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जब मनवानी हो अपनी बात !!

work burdenप्रत्येक इंसान अपने आप को अलग बनाना चाहता है. व्यक्ति की सामान्य मनोवृत्ति होती है कि वह जीवन के हरेक क्षेत्र में सफल हो और एक कुशल नेतृत्वकर्ता के रुप में लोगों के सामने आए. लेकिन इसके लिये उसे अपनी बातों को मनवाने का कौशल होना चाहिए. एक नए रिसर्च में दावा किया गया है कि अगर आप किसी से अपनी बात मनवाना चाहते हैं तो बहुत जल्दी या बहुत ही धीरे बोलने के बजाय रुक-रुक कर मध्यम गति से बात करें.


अपने विचारों को प्रकट करने के लिए हरेक इंसान का नजरिया अलग-अलग होता है. कुछ लोग अपनी बातों को धीमी गति से कह कर अपनी बातें मनवा लेते हैं तो कुछ बोलने में स्पीड लाकर दूसरों को प्रभावित कर अपनी बातें मनवा लेते हैं. लेकिन कुछ लोग तो अपनी बातें मनवाने के लिये इशारे को ही काफी समझते हैं.


बातें मनवाकर अपना काम निकालना प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार में छुपा हुआ है. शोध रिपोर्ट के अनुसार, समय की कमी की वजह से अगर किसी व्यक्ति के किसी काम को कोई और करता है तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है. इससे समय की बचत भी होगी और लोगों को उसका प्रभाव भी दिखेगा.


अगर अपनी बातें मनवाना है तो व्यक्ति की सोच सबसे बड़ी चीज है. अगर बात इशारे से नहीं बन पाती है तो व्यक्ति मध्यम गति बात कह कर अपनी बातें मनवा सकता है. मध्यम गति के इस फॉर्मूले को हर कोई अपनाता है. उन्हें लगता है कि इस तरीके को अपनाने से धीमी और तेज, दोनो तरह के फ्लो को प्राप्त कर सकते हैं.


लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि मध्यम गति से बोलने पर आप अपनी बातों को मनवा ही लें. यह इस पर निर्भर करता है कि आपके सामने किस तरह का व्यक्ति खड़ा है. यदि आपके सामने कोई इंसान खड़ा है और आप चाहते हैं कि मध्यम गति से बातें कर उसे मना लें और वह मानने को राजी नहीं है तो ऐसे में आप उसे तेज गति से बोल कर मनाने की कोशिश करते हैं. यदि वह फिर भी नहीं मानता है तो मामला हिंसक रुप ले लेता है.


कुल मिलाकर यदि आप अपने व्यक्तित्व में सुधार लाना चाहते हैं तो बातें करने का तरीका मध्यम गति वाला रखें. क्योंकि ज्यादातर मध्यम गति वाला तरीका ही अधिक कारगर और असरदार साबित होता है.


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