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सफेद चावल स्वास्थ के लिये हानि कारक

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सफेद चावल बेजान और नामुराद भूरा चावल भगवान का प्रसाद लगभग आधी दुनिया में भोजन करने का मतलब चावल खाना ही होता है। दुनिया की आधी आबादी अपनी आधी केलौरी चावल से ही प्राप्त करती है। भूरे चावल बनाने की प्रक्रिया में चावल का सिर्फ बाहरी छिलका ही अलग किया जाता है, जिससे इसकी पौष्टिकता बरकरार रहती है। लेकिन देखने में सुंदर और सफेद चावल तैयार करने के लिए चावल मिलों में इसकी मंजाई और घिसाई की जाती है। इससे चावल की शैल्फ लाइफ भी बढ़ जाती है, क्योंकि इस घिसाई में जल्दी खराब होने वाले आवश्यक वसा निकल जाते हैं। इस प्रक्रिया में चावल से 67% विटामिन बी-3, 80% विटामिन बी-1, 90% विटामिन बी-6, 60% आयरन, आधा सेलेमियम और फॉस्फोरस तथा लगभग सारा फाइबर और आवश्यक फैट्स निकाल लिए जाते हैं। मिल वाले इन्हें दवा बनाने वाली कंपनियों को बेच देते हैं। इस उजले चावल में पोषण के नाम पर सिर्फ स्टार्च ही बचता है। इसे खाने से पेट तो भर जाता है लेकिन शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है। चावल का वानस्पतिक नाम ऑराइजा सेटाइवा (Oryza sativa) है। हिंदी में इसको अक्षत भी कहा जाता है क्योंकि अक्षत का अर्थ होता है जो टूटा न हो। भूरा चावल ही सही मायने में अक्षत है, दिव्य है, पवित्र है। सफेद चावल तो खंडित है, घिसा हुआ है, अधूरा है, बेस्वाद है, बेजान है, बेसुरा है, नागवार है, नालायक है और नामुराद है। भूरा चावल राजा है धर्म है तो सफेद चावल राक्षस है कुकर्म है। धार्मिक महत्व शास्त्रों के मतानुसार हिन्दू धर्म के प्रत्येक धार्मिक कर्म-काण्ड में चावल का बहुत महत्व है। देवी-देवता को अर्पण करने के साथ ही इसे हम मस्तक पर सज्जित तिलक पर भी लगाते है। कोई भी पूजन अक्षत के अभाव में अधूरा है। पूजा में अक्षत चढ़ाने का अभिप्राय यह है कि हमारा पूजन अक्षत की तरह पूर्ण हो। भगवान को अक्षत चढ़ाने का भाव यह है कि जिस तरह हमने पूर्ण चावल आपको चढ़ाए हैं। उसी तरह आप हमारे सत्कर्मों का पूर्ण फल प्रदान करें। अक्षत हमारे दैनिक उपयोग की वस्तु है, तथा यह हमें ईश्वर की कृपा से ही प्राप्त हुआ है इसलिए भी उनको अर्पण किया जाता है। अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ कुङ्कमाक्ता: सुशोभिता:। मया निवेदिता भक्त्या: गृहाण परमेश्वर॥ शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से शिवजी अति प्रसन्न होते हैं और भक्तों को अखंडित चावल की तरह अखंडित धन-दौलत, मान-सम्मान प्रदान करते हैं। श्रद्धालुओं को जीवन भर धन-धान्य की कमी नहीं होती। शुक्रवार को लक्ष्मी मां को चावल की खीर बनाकर अर्पण करने से समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पोषक तत्व भूरे चावल से हमें विटामिन बी कॉम्पलेक्स के साथ भरपूर मेंगनीज, सेलेनियम और मेगनीशियम प्राप्त होता है। एक कप भूरे चावल (195 ग्राम) से हमें दिन भर की आपूर्ति का 88% मेंगनीज, 27% सेलेनियम, 20.9% मेगनीशियम, 18% ट्रिप्टोफेन मिल जाता है। मेंगनीज मेंगनीज प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा बनाने में मदद करता है। यह फैट्स के निर्माण में सहायता करता है, जो सेक्स हार्मोन्स बनाते हैं। मेंगनीज माइटोकॉन्ड्रिया में सक्रिय एक बहुत ही महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज (SOD) के कलपुर्जे बनाता है। सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज माइटोकॉन्ड्रिया में ऊर्जा उत्पादन के दौरान बनने वाले फ्री-रेडीकल्स को निष्क्रिय करता है। कैंसर सुरक्षा – फाइबर और सेलेनियम सेलेनियम और फाइबर आंत के कैंसर का जोखिम कम करते हैं। सेलेनियम अनेक चयापचय क्रियाओं जैसे थायरॉयड हार्मोन चयापचय, रक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाता है। सेलेनियम क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के डी.एन.ए. का रखरखाव और पुनर्निर्माण करता है, कैंसर कोशिकाओं की प्रगति को अंकुश में रखता है, और ऐपोप्टोसिस (कैंसर कोशिका की योजनाबद्ध मृत्यु) को सम्बल देता है। साथ ही सेलेनियम एंटीऑक्सीडेंट सम्राट ग्लूटाथायोन परऑक्सीडेज के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। ग्लूटाथायोन कैंसर सुरक्षा विभाग का बड़ा ब्रिगेडियर है और यकृत में अनेक हानिकारक तथा उपद्रवी तत्वों का सफाया कर शरीर से बाहर खदेड़ता है। सेलेनियम विटामिन-ई के साथ मिल कर रक्षा प्रणाली के अनेक कार्यों का संपादन करता है। इस तरह डिफैंस डिपार्टमेंट के अनेक कार्यों का सम्पादन करने में सक्षम सेलेनियम कैंसर ही नहीं अपितु हृदयरोग, अस्थमा, और रुमेटॉयड आर्थ्राइटिस में भी सुरक्षात्मक और उपचारात्मक भूमिका निभाता है। कॉलेस्टेरोल और हृदय रोग फाइबर, बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन और मेगनीशियम से भरपूर भूरे चावल में विद्यमान आवश्यक वसा कॉलेस्टेरोल का कम करते हैं। भूरा चावल खाने से रक्तचाप नियंत्रण में रहता है, और हृदयरोग का जोखिम भी कम होता है। अन्य फायदे गालब्लाडर स्टोन से सुरक्षा मोटापे पर नियंत्रण स्वस्थ नर्वस सिस्टम डायबिटीज से सुरक्षा हड्डियों को स्वस्थ रखे – भूरे चावल में पर्याप्त मेगनीशियम होता है जो हड्डियों को स्वस्थ रखता है।

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