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वरना ये तड़प नसीब बन जायेगा मेरा

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हिचकियाँ रात को आती ही रहीं,
तूने फिर याद किया हो जैसे।-एहसान दानिश

पता नही क्यों मुझे लगता है कि तुम आज भी मुझे वैसे ही याद करती हो जैसे पहले करती थी, पता नही क्यों हिचकीयों के कभी भी आने पर तुम्हारे द्वारा मुझे याद किये जाने को ही कारण समझता है ये मन मेरा।

तुम्हारे जाने के बाद से ही तो अपने दम पर जीना सीख रहा हूं मै। तुम्हारे रहते तो मै तुम्हारे भरोसे ही सांसे लेता रहा था। जिंदगी बहुत कठीन है ये तुम्हारी अनुपस्थिति ने सिखाया मुझे। तुम्हारी गैरहाजिरी जिसे दिल आज भी स्वीकारता नही
है,से मुझमे लड़ने की हिम्मत आई है दुसरों से अपने लिए, क्योकि तुम्हारे रहते तो तुम ही लड़ती थी ना मेरे लिए।

तुम्हे शायद पता भी होगा कि तुम्हारे बाद…

जो गुज़ारी न जा सकी मुझसे।
मैने वो जिदंगी गुज़ारी है।। – जाॅन ऐलिया

करीब-करीब हर दिन प्रयास करता हूं कि कम से कम तुमको याद नही करुंगा आज पर कुछ न कुछ ऐसा हो ही जाता है कि तुम्हारी याद आ जाती है माँ।

क्यों अत्यंत व्यस्तता के बावजूद भी मन तुमको याद करना नही भूलता माँ?

क्यों तुमसे सालो से बातचीत बंद (चाहे कारण तुम्हारी असमर्थता ही क्यों न हो) होने के बाद भी सपने मे तुमसे बाते करता हू मै आज भी?

क्यों तुम्हारे रहते मेरे जीवन मे तुम्हारी महत्ता को समझ नही पाया मै माँ?

मुझे सजा दो मेरी गलतियों के लिए माँ, वरना ये तड़प नसीब बन जायेगा मेरा,मेरे आखिरी सांस तक के लिए।

माँ कह दो ना  यादों को, कि कुछ ऐसे हो जायें।
ना मुझे याद करें और ना ही मुझसे मिलने आयें।।

कैसे बताऊं की कैसी पीड़ा कैसी तड़प का अनुभव करता हूं मै जब अनायास ही याद आता है कि तुम रही नही अब। कैसे समझाऊँ कैसे दिलासा दूं अपने आपको की अब तुमसे मिलना किसी किमत पर संभव नही है।

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