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बंद कीजिये “धार्मिक आतंकवाद” कहना

वर्तमान समाज

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आतंक की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी  हैं इस बात का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि यह वही ब्रुसेल्स है जो की पेरिस हमलों का केंद्र था जहां की सीमा से सलाह अब्देल्सल्म को सुरक्षा अधिकारीयों ने जाने दिया था और उस सब के  बाद  इतना बड़ा पेरिस हमला हुआ और इसी जगह छापेमारी के बाद से ३ और आतंकियों को मार गिराया  था दरअसल यह शहर बहुत समय से आतंकियों के निशाने पर है इसका एक कारण ये भी हो सकता है क्योंकि इस देश के सीमायें महत्वपूर्ण यूरोपीय देशों से लगती है और यहां नाटो का मुख्यालय भी है नाटो सेनाएं दुनियाभर में यूरोप/उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं और दावेश के खिलाफ पश्च्ममी देशों के अभियान का हिस्सा हैं और अफ़ग़ानिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में अपनी सेवाएँ देती रही है|धार्मिक आतंकवाद का नाम इस आंतक को दिया गया है  लेकिन क्या अब समय नही है की कोई दूसरा नाम इसे दिया जाये और इसको देखने की प्रविती बदली जाई जहां तक मेरा ज्ञान है  कोई धर्म (कम से कम इस ग्रह में) तो निर्दोष लोगों को मारने की अनुमति नही देता ? तो फिर क्यों इस्लाम की छवि ख़राब की जा रही है इस्लाम का अर्थ है प्यार अपने घिनोने इरादों को पूरा करने के लिए आप किसी धर्म का आसरा नही ले सकते इस सोच को निकाल फेंकना  होगा और दावेश जैसे संगठन जोकि मानवता के खिलाफ हैं  इन्होने कोई धर्म नहीं पड़ा है और कम से कम इस्लाम तो नहीं क्योंकि इस्लाम इसकी अनुमति नहीं देता इन्हें इस भ्रम से बहार निकलना होगा कि वे अपने धर्म की रक्षा कर  रहें हैं और इसका कार्य मुस्लिम संघठनो से बेहतर कोई नहीं कर सकता सभी मुस्लिम चाहे वह सुन्नी हैं शिया अहमदी जो भी हैं सबको इस कट्टरता के खिलाफ एकजूट होकर खड़े होने के जरुरत  है क्योंकि अपने निजी उद्द्स्यों के लिए आप सामाजिक मूल्यों की बलि नहीं दे सकते आज पूरा मध्य पूर्व चरमपंथी गतिविधयों का केंद्र बना हुआ है वहाबी इस्लाम का केंद्र सऊदी अरब और अन्य पड़ोसी-पड़ोसी से लड रहे  हैं |इंसानों और जानवरों में केवल यही फर्क है की हम शिक्षित हैं और वे अशिक्षित इस तथ्य से मेरा अभिप्राय है की हमे मदरसों को आतंकवादी गतिविधयों की पाठशाला बनने से रोकना होगा ठीक है आप अपने धर्म के बारे में जानिए लेकिन उस पर अनुसन्धान कीजिये  लेकिन हमे मुस्लिम बच्चों को अन्य क्षेत्रों में आगें आने के लिए प्रेरित करना चाइए यदि मैं भारत के विषय में बात करूँ तो  हमारे देश के सबसे प्रिय राष्ट्रपति अब्दुल कलम जिन्हें शाएद ही कोई उनके धर्म से जानता होगा यदि मदरसों में उनके बारे में पड़ाया जाये तो मुझे विश्वास है आधे से ज्यादा हमारे मुस्लिम भाई उनसे प्रेरित होकर हमारे देश के विकास के अंग बनेगें अब्दुल कलम आज पूरे भारत के लिए प्रेणना के श्रोत हैं विशेषकर युवाओं के लिए चाहें  वो किसी भी धर्म से हों | धार्मिक आतंकवाद कहना हमे बंद करना होगा इसी के सहारे कुछ लोग अपने निजी उद्द्स्यों के लिए पूरी मानवता के लिए खतरा बने हुए हैं बेल्जियम में जो कुछ भी हुआ वो बेहद ही निंदनीय है यह उस देश में इतनी आसानी से हो गया जहां बहुत पहले से आतकी घटनाओं की सूचना थी तो जरा सोचिये बाकि देशों पर कितना बडा खतरा हैं सभी को आगे आकर  मानवता के लिए इसी बीमारी से लड़ने की जरूरत है|

