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ऑनलाइन स्कूली शिक्षा पारंपरिक शिक्षा के लिए सही विकल्प है?

jyotiseth

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भारत के ऑनस्कूललाइन स्कूल
भारत के ऑनलाइन स्कूल में पढता हुआ बच्चा, आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग करता हुआ

यह डिजिटल शिक्षा का युग है। छात्र बिना घर से बाहर निकले भी सफलतापूर्वक शिक्षा प्राप्त कर सकता है। ऑनलाइन शिक्षा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कोई नई बात नहीं है पर अब वक्त आ गया है कि इसी सोच को स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनाया जाए।

ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम
प्रारंभ से ही शिक्षकों को गुरु का दर्जा दिया गया है उनका कार्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं बल्कि छात्रों को आत्मनिर्भर बनाना है।  ऑनलाइन स्कूलों में लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम नामक सॉफ्टवेयर का प्रबंध होता है जो कि बच्चों के मनोविज्ञान को और उनकी द्वारा पढ़े जाने वाले पाठ को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है। छात्र जितना हो सके इसका प्रयोग कर सकता है और आत्मनिर्भर बन सकता है। यही सिस्टम छात्र का रिकॉर्ड रखने में और उनके विकास का आकलन करने में भी प्रयोग किया जा सकता है।

ऑनलाइन स्कूलों द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाला पाठ्यक्रम
अधिकतम ऑनलाइन स्कूल अमेरिकी पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा देते हैं जो कि भारतीय शिक्षा प्रणाली से इस प्रकार भिन्न है कि यह काफी लचीला है। जहां भारतीय शिक्षा प्रणाली में अंग्रेजों के जमाने के बाद से बहुत ही कम बदलाव किए गए हैं वहीं अमेरिकी पाठ्यक्रम छात्रों की आवश्यकता के अनुसार बहुत बार परिवर्तित किया गया है।

ऑनलाइन स्कूल मतलब निजीकृत शिक्षा
जहां भारत में अधिकतर स्कूलों में एक कक्षा में 40- 50 छात्रों का होना स्वभाविक है वही ऑनलाइन स्कूलों में एक समय पर एक शिक्षक ज्यादा से ज्यादा 9 बच्चों को ही पढ़ाता है जिससे अध्यापक हर बच्चे पर ध्यान ज्यादा दे सकता है। कौन सा बच्चा किस प्रकार की गलतियां ज्यादा करता है यह समझ सकता है और उसके अनुसार उन्हें समाधान भी सुझा सकता है।

व्यक्तिगत अंतर को ध्यान में रखकर किया गया है डिजाइन
हर छात्र एक दूसरे से अलग है यह हम जानते हैं कुछ छात्र एक विषय को जल्दी समझ लेते हैं और कुछ समय लेते हैं छात्र लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम से एक ही पाठ को आवश्यकता अनुसार बार-बार कर सकता है और उसे दूसरों की गति के अनुसार चलने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।

जब चाहो जहां चाहो शिक्षा लो
ऑनलाइन शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ तो यह है कि छात्र जब चाहे जहां चाहे शिक्षा ले सकता है । महामारी काल में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी खतरों से हम भलीभांति परिचित हैं। महामारी जाने पर भी बहुत सी ऐसी बीमारियां हैं जो एक से दूसरे में फैलती है। स्कूलों में होने वाली बदमाशी से तो हम सब भलीभांति परिचित हैं , क्या ऑनलाइन स्कूल इन सब से बचने का बेहतर विकल्प नहीं? सोच कर देखिए क्या आपको नहीं लगता कि भारत अब इस नए बदलाव के लिए तैयार है?

 

डिस्‍क्‍लेमर: उपरोक्‍त विचारों के लिए लेखक स्‍वयं उत्‍तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्‍य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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