Menu
blogid : 7629 postid : 1270745

इस रेलवे लाइन को कहा जाता है मौत की लाइन, हजारों लोगों ने इस वजह से दी थी जान

1हाँ काम करने वाले मज़दूरों को उचित रूप से भोजन नहीं मिलता था. जिससे उनके स्वास्थ्य में दिन प्रतिदिन गिरावट आने लगी फिर भी उनसे बलपूर्वक कार्य कराया जाता था. धीरे – धीरे भोजन और दवाइयों के अभाव में रोज हज़ारों मज़दूरों की मौत होने लगी.  इस सारी योजना का हिस्सा रहे अनेक लोग आज भी जीवित हैं जो उन मज़दूरों  की दुर्दशा का बड़ा मार्मिक चित्रण करते हैं.
उस समय के चश्मदीद गवाहों और सूत्रों के अनुसार थाई -बर्मा  लाइन को बनाने में 1000 जापानी लोगों सहित लगभग 90,000 बंदी मज़दूर मारे गए जिनमे से 2700 से अधिक ऑस्ट्रेलिया के थे…Next
Read More:

1942 में जापान ने थाईलैंड और बर्मा को जोडने वाली एक रेलवे लाइन को बनाने का निर्णय लिया ताकि वह अपने मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध चलाये गए अपने अभियान को बर्मा तक पहुँच सकें  और 16 अक्टूबर 1943 में यह रेलवे लाइन बनकर तैय्यार हो गयी. इस रेलवे ट्रैक को थाई – बर्मा लाइन का नाम दिया गया जिसको बनाने में दूसरे विश्व युद्ध का सबसे भयंकर नर संहार हुआ था.

rail


दूसरे विश्व युद्ध में भारी मात्रा में लोग मारे गए. इस 415 किलोमीटर की रेलवे लाइन को बनाने में हज़ारों लोगों को अपनी  जान गवाँनी पड़ी जिसके कारण इसका नाम ‘रेलवे ऑफ़ डैथ’ पड गया. ब्रिटिश ऑफ़ इंडिया पर हमला करना इस रेलवे लाइन के निर्माण का मुख्य उद्देश्य था.


railways

हालाँकि दूसरे विश्व युद्ध के बहुत पहले  थाई बर्मा रेलवे लाइन की योजना बनायीं गयी थी लेकिन घने जंगलों में सड़कों के अभाव और विशाल पहाड़ों के कारण इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं हो पाया और वर्ल्ड वॉर II से पहले 1942 में जापानियों ने दक्षिण पूर्व एशिया पर विजय हासिल कर वहाँ के 60,000 लोगों को बंदी बना लिया था.

Death Railway


Read: दुनिया के 5 बड़े हॉन्टेड रेलवे स्टेशन में भारत का ये स्टेशन भी शामिल


चूँकि जापानी इस रेलवे लाइन के कार्य को जल्दी से जल्दी पूरा करना चाहते थे इसलिए उन्होंने बंदी बनाये गए लोगों को इस काम में लगा दिया जिसमें लगभग 13,000 कैदी ऑस्ट्रेलिया के थे . कुछ समय बाद जापानियों को लगा कि यह लोग इस काम को समय पर पूरा करने में असमर्थ हैं तो उन्होंने लगभग 2,00,000 एशियाई मज़दूरों को इस कार्य के लिए प्रलोभन दिए.  जब उनमें से कुछेक ने इस काम में हाथ बँटाने से मनाही की तो उनको शोषित कर इस कार्य के लिए राजी किया गया.

Thai-Burma railway


यहाँ काम करने वाले मज़दूरों को उचित रूप से भोजन नहीं मिलता था. जिससे उनके स्वास्थ्य में दिन प्रतिदिन गिरावट आने लगी फिर भी उनसे बलपूर्वक कार्य कराया जाता था. धीरे – धीरे भोजन और दवाइयों के अभाव में रोज हज़ारों मज़दूरों की मौत होने लगी.  इस सारी योजना का हिस्सा रहे अनेक लोग आज भी जीवित हैं जो उन मज़दूरों  की दुर्दशा का बड़ा मार्मिक चित्रण करते हैं.


Burma railway

उस समय के चश्मदीद गवाहों और सूत्रों के अनुसार थाई -बर्मा  लाइन को बनाने में 1000 जापानी लोगों सहित लगभग 90,000 बंदी मज़दूर मारे गए जिनमे से 2700 से अधिक ऑस्ट्रेलिया के थे…Next


Read More:

यहां की गलियों से ऐसे गुजरती है ट्रेन, देखने वाले हो जाते हैं अचंभित

खुद चिपक जाती है यहाँ रेल पटरियां, वैज्ञानिकों के लिए आज भी है यह अनसुलझी पहेली

गांव वालों के जिम्मे है यह रेलवे स्टेशन, काटते है खुद ही टिकट

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *