं कि दूसरे व्यक्ति की आपके प्रति कैसी इंटेंशन है. मतलब यह है कि स्पर्श वो अहसास है जिसके आगे शब्दों का महत्व फीका पड़ जाता है.

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कैसे-कैसे स्पर्श !!

मां का स्पर्श हो या गर्लफ्रेंड का हग, पर स्पर्श हमेशा असरदार होता है. विज्ञान की भाषा में स्पर्श तीन प्रकार के होते हैं – ऐक्टिव स्पर्श, पैसिव स्पर्श, सोशियल स्पर्श. ऐक्टिव स्पर्श वह भावनात्मक अहसास है जिसमें व्यक्ति की जॉइंट्स और मसल्स एक साथ काम करती हैं. पैसिव स्पर्श छूने के अहसास से ज्यादा स्किन के अंडरलाइंग टिशूज में सेंसेशन पैदा करने से संबंधित होता है. सोशियल स्पर्श दो लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव विकसित करता है.


क्या कहना स्पर्श का !!

हैरानी होती है ना कि एक प्यारा सा स्पर्श कैसे जादू कर सकता है? सच में स्पर्श एक एहसास है. जिस तरह एहसास महसूस किया जाता है वैसे ही स्पर्श भी महसूस किया जाता है.


“स्पर्श एक एहसास है, अगर स्पर्श एहसास ना होता तो शायद शब्दों में कहा जाता,

समझना कठिन है इसे, क्योंकि एहसास शब्दों से नहीं बस स्पर्श से महसूस किया जाता है.”

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