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एहसान

जिन्दगी

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सुख में साथ निभाने को सब आतुर ,
दुःख में कोई नहीं संगी साथी|
मेरे बाग़ के फूलों तुम याद रखो ,
पतझड़ की भी एक निराली शान है |
फिर कलियाँ मुस्कराएँगी इस आँगन में ,
फिर आएँगी नई कोपल इस डाल पर,
लहराते खेतों के पंछी याद रखो ,
थके हुए किसान का भी गुमान है |
कुछ तो मेरी आदत है लुटने की,
कुछ ने दोस्त बनकर लूटा है |
नाप रही मैं जग की गहराई ,
सब को पहचान सकूँ यह अरमान है |
हर बादल बरसात नही करता है ,
हर दरिया गंगाजल नहीं होता है ,
दो पल का चैन मिला मुझे तुम से,
जीवन भर की यही कमाई, यही एहसान है |

-(c ) कान्ता ‘दीप’

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