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काश कविताएं बोल सकतीं

Kavita(Poem) Dunia

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काश ऐसा होता कि कविताएं बोल सकतीं

तो मैं लिख देता एक प्रेमरस वाली कविता

जो होती एकतरफ प्रेम से सुसज्जित

जिसमे एक नटखट सी दिखने वाली लड़की को

एक नदी या तितली न लिखता….मैं लिखता

सिर्फ एक नटखट लड़की ताकि उसे भी

होता अपने अस्तित्व पर गुमान

हां! मैं लिखता एक ऐसी कविता

और लिखकर उछाल देता उसे खुले आसमां में

जो उसके पते पर जाकर बोलने लगती

और उसके पाषाण जैसे हृदय को प्रेमरस से

द्रवित कर पहुंचा देती मेरा पैगाम…!!

काश कविताएँ बोल सकतीं..!!

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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