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पहले दोस्तों से नहीं दुश्मनों से मिलाया जाता था हाथ, ‘हैंडशेक’ के पीछे है इतिहास की ये कहानी

‘सफर लंबा है दोस्त बनाते रहिए, दिल मिले न मिले हाथ मिलाते रहिए.’

आज के बदलते वक्त में बिल्कुल आपके जैसी सोच रखने वाला शायद ही आपको दुनिया में कोई मिल पाए, इसलिए समझदारी इसी में है कि दिल न मिल पाने की स्थिति में भी खुशमिजाजी के साथ लोगों को वैसे ही स्वीकार करने की कोशिश करें, जैसे वो हैं. चलिए, ये बात हुई हाथ और दिल मिलाने की. अब बात करते हैं सिर्फ हाथ मिलाने की. कभी आपने सोचा है कि जब भी आप अपने किसी खास परिचित से मिलते हैं, तो आप उनसे हाथ मिलाते हैं, वहीं ऑफिसों में हाथ मिलाना (हैंडशेक) विश करने का एक तरीका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हाथ मिलाने का चलन कब और कैसे शुरू हुआ. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि शक को दूर करने के लिए दुश्मनों से हाथ मिलाया जाता था.


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5वीं सदी से शुरू हुआ ‘हाथ मिलाना’

पुराने अभिलेखा चित्रों के आधार पर आर्कियोलॉजिस्ट ने ये निष्कर्ष निकाला है कि प्राचीन ग्रीस में पांचवी सदी में हाथ मिलाने की अवधारणा चलन में आई. वहां पर युद्ध की स्थिति में सेना इतने तनाव में आ जाती थी कि उन्हें हर व्यक्ति पर शक होता था कि कहीं ये दुश्मन देश का कोई सिपाही तो नहीं, इस वजह से वो आपस में हाथ मिलाकर ये सुनिश्चित करते थे कि कहीं उस व्यक्ति के हाथ में कोई हथियार तो नहीं है.


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धीरे-धीरे ये चलन बन गया कि जब भी कोई सिपाही किसी अनजान व्यक्ति से मिलता, तो वो हाथ मिलाकर अपने शक को दूर करता था. ग्रीस से होता हुआ ये हाथ मिलाने का चलन दुनिया के दूसरे देशों में फैल गया. अब सेना ही नहीं बल्कि सामान्य लोग भी एक-दूसरे से अपने दोनों हाथ मिलाकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने लगे.



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समय के साथ मुस्कुराहट के साथ ‘हैंडशेक’ बन गया विश करने का तरीका

सदियां बीतने के साथ ही हाथ मिलाना एक विश करने का तरीका बन गया. धीरे-धीरे लोगों को ये तरीका शक दूर करने के तरीके से ज्यादा एक-दूसरे से मिलने का तरीका बनाना ज्यादा अच्छा लगा. तो, देखा आपने दुश्मनों से हाथ मिलाते-मिलाते कैसे लोग, अब सिर्फ दोस्तों से ही हाथ मिलाते हैं. इतिहास से जुड़ी हुई बातें वाकई बहुत जबर्दस्त होती हैंं, तो इसी तरह आप भी मुस्कुराकर हाथ मिलाकर दोस्त बनाते रहिए…Next


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