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मानसून में मन को घूमने दे केरल में- Hindi Travel Blog

Jagran Yatra
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मानसून एक शब्द जो मन को प्रफुल्लित कर देता है. मिट्टी की वह खूशबु, हल्की हल्की बुंदे और कागज की कश्ती मानसून का पहला अहसास यही होती है. मानसून साल का वह समय जब जीव जानवर सब अपने आप को खुश पाते है. मानसून रिमझिम फुवारों और रंगीन इन्द्रधनुष का समय. मानसून का मतलब यह नही है कि आप रेनकोट में समा जाएं और हल्का हल्का भीग कर खुश होते रहे बल्कि अस्ली मजा तो बारिश में नहाने का, घुटने तक पानी में उतर कर मजे करने का और अपने मन को बच्चा बना डालने का.



मानसून में वैसे तो हर जगह सुहानी लगती है लेकिन जो खुबसूरती केरल में  है वह कहीं और नहीं. गर्मी के उमस भरे मौसम के बाद बडी मुश्किल से जीवन के कुछ पल मिलते है. मानसून आते ही जैसे किसानों की आंखे चमक जाती है, चारों तरफ हरियाली, नदियां अपने आपको पूर्ण करती है तो आम की खुशबू हवा को महका देती है, कहीं फूलों की चमक तो कहीं नारियल के पत्तों पर पानी की चमकदार बूंदे. केरल की खूबसूरती मानसून में अपने चरम पर होती है.

मानसून के समय केरल के बेकवाटर्स का अपनी ही सौंदर्य होता है. केरल के बैकवाटर्स अपनी खूबसूरती के लिए काफी प्रसिद्ध है. रल में बैकवाटर्स (यानी समुद्र का वह पानी जो लौटकर जमीन की तरफ आ जाता है) देखने लायक है. हरे-भरे धान के खेतों के बीच ऊंचे नारियल के पेड़ और साथ में बैकवाटर्स. यहां कुल मिलाकर करीब 900 किमी का बैकवाटर्स नेटवर्क है. अल्लपुष़ा (एलेप्पी), कोट्टयम व कोच्ची बैकवाटर्स के प्रमुख केंद्र हैं. एलेप्पी तो सबसे खास है.

केरल में जरुरी नही कि आप सिर्फ घूमने के लिए जाएं बल्कि केरल को स्वास्थ्य पर्यटन के साथ भी जोड कर देखा जाता है. प्रकृति ने इसे स्वास्थ्यवर्धक जलवायु तो दिया ही है, यहां हरे-भरे वनों में ऐसी कई जड़ी-बूटियां तथा उपयोगी वनस्पतियां भी मिलती हैं जो रोगों को दूर भगा सकती हैं. यहां  दो तरह के कार्यक्रम होते हैं. एक कायाकल्प चिकित्सा है, जिसमें शरीर को पूर्ण निरोगी बनाने का प्रयास होता है. दूसरी औषधीय चिकित्सा जिसमें रोग विशेष का उपचार होता है. यानि साफ है अगर आप मानसून में केरल जा रहे है तो आपके मन के साथ आपके शरीर को भी पूरा आराम मिल सकता है.

केरल में सिर्फ प्राकृतिक सौन्दर्य ही नही बल्कि मंदिरों और ईश्वरीय भक्ति के लिए भी केरल जैसे जगह नही है. देवभूमि के नाम से मशहूर केरल में हर कुछ कदम पर अपको मंदिर दिख जाएंगे.

तो हो जाईयें तैयार इस मानसून में केरल जाने के लिए. एक ही तीर से तीन तीन शिकार की इससे बढिया जगह नही होगी.

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