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“कोरोना से अब डरना नहीं, भिड़ना ही होगा”

Shishir Ghatpande Blogs

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विगत पौने ७ महीनों से ऐसा लग रहा है मानों देश ही नहीं, ज़िन्दगी ही थम गई हो. सबकुछ एक ही जगह रुक गया हो, ठहर गया हो.

व्यापार बंद, रोज़गार बंद!
व्यवहार बंद, संस्कार बंद!!
शिष्टाचार बंद, त्यौहार बंद!!
निर्माण बंद, खेत-खलिहान बंद!
बाज़ार बंद, आवागमन बंद!!
परिवहन बंद, पर्यटन बंद!!
समस्त शैक्षणिक संस्थान बंद!अधिकाँश निजी संस्थान बंद!!

आख़िरकार कब तक? Vaccine आने तक? तो फिर Vaccine कब तक?
१ साल, २ साल, ३ साल या वो समय-सीमा भी तय नहीं, सबकुछ अनिश्चित?

गर्व की बात है कि समूचे विश्व में Vaccine की सफ़लता के मामले में भारत Number 1 पर है, पहले जहाँ देश भर में मात्र ४ या ५ प्रयोगशालाओं में Vaccine पर काम किया जाता था तो अब कोरोना महामारी के चलते देश भर में १०० से भी ज़्यादा प्रयोगशालाएँ इस पर कार्यरत हैं. लेकिन ये भी एक सच है कि भारत अथवा विश्व में कोरोना Vaccine की सफ़लता की Guarantee और समय-सीमा अब तक कोई भी सुनिश्चित नहीं कर पाया है. अब लोग परेशानी की अवस्था से बहुत आगे निकलकर घोर हताशा, निराशा और छटपटाहट की अवस्था में पहुँच रहे हैं. विद्यार्थी, बेरोज़गार, श्रमिक और हम्माल, कृषक, छोटे-मँझोले व्यापारी और दुकानदार, होटल-Restaurant वाले, दैनिक कामगार जैसे ऑटो-रिक्शा-Taxi-ठेले-रेहड़ी-फेरी-टपरी-Laundry वाले तथा अन्य पेशों मसलन वक़ालत, Advisory, Consultancy, Sales, Marketing, Logistics, Travel & Transportationइत्यादि से जुड़े लोग भी बुरी तरह त्रस्त हो चुके हैं.

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, ब्रिटेन, कैनेडा, फ्राँस, जर्मनी, इटली, न्यूज़ीलैण्ड, स्पेन समेत कई देशों में लोग, मात्र कुछ दिनों के Lockdown/बंदी से त्रस्त होकर उसके विरोध में लाखों की तादात में सड़कों पर उतर आए थे, मजबूरन वहाँ की सरकारों को Lockdown/बंदी में छूट देनी पड़ी थी..

मैं ये नहीं कहता कि हमारे देश की सरकार भी ऐसा करे क्योंकि भारत विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ-साथ अभी भी विकासशील देशों की श्रेणी में आता है, विकसित देशों की श्रेणी में नहीं. बावजूद इसके, कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है और WHO से लेकर विश्व के तमाम छोटे-बड़े देशों ने न केवल भारत का लोहा माना है, बल्कि भारत का अनुसरण भी किया है. भारत में कोरोना से Recovery Rate लगभग ७८ प्रतीशत है जो विश्व में सर्वाधिक या सबसे अच्छा है और मृत्यु दर लगभग पौने २ प्रतीशत है जो विश्व में सबसे कम है. इसका श्रेय किसी एक सरकार, संस्थान या व्यक्ति को न जाकर केन्द्र एवं तमाम राज्य सरकारों, राज्यों-ज़िलों-ग्रामों के स्थानीय प्रशासनों तथा पुलिस इत्यादि, देश भर की तमाम समाजसेवी संस्थाओं, देश की सहिष्णु-संयमित जनता और अपनी जानें जोखिम में डालकर, अपने घर-परिवार-निजी जीवन को दूर रखकर, दिन-रात मरीज़ों की नि:स्वार्थ सेवा-सुश्रुषा में जी-जान से जुटे देशभर के तमाम स्वास्थ्यकर्मियों को जाता है.

लेकिन ये भी यथार्थ है कि अब कोरोना से डरकर जीना बेहद कठिन और दुश्वार हो चला है. लोगों के सब्र का बाँध अब टूटने की कग़ार पर है, और इसका सबसे बड़ा कारण है इस महामारी की समाप्ति की अनिश्चितता. इसीलिये अब लोगों में जोखिम लेने या यूँ कहें कि कोरोना से डरने की बजाए “भिड़ने” की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. इसीलिये सरकार (सरकारों) को भी अब जनमानस के मनोभावों, मनःस्थिति को समझते हुए, यथाशीघ्र कुछ ठोस कदम उठाने होंगे, कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे जिनके तहत बेहद अतिरिक्त-विशेष सावधानियों और कड़ी शर्तों के साथ कुछ सामान्य रियायतें प्रदान करनी होंगीं, ताकि वातावरण को कुछ शान्त, कुछ हल्का किया जा सके, साथ ही भविष्य के किसी सम्भावित जनाआक्रोश को टाला जा सके…
देश की जनता को भी कंधे से कंधा मिलाकर सरकार (सरकारों), प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य संस्थाओं समेत अन्य तमाम संस्थाओं का साथ देना होगा जो कोरोना महामारी या विश्व की अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी से लड़ाई लड़ने में जी-जान एक कर रहे हैं. इसीलिये समस्त नियमों-शर्तों का कड़ाई से न केवल अनुपालन करना होगा बल्कि उन्हें अपनी आदतों और दिनचर्या में सम्मिलित करना होगा. और सबसे महत्वपूर्ण बात, अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता-आत्मशक्ति-Immunity को बेहद मज़बूत बनाना होगा…

तो अब हम सबको मिलकर

“कोरोना से डरना नहीं, भिड़ना ही होगा”

शिशिर भालचन्द्र घाटपाण्डे,
मुम्बई,
०९९२०४ ००११४, ०९९८७७ ७००८०

 

डिस्कलेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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