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मानवता के शत्रु

jls

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पठानकोट के भीषण मुठभेड़ में रविवार शुबह तक हमारे सात सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए जबकि पांच घुसपैठिए मारे गए। NSG का एक कमांडो भी जख्मी हुआ. कई नागरिक भी गोलियों के शिकार हुए. एयरफोर्स स्टेशन के अन्दर एक IED को निष्क्रिय करते समय उसके फट जाने से लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार भी शहीद हो गए. अब पूरे देश के प्रमुख शहरों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया. खतरा टला नहीं है, बल्कि एक डर का वातावरण ही पैदा हो गया है. धमाके हो रहे हैं और अलग अलग जगहों बम की अफवाह भी फ़ैल रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत की प्रगति को पचा न पाने वाले ‘मानवता के शत्रुओं’ ने पठानकोट में हमला किया। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि रक्षा बलों के पास हमारे शत्रुओं के नापाक इरादों को परास्त करने की ताकत है। ‘हमारे सुरक्षा बलों ने उन्हें सफल नहीं होने दिया। अपने जवानों और सुरक्षा बलों पर हमें गर्व है।’ उन्होंने पंजाब के पठानकोट में भारतीय वायु सेना के ठिकाने पर शनिवार को तड़के पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले का उल्लेख करते हुए यह बात कही। उन्होंने आगे कहा, मैं अपने देशवासियों को यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे सशस्त्र बलों के पास हमारे शत्रुओं के नापाक इरादों को परास्त करने की ताकत है। देश की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहने वाले सशस्त्र बलों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि अगर देश एक स्वर में बोलता है तो हमारे शत्रुओं की बुरी इच्छा का नाश हो जाएगा। यह आतंकवादी हमला पीएम मोदी की अचानक हुई पाकिस्तान यात्रा के कुछ ही दिन बाद हुआ है। बहुत सारे लोग इसे मोदी जी की ‘कूटनीति’ की विफलता भी मान रहे हैं. हालाँकि पकिस्तान की आधिकारिक रिपोर्ट में इस घटना की निंदा की गई है.
वायुसेना ने कहा, समय पर कार्रवाई से आतंकवादियों के मंसूबे नाकाम
वायुसेना ने शनिवार को दावा किया कि सही समय पर खुफिया सूचना मिलने और त्वरित कार्रवाई से पठानकोट वायुसेना स्टेशन में उसकी महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों को नष्ट करने की आतंकवादियों की संभावित योजना विफल हो गई। फिर भी सुरक्षा में चूक से नाकारा नहीं जा सकता.
पाकिस्तान सीमा से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पठानकोट वायुसेना केंद्र वायुसेना के मिग-21 जंगी विमानों और एमआई-25 जंगी विमानों का अड्डा है। इस वायुसेना केंद्र पर हथियारबंद पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा धावा बोले जाने के करीब 15 घंटे बाद एक बयान में वायुसेना ने कहा कि उसे खुफिया सूचना मिल गई थी कि ऐसा हमला होगा।
बयान में कहा गया है, ‘आतंकवादियों द्वारा पठानकोट इलाके में सैन्य प्रतिष्ठानों पर घुसपैठ करने की आतंकवादियों की संभावित कोशिश के बारे में खुफिया सूचना उपलब्ध थी। जवाब में वायुसेना ने ऐसे किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर रखी थी। ’ वायुसेना ने कहा कि जैसे ही आतंकवादियों का यह समूह पठानकोट वायुसेना केंद्र पर पहुंचा, प्रभावी तैयारी तथा सभी सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयास की वजह से हवाई निगरानी प्लेटफार्म के जरिए उसका पता चल गया।
त्वरित कार्रवाई से संपत्तियां नष्ट होने से बचीं
पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तांन अधिकृत कश्मीीर (पीओके) में रची गई थी, जोकि दिसंबर के पहले हफ्ते में हुई थी। उच्चस ख़ुफ़िया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में बैठक में जैश, लश्कर, हिज्बुल के आतंकी शामिल थे। ख़ुफ़िया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्ता न के बहावलपुर की अल रहमत ट्रस्ट पर इन आतंकियों को मदद देने का शक है। इस ट्रस्ट, के मुखियाओं के नाम अशफाक अहमद और अब्दुयल शकुर हैं।
सूत्रों ने बताया, अल रहमत ट्रस्टक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मसद का संचालन केंद्र है। इसका गठन जैश-ए-मोहम्मटद को सहायता देने के लिए किया गया है। पाकिस्तारन में साल 2002 में जैश पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद, उसने अपने ऑपरेशन चलाने के लिए अल रहमत ट्रस्टश को मुखौटा संगठन बना लिया।
सेना से जुड़े खुफिया सूत्र बताते हैं कि हमले से पहले आतंकवादियों ने पाकिस्तान में अपने आकाओं अशफाक़ अहमद और अब्दुल शकूर से बातचीत की थी। बातचीत में उनका लहजा पाकिस्तान के दक्षिण पंजाब का था। ख़ास बात यह है कि इस हमले में जैश के ही मुखौटा संगठन अल रहमत का हाथ है। यह ट्रस्ट अफगानिस्तान और पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों के लिए वित्तीय और ढांचागत सहायता मुहैया करवाता है। साल 2002 में जैश पर प्रतिबंध के बाद इसका गठन किया गया था। यह ट्रस्ट आतंकवादियों के परिवारों के लिए लोगों से पैसा भी इकट्ठा करता है। साथ ही पाकिस्तान की मस्ज़िदों और मदरसों में बच्चों के दिमाग़ों में जेहाद ज़हर भी भरता है। इस संगठन का मुखिया भी मौलाना मसूद अज़हर अल्वी है जिसको नेपाल में IC-814 के अपहरण के बाद रिहा किया गया था।
उधर शिवसेना ने पठानकोट में पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए शनिवार को कहा कि ‘आतंकवाद और शांतिवार्ता साथ-साथ नहीं चल सकती।’ शिवसेना ने इस बात को लेकर चिंता जताई कि यह हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के लाहौर यात्रा के सप्ताह भर के भीतर हुआ है।
हमला कहां से हुआ, बताने की जरूरत नहीं शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने यहां कहा, ‘जब भी हमारे ऊपर कोई हमला होता है, यह कहने की जरूरत नहीं कि उसके पीछे कौन है। हम आंख बंद करके भी कह सकते हैं कि हमलावर पाकिस्तान से हैं।’
मोदी की पाकिस्तान यात्रा के बाद हमला
राउत ने कहा कि यह हमला पिछले सप्ताह बिना किसी पूर्व कार्यक्रम के प्रधानमंत्री के लाहौर में रुकने के बाद हुआ है। उन्होंने कहा, ‘हम राजनीति नहीं करना चाहते लेकिन यह तथ्य है कि द्विपक्षीय शांतिवार्ता और आतंकवादी हमले साथ-साथ हो रहे हैं। यह नहीं चलेगा।’ उन्होंने कहा कि शांति वार्ता और आतंकवाद साथ-साथ नहीं चल सकते और यह शिवसेना का शुरू से ही रुख रहा है। शिवसेना भाजपा की प्रमुख सहयोगी पार्टी के साथ ही केंद्र की राजग सरकार का हिस्सा भी है।
मुंहतोड़ जवाब कब देंगे गृह मंत्री?
राउत ने सवाल किया, ‘केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि ऐसे हमलों पर भारत की ओर से मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री एक गंभीर व्यक्ति हैं और हम उनका सम्मान करते हैं। लेकिन हम पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब कब देंगे?’ राउत की यह टिप्पणी गृह मंत्री के उस बयान के मद्देनजर आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत की धरती पर यदि कोई आतंकवादी हमला हुआ तो वह करारा जवाब देगा। लेकिन करारा जवाब है क्या अभी तक हम रक्षात्मक कार्रवाई ही कर रहे हैं हमारे सेना के जवान और अधिकारी लगातार शहीद हो रहे हैं.
