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भ्रष्टाचार की बौछार

awaaz

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घर से चले हम लेकर नयी कार,
सोचा बारिश में खायेगे भुट्टे मजेदार.
अगले चौराहे पर मिल गया मोटा हवलदार,
बोला लगाओ कार उस पार.

 

 

 

हम ने सोचा क्यों करे अपना मूड बेकार,
लगा लेते हैं शांति से कार उस पार.
लगते ही हमारे कार,
आ गया पास वो मोटा हवलदार.

 

 

 

बोला कहांं लेकर चले बिना नंबर की कार,
हमने कहा कल ही ली है नई कार.
हमारा जबाब सुन कर बोला हवलदार,
माना तुने कल ही ली नयी कार.
पर तुने लाल बत्ती पर किया है चौराह पार,

 

 

 

हम पे भी था खुमार,
हम ने भी कह दिया हम ने कब किया चौराह पार.
हमारी बात सुन कर भड़क गया हवलदार,
कहना क्या चाहता है झूठ बोलता है श्री हनुमान हवलदार.
और चिल्लाते हुए बोला बहुत चढ़ा है तुझ पर खुमार,
उतर जायेगा सारा खुमार जब लगा दूगा चालन चार.

 

 

 

हम पर और चढ़ गया गुस्से का खुमार,
हम भी हो गए लड़ने को तैयार.
बोले हम पर क्यों करोगे चालन चार,
जब हम ने नहीं की कोई हद पार.

 

 

 

हमारी बात सुन कर और भड़क गया हवलदार,
बोला अभी बुलाता हू थानेदार.
हम थोडा घबरा गए सोच कर साथ में है परिवार,
हमारी सूरत देख कर ताड़ गया हवलदार.
फिर हंंस कर बोला नहीं चाहता बुलाऊं थानेदार,
तो निकाल रूपए एक हजार.

 

 

 

हम ने कहा नहीं देंगे एक हजार,
हम नहीं है गुनहगार.
अब तो गुस्से में पागल हो गया हवलदार,
उसने बुला लिया थानेदार.
थानेदार आ कर बोला क्या बात है हवलदार,
बोला हवलदार ये लेकर निकला बिना नंबर की कार.
कर दिया लाल बत्ती पर चौराह पार,

 

 

 

अब कहता है नहीं हूंं मैं गुनहगार.
बात सुन कर भड़क गया थानेदार,
बता किया है तुने चौराह पार.
हम ने कहा हजूर हम ने नहीं किया था चौराह पार,

 

 

 

बात सुन कर भड़क गया हमारी, थानेदार.
बोला क्या झूठा है हमारा हवलदार,
फिर बोला उठा लो इसकी कार.
और जीप में डालो इस का परिवार,
हम बोले ऐसा नहीं कर सकते तुम थानेदार.
यह तो है सरासर भ्रष्टाचार,

 

 

 

भ्रष्टाचार की छोड़ बोला थानेदार.
निकाल पांच हजार नहीं ले जाऊगा कार सहित परिवार,
हम ने बोला नहीं देंगे पाच हजार.
चाहे लिए चलो थाने थानेदार,

 

 

 

ले चलो इस को थाने वहींं लगाएंंगे इसकी मार.
बात करता है बड़ी-बड़ी हजार,
ले पहुंंचे हम को थाने साथ में थे थानेदार.
बोले रात भर लगाओ इस की मार,
जिस से उतर जाये इसका हमसे पंगा लेने का बुखार,

 

 

 

हमारी जमानत में लग गए दिन चार.
और रूपये खर्च हुए पुरे दस हजार,
निकलते ही हमारे बाहर.
बोला हम से थानेदार,
क्यों उतर गया तेरे सिर से आदर्शो का खुमार.

 

 

 

हम ने पूछा कहा है हमारी कार,
बोला थानेदार जब्त कर ली है तेरी कार,
जिस को छुडाने में लगेगे रूपये बीस हजार,
हम ने सोचा लुट गए हम तो बीच बाजार,
बिना बादल भिगो गई हम को भ्रष्टाचार की बौछार.

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी विचार हैं और इसके लिए वह स्‍वयं उत्‍तरदायी हैं। इससे संस्‍थान का कोइ लेना-देना नहीं है।

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