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आम Budget में आम आदमी के लिये क्या हो?

Shishir Ghatpande Blogs

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‘Budget पर्व’: आख़िर आम Budget में, आम आदमी के लिये क्या हो?

१. शराब उत्पादों के दामों में ३० से ४० प्रतिशत की वृद्धि की जाए
२. तम्बाकू उत्पादों एवं तम्बाकू से निर्मित पदार्थों के दामों में ३० से ४० प्रतिशत की वृद्धि की जाए
३. आलीशान कारों के दामों में ३० से ४० प्रतिशत की वृद्धि की जाए
४. Electronic उपकरणों जैसे Smart Phones, Tablets, Gadgets के दामों में ३० से ४० प्रतिशत की वृद्धि की जाए
५. Perfumes, Deo, Shaving Foams, विदेशी साबुनों के दामों में ३० से ४० प्रतिशत की वृद्धि की जाए
६. तमाम Luxury, आलीशान, विलासितापूर्ण वस्तुओं के दामों में ३० से ४० प्रतिशत की वृद्धि की जाए
७. निम्न एवं मध्यम वर्ग के दैनिक उपयोग एवं उपभोग की तमाम वस्तुओं, राशन इत्यादि के दामों में १५ से २०
प्रतिशत की कमी की जाए
८. आयकर छूट सीमा बढ़ाकर १० लाख की जाए
९. Savings, Fixed Deposits समेत तमाम बचत खातों एवं योजनाओं में ब्याज दर २ से ३ प्रतिशत बढ़ाई जाए
१०. गृह ऋण ब्याज दरों में २ से ३ प्रतिशत की कटौती की जाए
११. भयावह मन्दी से त्रस्त देश के अन्नदाता कृषकों, देश के निर्माता श्रमिकों समेत लघु एवं मध्यम उद्यमियों, सरकारी
एवं निजी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों हेतु लाभकारी योजनाओं का यथाशीघ्र शुभारम्भ किया जाए
१२. सालाना ५० लाख से अधिक आय पर अधिकतम कर सीमा ३० प्रतिशत से बढ़ाकर ५० प्रतिशत की जाए
१३. तमाम कृषि उपकरणों, बीज, खाद, कीटनाशकों के दाम ५० प्रतिशत घटाए जाएं

बीते कुछ सालों में:

धनी वर्ग धनाढ्य,
मध्यम वर्ग दरिद्र,
दरिद्र वर्ग भिखारी
होता चला गया
और
भिखारी की हालत तो कीड़े मकोड़ों से भी बदतर होती चली गई। धनी और दरिद्र की बात तो छोड़िये, धनी और मध्यमवर्ग के बीच की खाई भी अब इतनी गहरी हो चुकी है, कि अब उसका भर पाना नामुमकिन से कम नहीं।

फिर भी व्याकुल, बेचैन निगाहें माननीया वित्त मंत्री महोदया की ओर आस लगाए बैठी हैं कि शायद अब तो उनका ध्यान: देश के लगभग ३० करोड़ दिहाड़ियों (श्रमिक, हम्माल, कुली, रेहड़ी वाले, फेरी वाले, खोमचे वाले, ठेले वाले, मोची, धोबी, रिक्शा वाले, टैक्सी वाले इत्यादि) की ओर,  विगत कुछ वर्षों में नौकरियां गँवाकर बेरोज़गारी का दंश झेल रहे लगभग १५ करोड़ ‘बेरोज़गारों’ की ओर,  बर्बाद हो चुके छोटे और मंझौले व्यापारियों की ओर, और दिनोंदिन धनाढ्यता के कीर्तिमान स्थापित करने वाले धनवानों की ओर अवश्य ही आकर्षित होगा…

 

शिशिर भालचन्द्र घाटपाण्डे
मुम्बई
०९९२०४००११४/०९९८७७७००

 

डिस्‍क्‍लेमर: उपरोक्‍त विचारों के लिए लेखक स्‍वयं उत्‍तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे, तथ्‍य या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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