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लाशों में अवसर ढूंढते गिद्ध

Truth of Life

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मरणधर्मा मनुष्य कभी दस रुपये तक के नमक को भी पांच सौ में बेचकर हजारों रुपये कमाने में सफल हो जाता है तो कभी ऑक्सीजन के सिलेंडर को ब्लैक करके लाखों रुपये कमा लेता है, कभी रेमिडिसिबिर के इंजेक्शन की जमाखोरी से अरबपति बन जाता है। यह बिरादरी आज ही इस कॉरोना आपदा को अवसर में नहीं बदल रही है, बल्कि जब भी यहां आपदा आती है तो गिद्ध के झुंड झुंड वहां जल्दी से जल्दी मंडराने लगते हैं। गिद्ध का काम ही है लाशों पर मंडराना।

आबकी बार ये गिद्ध बहुतायत में मंडरा रहे हैं, जिससे ये सबकी नजर में ज्यादा आने लगे हैं। हद तो देखिए कॉरोना से मृत व्यक्तियों की लाशों पर चढ़ाई गई महंगी महंगी शालें भी मुर्दाखोरों द्वारा मार्केट में बेची जा रही हैं। मानवता को तारतार करने में इन्हें थोड़ी भी लज्जा नहीं आ रही है। दवाइयों की जमाखोरी से लेकर खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतें आम आदमी को बिना कॉरोना के ही जान पर बन आई हैं।

बात सात-आठ साल पुरानी है। केदारनाथ की त्रासदी। उस महाविपदा में भी इस बिरादरी के लोगों ने आपदा में अवसर पहचानते हुए भोजन और पानी की मनमानी कीमत वसूली थी। आपदा में अवसर ढूंढने वालों का इतिहास बहुत पुराना है। यूं तो एक अच्छे अवसर की तलाश में सभी प्रोफेशन वाले चाहे पत्रकार हो,अध्यापक हो, डॉक्टर हो, इंजीनियर हो, बिजनिसमैन हो, प्रोपर्टी डीलर हो, वकील हो या फिर टैक्सी ड्राइवर या कोई और सबके सब रहते हैं।

अच्छे अवसर की तलाश कोई गुनाह नहीं है। लेकिन गुनाह तब जरूर बन जाता है जब आप दूसरे की मजबूरी में अपने लिए अच्छे अवसर की तलाश करते हैं। इसी वजह से जब कोई दूसरे की जान का सौदा करने लगता है फिर हर किसी की आत्मा रुदन करने लगती है , हर किसी की आत्मा दर्द से कराहने लगती हैं। ऐसे घृणित कृत्यों के कारण कोई मानवता को शर्मसार होने से नहीं बचा सकता है।

यह भी सामाजिक सत्य है कि कोई भी व्यक्ति ईमानदार तभी तक है,जब तक वह बेईमानी करते हुए नहीं पकड़ा जाता है या फिर उसे बेईमानी का अवसर ही उपलब्ध नहीं होता है। अवसरप्राप्त व्यक्ति के चरित्र का ही मूल्यांकन किया जा सकता है। सभी तरह की काला बाजारी में सरकारी दफ्तरों की भी भूमिका कम नहीं होती है। अगर यह सब नहीं होता तो फिर नकली माल का व्यापार धड़ले से कैसे पूरे देश में चल सकता है?

अब रही बात कमाई के वैध और अवैध तरीकों की तो भाईसाहब! वैध और अवैध का स्थान आता है पकड़े जाने के बाद।

 

डिस्क्लेमर- उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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