स्वाभाविक है कि ऐसे मौके पर विभिन्न प्रकार के बयान आयेंगे. भाजपा बिरोधी दल चुटकी भी ले सकते हैं. पर यह देश का मामला है. प्रधान मंत्री और गृह मंत्री का साधा हुआ बयान है और हमें यानी भारतीय जनता को सरकार के साथ पूर्ण सहमति ब्यक्त करनी चाहिए. शान्ति-वार्ता कायम रहे यह दोनों देश के हुक्मरान चाहते हैं. पर शांति और अमन के दुश्मन कभी नहीं कहेंगे कि भारत पाक संबंधों में मधुरता आये. ‘युद्ध’ किसी समस्या का हल नहीं हो सकता बल्कि लोकतान्त्रिक तरीके से मसाले को सुलझा लिया जाय वही बेहतर है. हाँ हमें चौकस रहना पड़ेगा और अपने ख़ुफ़िया तंत्र को और ज्यादा मजबूत करना होगा, ताकि जान-माल की बर्बादी को बचाया जा सके. दूसरे शक्तिशाली देश, यु. एन. ओ. ने भी प्रधान मंत्री के पकिस्तान दौरे की तारीफ की है, तो छोटे-मोटे संगठन के हमलों और नापाक इरादों से घबराने की जरूरत नहीं है, ऐसा मेरा मानना है. अमन पसंद लोग कभी भी युद्ध नहीं चाहेंगे क्योंकि युद्ध हर हाल में बरबादी लेकर ही आता है. अभी हमें अपनी अर्थ ब्यवस्था को मजबूत कर भारत को संपन्न राष्ट्र बनाने की आवश्यकता है, जिसके लिए प्रधान मंत्री दिन-रात अनवरत प्रयासरत हैं. पर, सजगता और एकजुटता जरूरी है. हर हाल में हमें अपने देश को सुरक्षित रखना है और विकास के पथ पर दौड़ाना है. निश्चित ही बड़े अधिकारी और नेता इस तरफ अपना ध्यान केन्द्रित रक्खे होंगे, इसीलिये प्रधान मंत्री और गृह मंत्री ही आधिकारिक बयान दे रहे हैं. ऐसे मौके पर मीडिया को भी बहुत ज्यादा सम्हल कर रिपोर्टिंग करनी चाहिए. अगर हमारा देश सुरक्षित है, तो हम सभी सुरक्षित हैं. सेना के हौसले को सलाम और जयहिन्द! जय भारत !
जितनी जानकारी छन -छन के आ रही है, उसका निष्कर्ष यही निकलता है की, दोनों देश की लोकतान्त्रिक सरकारें तो चाहती हैं कि आपसी बात चीत से मुद्दे को सुलझाया जाय और आपसी संबंध बेहतर बनाये जाएँ पर कुछ आतंकवादी संगठन जिनका नाम आ रहा है, वे अपनी उपस्थिति, अस्तित्व और महत्व को बनाये रखने के लिए भी इस प्रकार की हरकत कर रहे है. इस आतंकी हमले को छोटा हमला नहीं मानकर बड़ा हमला माना जाना चाहिए.. भारत को अपना ख़ुफ़िया तंत्र के साथ सीमा पर और भी चौकसी के उपाय बनाये रखने चाहिए. पूर्व जानकारी मिल जाने के कारण ही सैन्य हथियारों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है अन्यथा अनहोनी हो सकती थी. हमें सेना और सुरक्षाकर्मियों के हौसले को सलाम करना चाहिए तथा उसके मनोबल को बनाये रखने के हर सम्भव प्रयास किये जाने चाहिए. निश्चित ही बड़ा युद्ध नहीं चाहते पर आतंकवाद का खत्म जरूरी है. पूरा विश्व इन आतंकवादियों के हमलों से परेशान है. पता नहीं कौन उन्हें बढ़ावा देता है जबकि अब शक्तिशाली देश भी इसके खिलाफ हैं. क्योंकि वे भी इसके अंजाम से वाकिफ हो चुके हैं.
– जवाहर लाल सिंह, जमशेदपुर.

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