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दिल्ली : राजधानी की शान के चंद नगीने 2

Jagran Yatra

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jama-masjid-delhiजामा मस्जिद

लाल किले से महज 500 मी. की दूरी पर जामा मस्जिद स्थित है जो भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है. इस मस्जिद का निर्माण 1650 में शाहजहां ने शुरु करवाया था. इसे बनने में 6 वर्ष का समय और 10 लाख रु. लगे थे. बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित इस मस्जिद में उत्तर और दक्षिण द्वारों से प्रवेश किया जा सकता है. पूर्वी द्वार केवल शुक्रवार को ही खुलता है. इसके बारे में कहा जाता है कि सुल्तान इसी द्वार का प्रयोग करते थे. इसका प्रार्थना गृह बहुत ही सुंदर है. इसमें ग्यारह मेहराब हैं जिसमें बीच वाला महराब अन्य से कुछ बड़ा है. इसके ऊपर बने गुंबदों को सफेद और काले संगमरमर से सजाया गया है जो निजामुद्दीन दरगाह की याद दिलाते हैं.

jantar-mantar-ggजंतर मंतर: अनोखी भूल-भूलैया

जंतर मंतर का निर्माण सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 में करवाया था. यह इमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है. ग्रहों की गति नापने के लिए यहां विभिन्न प्रकार के उपकरण लगाए गए हैं, सम्राट यंत्र जहां सूर्य की सहायता से वक्त और ग्रहों की स्थिति की जानकारी देता है तो मिस्र यंत्र वर्ष के सबसे छोटे और सबसे बड़े दिन को नाप सकता है. राम यंत्र और जय प्रकाश यंत्र खगोलीय पिंडों की गति के बारे में बताते हैं. आधुनिकता और प्राचीन इतिहास की मिली-जुली झलक इसमें दिखती है. यह भवन दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित है.


kutub minar
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कुतुब मीनार: ऊंचाई के रोमांच का प्रतीक

कुतुब मीनार का निर्माण कुतुब-उद-दीन ऐबक ने 1199 में शुरु करवाया था और इल्तुमिश ने 1368 में इसे पूरा कराया. इस इमारत का नाम ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया.

ऐसा माना जाता है कि इसका प्रयोग पास बनी मस्जिद की मीनार के रूप में होता था और यहां से अजान दी जाती थी. कुतुबमीनार मूल रूप से सात मंजिल का था लेकिन अब यह पांच मंजिल का ही रह गया है. कुतुब मीनार की कुल ऊंचाई 72.5 मी. है और इसमें 379 सीढ़ियां हैं. मस्जिद के पास ही चौथी शताब्दी में बना लौहस्तंभ भी है जो पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है जिस पर अशोक के संवाद गुदे हुए हैं.

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