आतंक की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी  हैं इस बात का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि यह वही ब्रुसेल्स है जो की पेरिस हमलों का केंद्र था जहां की सीमा से सलाह अब्देल्सल्म को सुरक्षा अधिकारीयों ने जाने दिया था और उस सब के  बाद  इतना बड़ा पेरिस हमला हुआ और इसी जगह छापेमारी के बाद से ३ और आतंकियों को मार गिराया  था दरअसल यह शहर बहुत समय से आतंकियों के निशाने पर है इसका एक कारण ये भी हो सकता है क्योंकि इस देश के सीमायें महत्वपूर्ण यूरोपीय देशों से लगती है और यहां नाटो का मुख्यालय भी है नाटो सेनाएं दुनियाभर में यूरोप/उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं और दावेश के खिलाफ पश्च्ममी देशों के अभियान का हिस्सा हैं और अफ़ग़ानिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में अपनी सेवाएँ देती रही है|धार्मिक आतंकवाद का नाम इस आंतक को दिया गया है  लेकिन क्या अब समय नही है की कोई दूसरा नाम इसे दिया जाये और इसको देखने की प्रविती बदली जाई जहां तक मेरा ज्ञान है  कोई धर्म (कम से कम इस ग्रह में) तो निर्दोष लोगों को मारने की अनुमति नही देता ? तो फिर क्यों इस्लाम की छवि ख़राब की जा रही है इस्लाम का अर्थ है प्यार अपने घिनोने इरादों को पूरा करने के लिए आप किसी धर्म का आसरा नही ले सकते इस सोच को निकाल फेंकना  होगा और दावेश जैसे संगठन जोकि मानवता के खिलाफ हैं  इन्होने कोई धर्म नहीं पड़ा है और कम से कम इस्लाम तो नहीं क्योंकि इस्लाम इसकी अनुमति नहीं देता इन्हें इस भ्रम से बहार निकलना होगा कि वे अपने धर्म की रक्षा कर  रहें हैं और इसका कार्य मुस्लिम संघठनो से बेहतर कोई नहीं कर सकता सभी मुस्लिम चाहे वह सुन्नी हैं शिया अहमदी जो भी हैं सबको इस कट्टरता के खिलाफ एकजूट होकर खड़े होने के जरुरत  है क्योंकि अपने निजी उद्द्स्यों के लिए आप सामाजिक मूल्यों की बलि नहीं दे सकते आज पूरा मध्य पूर्व चरमपंथी गतिविधयों का केंद्र बना हुआ है वहाबी इस्लाम का केंद्र सऊदी अरब और अन्य पड़ोसी-पड़ोसी से लड रहे  हैं |इंसानों और जानवरों में केवल यही फर्क है की हम शिक्षित हैं और वे अशिक्षित इस तथ्य से मेरा अभिप्राय है की हमे मदरसों को आतंकवादी गतिविधयों की पाठशाला बनने से रोकना होगा ठीक है आप अपने धर्म के बारे में जानिए लेकिन उस पर अनुसन्धान कीजिये  लेकिन हमे मुस्लिम बच्चों को अन्य क्षेत्रों में आगें आने के लिए प्रेरित करना चाइए यदि मैं भारत के विषय में बात करूँ तो  हमारे देश के सबसे प्रिय राष्ट्रपति अब्दुल कलम जिन्हें शाएद ही कोई उनके धर्म से जानता होगा यदि मदरसों में उनके बारे में पड़ाया जाये तो मुझे विश्वास है आधे से ज्यादा हमारे मुस्लिम भाई उनसे प्रेरित होकर हमारे देश के विकास के अंग बनेगें अब्दुल कलम आज पूरे भारत के लिए प्रेणना के श्रोत हैं विशेषकर युवाओं के लिए चाहें  वो किसी भी धर्म से हों | धार्मिक आतंकवाद कहना हमे बंद करना होगा इसी के सहारे कुछ लोग अपने निजी उद्द्स्यों के लिए पूरी मानवता के लिए खतरा बने हुए हैं बेल्जियम में जो कुछ भी हुआ वो बेहद ही निंदनीय है यह उस देश में इतनी आसानी से हो गया जहां बहुत पहले से आतकी घटनाओं की सूचना थी तो जरा सोचिये बाकि देशों पर कितना बडा खतरा हैं सभी को आगे आकर  मानवता के लिए इसी बीमारी से लड़ने की जरूरत है|

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