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लव जिहाद : धार्मिक नजरिये से देखना कहीं खुद को मूर्ख बनाने की कोशिश तो नही

मन के मोती

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आज कल सामाजिक समस्यायों में से लव जिहाद का भी जिक्र करना आवश्यक है ! और शायद ये हमेशा से अस्तित्व में रहा है , किन्तु आज इस मुद्दे का राजनीतिकरण हुआ है सो इस मुद्दे ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है ! एक राष्ट्रीय खिलाडी ने आरोप लगाया कि दूसरे धर्म के एक युवक ने अपना नाम बदल कर उसे अपने प्रेम- जाल में फंसाया , तत्पश्चात उसे अपना धर्म परिवर्तन के लिए विवश किया ! इस घटना के प्रमुख समाचार पत्रो में छपने के बाद ऐसी ही अन्य तमाम घटनाएँ सुर्ख़ियों में छायी रहीं ! एक विशेष राजनीतिक दल एवं कुछ हिन्दू संघटनों ने तो मुग़ल बादशाह अकबर से ही इस कु-प्रथा कि शुरुवात का आरोप लगाया तो कुछ ने अलाउद्दीन ख़िलजी से ! पाकिस्तान एवं कुछ अन्य देशों में हाल में ही ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिनसे इस बात की पुष्टि होती है कि हिन्दू संघटनो का विरोध अकारण ही नही है !
प्रेम को भी धर्म के प्रचार -प्रसार का साधन बनाना अत्यंत निंदनीय है ! इसका कड़े स्वर में विरोध करना आवश्यक है ! ऐसा करते वक़्त किसी को राजनीती से नही करनी चाहिए ! किन्तु ये इतना सामान्य नही है ! ये एक व्यापक मुद्दा है सिर्फ धार्मिक नजरिये से देखना गलत होगा ! हमे इन प्रेम -सम्बन्धो पर एक गहन एवं व्यापक दृष्टि से विचार करना होगा ! क्या एक ही धर्म के लोगों के बीच हो रहे प्रेम-समबन्धों में विश्वासघात नही होता है !
क्या समान धर्म के व्यक्ति आपस में प्रेम करके दूसरे के जीवन को बर्बाद नही कर देते हैं ? इस प्रश्नो की रोशनी में भी इस मुद्दे को लाना होगा ! तभी हम दूसरे लोगों को इस झूठे प्रेम-पाश से बचा सकते हैं ! महज दस या बीस घटनाओ के आधार पर हम इसे धार्मिक दृष्टि से जोड़कर नही बच सकते हैं ,, बल्कि हमे हजारों -लाखों व्यक्तियों को भी ध्यान में रखना होगा जिनकी जिंदगी झूठे प्रेम -संबधों ने खराब कर दी ! इसके लिए हमे एक पहल की
आवश्यकता है ! वर्तमान युग तकनीक का है जहाँ पर लोग आसानी से दूसरे व्यक्ति के प्रेम- पाश में फंस सकते हैं ! हमें ये भी ध्यान में रखना होगा कि कहीं लव- जिहाद का मुद्दा उन लोगो को समाज में विद्वेष फ़ैलाने का मौका न दे जो धार्मिक रूप से उन्मादी है और इसका एकमात्र उपाय है कि हमे लव-जिहाद को रोकना होगा ,, इसके लिए कड़े कानून बनाने होंगे ! और जो लोग इसके विरोध के लिए आंदोलन चला रहे हैं उन्हें जरुरी सहयोग दिया जाए !
अभिभावकों को विशेष रूप से माँ को अपने बच्चे के हर क्रियाकलाप पर पैनी निगाह डालनी होगी ! तकनीक के प्रयोग से हम किसी को रोक नही सकते हैं , किन्तु हम उन्हें देख सकते हैं उन्हें शांति से समझा सकते हैं ! किशोर -वय छात्राओं एवं लड़कियों को विशेष रूप से सचेत करने कि आवश्यकता है ! किसी भी ऐसे युवक से प्रभावित न हों जो आकर्षक दीखता हो ,, जिससे कोई परिचय न हो ! उन्हें इसके दुष्परिणाम के विषय में अवगत कराया जाए !
ऐसी संस्थाओ को चिह्नित किया जाए जो अपने निहित स्वार्थों के वशीभूत हो ऐसे युवको को लव-जिहाद के लिए प्रेरित करते हों !
सरकार के स्तर पर कड़े कानूनो का प्रावधान हो , और कोई उसका दुरुपयोग न कर सके इसका भी ध्यान रखा जाए !
आईये हम भी पहल करते हैं ! एक संस्था से जुड़ते हैं जो इस क्षेत्र में कार्यरत हो ! जो ये सुनिश्चित करे कि कोई भी इसके दुष्चक्र में न पड़े और जो फंस गए हैं इस दलदल में उन्हें निकाला जाए !
सबसे प्रमुख बात लव-जिहाद को धार्मिक दृष्टि से देखना सही नही है ! इसे इस्लाम के प्रचार का महज तरीका मानना अपनी आँखों में धूल झोंकने के समान है ! लव-जिहाद शब्द तो ठीक है मतलब प्रेम को गलत तरीके से प्रयुक्त करना ! किन्तु वास्तविकता तो ये है कि इसका प्रयोग सिर्फ इस्लाम धर्म के युवक ही कर रहे हैं ! हर धर्म के नवयुवक इसमें लिप्त हैं ! वो स्वार्थ के वशीभूत हो प्रेम के जाल में फंसा कर दूसरों का जीवन बर्बाद कर देते हैं ! और अब तो बदली सामजिक परिस्थितियों में लडकिया भी पीछे नही हैं ! अतः कही लव -जिहाद के चक्कर में धार्मिक वैमनस्य न बढे इसका भी ध्यान रखा जाये ! जय हिन्द जय भारत !

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