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प्यार की राह में विवाह सबसे बड़ी रुकावट!!

romantic coupleहाल ही में हुए एक सर्वेक्षण ने यह प्रमाणित कर दिया है कि विवाह करने के बाद प्रेमी जोड़े में एक-दूसरे के प्रति आकर्षण पूरी तरह समाप्त हो जाता है. यहां तक कि विवाह के कुछ वर्ष बीत जाने के बाद तो वह एक-दूसरे के साथ समय बिताने को महज एक औपचारिकता ही समझने लगते हैं.

अगर आपको भी ऐसा ही लगता है कि विवाह से पहले और बाद में आप दोनों के संबंध और एक-दूसरे के लिए भावनाओं में बहुत हद तक बदलाव आया है, अब आप खुद को अपने साथी के साथ उस हद तक आकर्षित महसूस नहीं करते जितना पहले किया करते थे तो निःसंदेह आपके भीतर इस परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण यह है कि अब आप केवल प्रेमी नहीं पति-पत्नी बन चुके हैं.


ब्रिटेन में कराए इस शोध के अनुसार हर पांच में से एक विवाहित जोड़े में से दोनों व्यक्ति ही समान रूप से अपने संबंध को लेकर लापरवाह हैं, वह अपने साथी के साथ समय बिताना पसंद नहीं करते. शादी के बाद अधिकांश समय एक साथ बिताने के कारण वह अपने साथी की कंपनी से ऊब चुके होते हैं. वह स्वयं को इतना अधिक व्यस्त रखते हैं कि उन्हें एक-दूसरे के साथ समय ही ना बिताना पड़े. जिसकी वजह से वह बाहर अपने दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताने लगते हैं. विवाह के कुछ ही वर्षों बाद दोनों के बीच रोमांस की तो बात ही छोड़िए शारीरिक आकर्षण तक समाप्त हो जाता है.


डेली एक्सप्रेस में प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट का कहना है कि इस शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का मानना है कि सर्वे के दौरान उन्होंने यह भी महसूस किया कि वे प्रेमी जोड़े जिनकी आयु 18-24 वर्ष के बीच है, एक-दूसरे के साथ अधिक संलग्न और रुमानी होते हैं. वह अपने संबंध को पूरी तरह सजीव बनाए हुए हैं. वह आपस में जितना ज्यादा हो सके समय व्यतीत करते हैं. उन्हें जब मौका मिलता है वह एक-दूसरे के प्रति अपने प्यार का इजहार करने से भी नहीं चूकते.


तो क्या उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर यह समझ लिया जाए कि विवाह ही प्यार की समाप्ति का कारण बनता है. प्यार को उम्र भर बनाए रखने के लिए हमें विवाह ही नहीं करना चाहिए?


यद्यपि यह अध्ययन एक विदेशी संस्थान द्वारा कराया गया है तो जरूरी है कि इसे भारत के संदर्भ में भी देख लिया जाए. भारतीय परिदृश्य में अगर इस शोध की बात करें तो हो सकता है कि यहां भी विवाह के कुछ वर्षों बाद पति-पत्नी के बीच रोमांस और शारीरिक आकर्षण जैसी चीजें थोड़ी कम हो जाएं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वह अब एक-दूसरे में दिलचस्पी नहीं लेते. बल्कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि विवाह के बाद उनकी प्राथमिकताओं में थोड़ा परिवर्तन आ जाता है, उनकी जिम्मेदारियों का क्षेत्र बहुत हद विस्तृत हो चुका होता है. विवाह से पूर्व प्रेमी-जोड़ों के कर्तव्य केवल एक-दूसरे के प्रति ही होते हैं, उन पर किसी भी प्रकार की कोई जिम्मेदारी नहीं रहती. जिसकी वजह से वह जैसे चाहे अपने समय का प्रयोग करते हैं. 18-24 वर्ष के लोगों में परिपक्वता की कमी होती है. उन पर कुछ खास जिम्मेदारियां भी नहीं होतीं. जिसकी वजह से वह सिर्फ खुद तक ही सीमित होते हैं. लेकिन विवाह के बाद उन्हीं जोड़ों को जब अपने परिवार और घर से जुड़े उत्तरदायित्वों का निर्वाह करना पड़ता है तब वह भी एक-दूसरे के साथ समय बिताने से ज्यादा अपने कर्तव्यों को तरजीह देने लगते हैं.


विदेशों में परिवारजनों की संख्या भी कम होती है, इसीलिए शायद वह बोरियत महसूस होने के कारण अपने साथी के साथ समय ना बिताते हों, लेकिन भारत में पारिवारिक जिम्मेदारियां और सदस्यों की संख्या ज्यादा होती है. इसकी वजह से पति-पत्नी दोनों ही अपने जरूरी कर्तव्यों को निभाते हुए एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं दे पाते. लेकिन तब तक उनकी आपसी समझ काफी हद तक विकसित हो चुकी है. जिसके परिणामस्वरूप वह एक-दूसरे की परेशानियों और उनकी विवशताओं को समझने लगते हैं. इसीलिए हर छोटी-छोटी बात पर नाराज होने की बजाए वह एक-दूसरे को पूरा सपोर्ट करते हैं.


उपरोक्त चर्चा के आधार पर यह कहा जा सकता है कि विवाह जैसे संबंध कम से कम भारतीय लोगों के जीवन में प्रेम की राह में बाधा नहीं बनते बल्कि उनके बीच के प्यार और समझ को और अधिक विकसित करते हैं.


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