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आप भी अगर अपने पार्टनर पर शक करते हैं तो जरा सोचिए !!

lov3पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास से भरा

सोनाली और रवि सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. शादी के कुछ दिनों बाद तक वे एक-दूसरे से हर छोटी-छोटी बात शेयर करते थे, लेकिन फिर से कामकाजी जीवन में रम जाने के बाद उनके आपसी संवाद कम होने लगे. एक दिन अचानक सोनाली ने रवि से उसका फेसबुक पासवर्ड पूछ लिया. पासवर्ड बताने में जरा सी आनाकानी करने पर सोनाली ने तपाक से कह दिया, ‘जरूर तुम्हारा किसी से अफेयर है. अब मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती….’ इतना सुनना था कि रवि ने कहा- ‘क्या यार, तुम भी कहां तक पहुंच जाती हो.. क्या मुझे अपनी जिंदगी जीने का हक नहीं है, क्या मेरी कोई प्राइवेसी नहीं हो सकती’?


यह कहानी और इस तरह के संवाद केवल सोनाली और रवि के ही नहीं हैं. पासवर्ड को लेकर तनातनी अब आम होने लगी है. एक आईटी सिक्योरिटी फर्म के मुताबिक, तकरीबन 20 प्रतिशत लोग अपने पार्टनर के ई-मेल्स बिना उनकी सहमति या जानकारी के चेक करते हैं.


पार्टनर को समझें

जो महिलाएं एक हाउसवाइफ होती हैं तो उनके पति जब तक बाहर रहते हैं, उनकी दुनिया सिमट जाती है फोन, फेसबुक और किताबों में. यह एक अलग दुनिया है जहां वह अपने मित्रों, रिश्तेदारों और अपनी मनपसंद कामों में जुटी रहती हैं. इसमें दखलंदाजी उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं. यहां तक कि पति की भी नहीं. महिलाओं का कहना है कि एक-दूसरे को अतीत-वर्तमान सबके बारे में बताया है, पर उनके पतियों ने अपना पासवर्ड शेयर नहीं किया और न ही इसकी जरूरत समझते हैं. महिलाओं का मानना है कि पारदर्शिता आपके संबंधों को ऊंचाइयां देती है, पर हद से ज्यादा पारदर्शी होकर आप अपने पार्टनर की फीलिंग्स को ठेस भी पहुंचा सकते हैं.


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स्पेस जरूरी है

‘सब कुछ’ शेयर करना और पासवर्ड शेयर न करना अपने-आप में कोई बड़ा मुद्दा नहीं है पर यह बड़ा तब बन जाता है, जब पार्टनर पर हम पूर्ण अधिकार भाव जताने लगते हैं और साथ ही पार्टनर की हर बातों पर शक करने लगते हैं. मनोचिकित्सकों का कहना है कि ‘आप रिश्ते को जितना बांधने की कोशिश करेंगे, वह आपको उतना ही दर्द देगा. एक-दूसरे में समाकर भी एक-दूसरे को खुला छोड़ देना चाहिए इससे आप रिश्ते को एंजॉय कर सकते हैं’. दरअसल, एक-दूसरे को स्पेस देना बहुत जरूरी है ताकि अपनी बात कह पाने में साथी सहज महसूस कर सकें.


होता रहे संवाद

भागदौड़ भरी लाइफ में यदि पति-पत्नी जरूरी बात भी शेयर नहीं कर पाते तो उनमें दूरिया भी आएंगी और असुरक्षा का भाव भी पनपेगा. ऐसे में छोटी-छोटी बात झगड़े की वजह बनती रहेगी. जबकि संवाद के जरिए हर समस्या का हल निकाला जा सकता है. एक हालिया अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि यदि संवाद की आदत हो तो सामने वाले के मन को समझने और दिमाग को पढ़ने जैसी अमूर्त बातें सच होने लगती हैं. संवाद से पति-पत्नी के बीच आत्मविश्वास बढ़ता ही है उनके भरोसे की नींव भी मजबूत होती है.


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