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महिलाओं की आयु ज्यादा तो फिर पुरुषों की कम क्यों ?

ageकहते हैं कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा समय तक जिंदा रहती हैं और वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने महिलाओं के पुरुषों से ज्यादा जीने की संभावना की वजह का पता लगा लिया है.


वैज्ञानिकों ने ये दावा मधुमक्खियों पर किए गए एक अध्ययन के बाद किया है. ‘करेंट बायोलॉजी’ नामक पत्रिका में छपे एक लेख में इन वैज्ञानिकों ने लिखा है कि इसके लिए उन्होंने ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ में पाए जाने वाले डीएनए और समय-समय पर उसमें होने वाले बदलावों का अध्ययन किया. माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका को ऊर्जा पहुंचाने वाला कोशिकांग होता है. माइटोकॉन्ड्रिया की खास बात ये भी है कि ये सिर्फ मां से ही विरासत में मिलते हैं, पिता से कभी नहीं.


लेकिन आयु संबंधी विज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि स्त्री पुरुष की जीवन अवधि के अंतर में लिंग विभेद की व्याख्या के लिए कई और भी कारक जिम्मेदार थे. लंदन में 85 वर्ष की आयु में चार पुरुषों की तुलना में छह महिलाओं की चाहत ज्यादा जिंदा रहने की होती है जबकि सौ की आयु में ये अनुपात दो और एक का होता है.


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कई और भी  कारण हैं !!

‘करेंट बायोलॉजी’ नामक पत्रिका में छ्पी रिसर्च में महिलाओं के पुरुषों से ज्यादा समय तक जिंदा रहने का करण ‘माइटोकॉंन्ड्रिया कोशिकाओं’ को बताया गया है जबकि इस रिसर्च में और भी पहलुओं को लेकर रिसर्च की जा सकती थी.


  • जीवनशैली के ऊपर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति कब तक जिंदा रहेगा. महिलाओं की जीवनशैली और पुरुषों की जीवनशैली में अंतर होता है. पुरुषों की जीवनशैली में कई ऐसी आदतें होती हैं जो पुरुषों की आयु को कम कर देती हैं.

  • व्यवहार भी आयु में अंतर कर देता है. अधिकतर देखा गया है कि महिलाओं का व्यवहार कोमल होता हैं जो गुस्से को नियंत्रण में रखता है जिस कारण महिलाओं की उमर पुरुषों से अधिक होती है.

  • सामाजिक रहन-सहन के ऊपर भी यह निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति की आयु कितनी होगी. यदि किसी व्यक्ति का रोजाना शराब पीना उसके रहन-सहन का हिस्सा है तो उसकी इस आदत का उसकी उमर पर भी असर होता है.

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