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कोरोना काल में योग और आयुर्वेद

Trouth of Life

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योग और आयुर्वेद के पर्याय हैं बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण

  • सोशलडिस्टेंस में नमस्ते अभिवादन की अहमियत
  • योग और आयुर्वेद भारत की आत्मा में सदा से 

कोरोना काल भारत की प्राचीन धरोहर वैदिक संस्कृति पर गर्वित होने के साथ ही उसके पालन का अक्षरशः अनवरत महत्तम संकेत भी है । सोशल डिस्टेंस में नमस्ते अभिवादन की अहमियत अमेरिका आदि सभी योरोपीय देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने समझा भी और उसको अपनाया भी।

एक बात जरूर सबको समझनी चाहिए कि रिसर्चर और ऋषि के अर्थ उद्भव में बहुत ही साम्यता है। 

यथा आधुनिक जगत में रिसर्च की महत्ता अनुसंधान के वैज्ञानिक प्रविधियों की श्रेष्ठता के कारण है, वैसे ही ऋषित्व भी मन्त्रद्रष्टृत्व से ही है। मन्त्र के प्रकटीकरण में साक्षात्कार दृष्टि की  प्रधानता से अपरिहार्यता है।

कोरोना काल में विश्व की विशाल आबादी वाले वाले भारत देश में विकसित देशों की तुलना में संक्रमण की विनाशकारी आशंकाओं को मिथ्या साबित कराने में योग और आयुर्वेद की महती भूमिका रही है। यद्यपि योग और आयुर्वेद भारत की आत्मा में सदा से रचे बसे हैं, लेकिन गिने चुने लोग आत्मा की आवाज सुन पाते हैं।

योग और आयुर्वेद को आधुनिक जीवन शैली में सर्वस्वीकार्यता से प्रतिष्ठापित करने वालों गणमान्य जनों  में  बाबा रामदेवजी और आचार्य बालकृष्ण जी प्रथम पंक्ति में विराजमान हैं। विश्व में योग और आयुर्वेद पर काम करने वाली अनेकों शख्सियत रही हैं परंतु योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में बृहत क्रांति लाने वालों में बाबा रामदेवजी और आचार्य बालकृष्णजी अग्रणी हैं

बाबा रामदेवजी को यह श्रेय आज सारा संसार दे रहा है कि उन्होंने योग को आम आदमी के प्रयोग में शुमार किया है। योग के आसनों से तो फिर भी आमतौर पर लोग परिचित थे लेकिन प्राणायाम तो वर्ग विशेष तक ही सीमित था। प्राणायम को किचन से लेकर पार्कों तक लेजाने वाले बाबा रामदेव जी के महत्तर योगदान को कदापि कमतर नहीं आंका जा सकता है। 

लगभग वर्ष 2000 से  टेलीविजन पर  बाबा रामदेव जी  योग के अभिनव प्रयोग आम जनमानस के लिए आकर्षण के प्रमुख केंद्र बन गए थे। विश्व की 18 फीसद आबादी वाला भारत अन्यों देशों की तुलना में कोरोना महामारी के संकट से लंबे काल तक निपटा भी औसतन मृत्यु दर डेढ़ प्रतिशत से भी कम रखने में भी सफल रहा है। इस सफलता का रहस्य है योग और आयुर्वेद को ही जाता है। योग और आयुर्वेद द्वारा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और वायरस के बखूबी निस्तारण की भूमिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सराहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग और आयुर्वेद को दुनिया में व्यवहार स्तर पर गर्मजोशी से अंतर्राष्ट्रीय पहचान हेतु विश्व योगदिवस के निर्धारण की संयुक्तराष्ट्र के मंच से कालजयी मांग की  थी। जिसका अनुमोदन ससम्मान वैश्विक नेतृत्व ने किया था।

कहा जाता है कि योग के पीछे आयुर्वेद अपने आप चला आता है। अतः भारत सरकार ने आयुष विभाग का दायरा बढ़ाकर आयुष मंत्रालय का दर्जा दिया है।इसमें योग , आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, और होम्योपैथी शामिल है।

आयुष मंत्रालय ने कोरोना काल में  प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले नुस्खों और औषधियों का जमकर प्रचार किया। पहली बार किसी महामारी के खात्मे के लिए योग और आयुर्वेद को चिकित्सा हेतु आधिकारिक रूप से मान्यता दी गयी। साथ ही आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन हेतु प्रोटोकॉल का उल्लेख किया है।

कोरोना संक्रमण से उपजे संकट में पतंजलि की कोरोलिन प्रतिरोधक क्षमता में बहुत ही कारगर सिद्ध हो रही है। WHO द्वारा ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना के लिए भारत को चुनना योग और आयुर्वेद के लिए नए मील के पत्थर सिद्ध होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आयुर्वेद दिवस 13 नवम्बर,2020 को दो आयुर्वेद संस्थान 1- आयुर्वेद शिक्षण और अनुसंधान संस्थान, जामनगर 2- राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर देश को समर्पित किए।

दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्डइंडस्ट्रियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी  के शोध द्वारा प्रमाणित हो चुका है कि अश्वगंधा ऐसे प्राकृतिक तत्त्व हैं जिनमें अद्भुत प्रतिरोधक क्षमता है।

कुछ साल पहले तक जूस का मतलब फ्रूट जूस होता था। लेकिन अब आंवला, गिलोय, एलोवेरा, तुलसी,लोकी, करेला आदि के जूस की भी भरमार है। आयुर्वेद औषधि च्यवनप्राश प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत कारगर है। संक्रमण काल में काढ़ा सेवन का भी क्रम अनवरत बना रहा है।

तुलसी, अश्वगंधा, हल्दी, गिलोय, कालीमिर्च और लौंग की मांग के नित नए रिकॉर्ड कायम किए। काढ़ा भारत के हर नागरिक का जरूरी राष्ट्रीय पेय हो गया था। वस्तुतः योग और आयुर्वेद प्राकृतिक और कृत्रिम वायरस का परम निदान  भी है और समाधान भी।

                                                                                                                                                                                                            –डॉ.कमलाकान्त बहुगुणा

 

डिस्क्‍लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्‍वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्‍य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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