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धारा १२४अ के अनुसार ‘देशद्रोह क़ानून’ क्या है?

Shishir Ghatpande Blogs

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धारा १२४अ के अनुसार:

बोले गए या लिखे गए शब्दों-संकेतों या दृश्य प्रस्तुति द्वारा, जो कोई भी भारत में विधि द्वारा स्थापित ‘सरकार के प्रति’ घृणा या अवमान पैदा करेगा या पैदा करने का प्रयत्न करेगा, असंतोष (Disaffection) उत्पन्न करेगा या करने का प्रयत्न करेगा, उसे आजीवन कारावास या कम से कम ३ वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है।

यहाँ ये स्पष्ट करना बेहद ज़रूरी है कि धारा १२४अ अंग्रेज़ों द्वारा लगाईं गई थी, जिसमें आज़ादी के बाद से तथा भारत के संविधान के निर्माण एवं लागू होने के बाद से किसी भी प्रकार का संशोधन अथवा बदलाव नहीं किया गया है एवं जो अपने उसी मूल प्रारूप एवं प्रावधानों सहित आज तक यथावत जारी है…

तो, ‘अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता’ के नाम पर:

देश अथवा चुनी गई सरकार की उन नीतियों का विरोध जिन्हें बनाने का अधिकार सरकार को भारत के संविधान ने प्रदत्त किया है, ‘राजद्रोह’ की श्रेणी में आ सकता है।

लेकिन यहां तो ‘अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता’ का हवाला देकर:

टुकड़े
मोमबत्ती
चिठ्ठी
बिन्दी
असहिष्णु
बुद्धिजीवी
दरबारी
चाटुकार
पत्तलकार
समाज की ठेकेदार
Award वापसी
Secular
Liberal
Bollywood Gangs:

ख़ालिद
शरजील
शेहला जैसे देशविरोधियों का खुलेआम समर्थन करती हैं।

न्यायपालिका को ये सुनिश्चित करना होगा कि सरकार एवं उसकी नीतियों के विरोध में कोई देशविरोध की हद तक न चला जाए और ना ही सरकार एवं उसकी नीतियों का विरोधी, देशविरोधी कहलाए…

इन दोनों ही बातों में पारस्परिक सम्बन्ध होते हुए भी बहुत बड़ा मूलभूत अन्तर है…

न्यायपालिका को ये भी सुनिश्चित करना होगा कि सरकार एवं सरकार की नीतियों के विरोध में देशविरोध की हद तक चले जाने वाले को उसकी आयु, शिक्षा, पृष्ठभूमि के आधार पर किसी भी प्रकार की छूट न दी जाते हुए, ‘देशद्रोह क़ानून’ के अन्तर्गत प्रावधानिक धाराओं एवं अपराध के आधार पर दण्ड दिया जाए…

यहाँ हमें ये भी नहीं भूलना चाहिये कि आतंकी बुरहान वानी २२ वर्ष का था तो क़साब महज़ २० वर्ष का… लेकिन उनका अपराध उनकी आयु से कहीं अधिक बड़ा-भारी एवं अक्षम्य था..

शिशिर भालचन्द्र घाटपाण्डे

०९९२०४ ००११४

 

​डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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