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*अफसर नेता गोल्ड!बाकी सब बोल्ड!!!!!”!-सुभाष बुड़ावन वाला

koi bhi ladki psand nhi aati!!!

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*अफसर नेता गोल्ड!बाकी सब बोल्ड!!! सर, सिविल सर्विस एग्जाम में सफल होना शुरू से ही गौरव का विषय माना जाता रहा है। इसलिए वर्ष 2014 की परीक्षा में सफल युवाओं को पूरा देश सम्मान के साथ देख रहा है। खास बात यह है कि लगातार दूसरी बार लड़कियों ने पहले दोनों स्थानों पर बाजी मारी है। यह लड़कियों के बढ़ते हौसले और हर मुश्किल चैलेंज को स्वीकार करने के उनके जज्बे को दिखाता है। लेकिन इन युवाओं की चमकदार सफलता में हमारे सिस्टम की एक विफलता भी छुपी हुई है, जिसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं होगा। जरा मेरिट लिस्ट पर गौर करें। टॉपर शेना अग्रवाल एम्स से एमबीबीएस हैं। तीसरे स्थान पर रहने वाले प्रिंस धवन ने आईआईटी से एमटेक किया है। आठवीं स्थान पर रहने वाली हर्षिका सिंह ने तो लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स की डिग्री हासिल की है। सवाल यह है कि देश के बेस्ट इंस्टीट्यूशंस से पढ़े डॉक्टर-इंजिनियर और दुनिया के नामी संस्थान से अर्थशास्त्र में विशेषज्ञता हासिल करने वाली एक स्टूडेंट की प्रतिभा और क्षमता क्या देश का प्रशासन चलाने के लिए ही है? क्या वाकई हमारे देश का प्रशासन कार्य इतने सुयोग्य लोगों की मांग करता है कि उसमें डॉक्टरों, इंजिनियरों और दूसरे तकनीशियनों को भी झोंक दिया जाए? आज हमें कुशल प्रशासनिक अधिकारियों की ज्यादा जरूरत है या प्रतिभावान डॉक्टरों, इंजीनियरों और अकेडमिशियंस की? सरकार लाखों रुपये खर्च कर डॉक्टर-इंजिनियर तैयार करती है पर बाद में पता चलता है कि उनमें सबसे तेज-तर्रार लोग कानून-व्यवस्था की कवायद में जुटे हैं या राजनेताओं को संतुष्ट करने में लगे हैं।दुसरे आरक्षण के चलते तकनीकी नौकरियों/प्रशश्निक नौकरियों व संसद में अयोयो कि भरमार हो गई हे! अब एक 20%अंक लाकर डिग्री पाने वाला डॉक्टर/इंजीनियर कैसा कम करेगा यह हम भलीभाँति सोच सकते हे!अब वक्त आह्या हे कि उच्चाधिकारियों को नेताओं के निचे कम करने /सैल्यूट मरने से मुक्त किया जाएँ!प्र्शाश्निक कार्यों में राजनैतिक हस्त्व्ह्हेप बंद किया जाएँ!सभी के वाहनों से लाल्ब्त्ती/पीली बताती क्ा प्रचालन खत्म किया जाएँ!इनकी वीआईपीगीरीखत्म होने पर ही ये धरातल पर रहकर जनसेवा कार सकेंगे!वरना अभी तो भगवान की पूजा तक में ये सबसे आगे घुसकर घंटों पुजा करते रहते हे! ताकि भगवान इन पर प्रसन्न हो ओर बाहर हजारों बूढ़े/बच्चे महिलाएँ चिलचिलाती धूप में अपनी बड़ी का इन्तजार कराते रहते हे!”देते हे भगवान को धोखा /इंसानो को क्या छोड़ेंगे!!”!-सुभाष बुड़ावन वाला27,सुभाष मार्ग,खाचरोद[म्प]धन्यवाद!

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