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300 बार जहरीले साँपों ने काटा है इन्हें, इस देश के प्रिंस भी हैं इनसे प्रभावित

आम तौर पर बहुत सारे लोग पेट पालने का शौक रखते हैं, साथ ही उनको अपने परिवार के सदस्य की तरह प्यार भी करते हैं. लेकिन बड़ा अज़ीब लगेगा आपको जानकर कि केरल का एक व्यक्ति सबसे अधिक खतरनाक और जहरीले साँपों का पालने का शौक रखता है.


suresh cover


इंडियन स्नेक मैन’ से मशहूर है सुरेश

42 वर्षीय सुरेश ‘तिरुवनंतपुरम’  जिले के छोटे से कस्बे ‘श्रीकार्यम’ के निवासी हैं जो, “इंडियन स्नेक मैन” के नाम से जाने जाते हैं. 10वीं पास सुरेश पिछले 27 सालों से साँपों के बचाने का काम कर रहे हैं, और राज्य में साँपों के सबसे बड़े रक्षक के रूप में प्रसिद्ध हैं. जहाँ साँप को अचानक देखकर अच्छो-अच्छो के होश उड़ जाते हैं, वहींं सुरेश ने मात्र 12 साल की उम्र एक जहरीले साँप को बड़ी आसानी से अपने काबू में कर लिया था. फिर यह सिलसिला ऐसा चला कि आज तक थमने का नाम नहीं है .


Suresh



सांप पकड़ना है जीवन का लक्ष्य

धीरे-धीरे सुरेश के मन में साँपों के प्रति प्रेम और आकर्षण की भावना पैदा हो गयी जिसके कारण यह सुरेश के जीवन का लक्ष्य बन गया. वह अपने हुनर से साँपों के हाव-भाव समझकर उनको बिना चोट पहुँचाये बड़ी आसानी से अपने काबू में कर लेते हैं और उनको थोड़े दिन अपने साथ रखकर कुछ समय बाद जंगलो में छोड़ देते हैं.



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300 बार जहरीले साँपों ने काटा है सुरेश को

इस काम को सुरेश बिना किसी उपकरण और सेफ्टी गार्ड्स के करते हैं. 30,000 हज़ार से अधिक साँपों को बचाने वाले सुरेश लगभग 300 बार जहरीले साँपों द्वारा काटे जा चुके हैं. कई बार साँपों का जहर उनकी शरीर में इस कदर फ़ैल गया कि उनको 6 बार ICU में भर्ती होना पड़ा और 3 बार वेंटिलेटर पर रहकर मौत को मात देते हुए सुरेश आज साँपों के साथ अपना जीवन जी रहे हैं.


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नहीं लेता है पैसे

उनका कहना है कि -“साँप ज्यादातर गरीब लोगों के कच्चे घरों में पाए जाते हैं, और उनकी आर्थिक हालात को देखते हुए मैं उनसे पैसे नहीं ले सकता. लोग जो भी कुछ धनराशि देते हैं मैं उसको ख़ुशी से स्वीकार कर लेता हूँ . लोगों की गरीबी को देखते हुए मैंने अपना कोई भी रेट फिक्स नहीं किया है”. सुरेश के साहसिक कार्य को देखते हुए, 2012 में ‘फॉरेस्ट एंड एनवायरमेंट मिनिस्टर’  के. बी.गणेश कुमार ने उनको सरकारी नॉकरी का ऑफर दिया लेकिन सुरेश ने यह कहते हुए नौकरी ठुकरा दी – “यदि मैं यह ऑफर एक्सेप्ट कर लेता, तो मैं अपने तरीके से समाज की मदद नहीं कर पाता और मेरे समय पर उपलब्ध न होने से कोई निर्दोष इंसान या साँप बेवजह मौत का शिकार हो जाएगा.


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2013 में ब्रिटेन के ‘प्रिंस चार्ल्स’ ने अपने केरल दौरे के समय सुरेश से मिलने की इच्छा जाहिर की, और उनको इस अद्भुत कार्य के लिए सम्मानित भी किया. निस्वार्थ समाज की सेवा करने वाले सुरेश को साँपों का मशीहा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा…Next


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