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तिमिर पर कभी तो मिलेगा किनारा

Jagran Junction Blog

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प्रिय पाठकों,


!! गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!

हम लड़े, हम बढ़े, और बढ़ते रहे

आजादी के शिखर चढ़ते रहे

आखिर थी हमने सद्गति पाई

जश्न-ए-आजादी की घड़ी जब आई!


हर साल हम स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाकर आजादी के शहीदों को याद करते हैं। वे जो मिट गए हमारे लिए, उनकी शहादत को नमन करते हैं, श्रद्धा अर्पित करते हैं। इन सबके साथ जो एक और महत्त्वपूर्ण बात है वह यह कि इतनी मुश्किलों से पाई आजादी की अनमोल कीमत को महसूस करते हैं।


गणतंत्र दिवस हम हर साल बड़े धूमधाम से मनाते हैं लेकिन चिंतकों की नजर हमेशा संपूर्ण और वास्तविक गणतंत्र के महत्त्व पर होती है। अक्सर बहस सुनने को मिलती है कि हम आजाद होकर भी पूरी तरह आजाद नहीं हो पाए। परदेशियों से मुक्त होकर हम अपने ही लोगों के गुलाम हो गए हैं। छिछली राजनीति और भ्रष्टाचार के दलदल में देशभक्ति की भावना कहीं गुम हो गई है। गुलाम भारत में ‘फूट डालो, राज करो’ की अंग्रेजों की नीति अब सत्ता के लोभ में अपने ही लोग उपयोग करने लगे हैं। क्या इस तरह कभी देश वास्तविक गणतंत्र होने का उत्सव मना सकता है?


उम्मीद पर दुनिया कायम है। हम आशा का दामन थामे चल रहे हैं कि कल हमारा भारत फिर से महान् बनेगा और हम वास्तविक रूप से गणतंत्र का जश्न मनाएंगे। गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम पाठकों को इस जश्न के वास्तविक महत्त्व पर ब्लॉग लिखने के लिए आमंत्रित करते हैं।


कितना खोखला कितना वास्तविक है यह गणतंत्र?


नोट: अपना ब्लॉग लिखते समय इतना अवश्य ध्यान रखें कि आपके शब्द और विचार अभद्र, अश्लील और अशोभनीय ना हों तथा किसी की भावनाओं को चोट ना पहुंचाते हों।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार

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