Menu
blogid : 27999 postid : 9

मालाबार: शक्ति संतुलन का प्रयास

Hitendra Pratap Singh Rathore

  • 3 Posts
  • 1 Comment

विश्व के चार महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक देशों यथा संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, भारत, ऑस्ट्रेलिया का मालाबार संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण पड़ाव है। 1991 के बहुध्रुवीय होते विश्व को चीन द्वारा ध्रुवीकरण का प्रयास, वैश्विक आर्थिक नीतियों को अपने पक्ष में करने की कवायद एवं विवादित दक्षिणी चीन सागर के माध्यम से समुद्री व्यापार मार्गों पर कब्जा करने की चीनी नीति पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

अनौपचारिक सहयोग संगठन ‘क्वाड’ के माध्यम से वैश्विक कानूनों की रक्षार्थ विश्वसनीय पहल है।1992 में शुरू हुआ मालाबार युद्धाभ्यास 1998 में भारत पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों से बंद हो गया था। 2002 में पुनः प्रारम्भ होना, इसमें उत्तरोतर जापान-ऑस्ट्रेलिया का सम्मिलित होना तथा 2002 के बाद लगातार 19वां युद्धाभ्यास इसके महत्व को दर्शाता है।

यह युद्धाभ्यास ‘हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र’ में कानून व्यवस्था एवं निर्बाध आवागमन के लिए अत्यंत आवश्यक है। 2020 का सैन्याभ्यास,कोरोना वायरस की उत्पति की निष्पक्ष जांच एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में चीनी-गठजोड़ के विरूद्ध चीन पर दबाव बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण होगा क्योंकि विश्व के चार मुख्य देशों की सैन्य लामबंदी महत्त्वाकांक्षी चीनी ‘बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव’ परियोजना के लिए बड़ी बाधा बन सकता है।

इस युद्धाभ्यास में भारत की केंद्रीय भूमिका एशिया के महासागरीय क्षेत्र में भारत की निर्णायक स्थिति को प्रतिबिंबित करता है। पिछले कई वर्षों से चीन की संदिग्ध आर्थिक-ऋणजाल की नीतियां, द्विपक्षीय समझौतों तथा आक्रामक सैन्य अतिक्रमण क्षेत्रीय शांति तथा वैश्विक असंतुलन को बढ़ावा दे रहा है जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए प्रतिकूल है। ऐसे में भारत द्वारा तर्कसंगत रणनीतिक फैसलों के माध्यम से राष्ट्रहित के मद्देनजर शक्ति को संतुलित करने का प्रयास बहुध्रुवीय व्यवस्था के निर्माण में सहयोगी हो सकता है।

लगातार गिरते अमेरिका-चीन संबंध, जापान के साथ ऐतिहासिक चीनी प्रतिद्वन्दिता, ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक अस्थिरता के चीनी प्रयास एवं भारत-चीन सीमा विवाद, असंतुलित व्यापार,एवं पड़ोसी देशों के साथ प्रतिस्पर्धी संबंध, उक्त सभी परिस्थितियों के कारण क्वाड देशों की चीन के प्रति चिंता जायज है। ऐसे में सामूहिक प्रयासों के माध्यम से रणनीतिक दबाव द्वारा कूटनीतिक हल के प्रयास सराहनीय है।

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं, जागरण डॉटकॉम किसी भी दावे, आंकड़े या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है।

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *