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“बेजोड़ कपिल”

Shishir Ghatpande Blogs

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किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि २ अप्रैल १९८१ को पंजाब के अमृतसर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे कपिल शर्मा भारतीय हास्य जगत में धूमकेतू की तरह छा जाएंगे… कपिल के पिता पुलिस हेडकॉन्स्टेबल थे और माताजी गृहिणी हैं..

कपिल ने अपने जीवन के शुरूआती दिन बेहद कठिनाईयों में गुज़ारे, यहां तक कि गुज़ारे के लिये उन्होंने एसटीडी-पीसीओ पर भी काम किया. जब कपिल २२ साल के थे तभी उनके पिता की कैन्सर से मृत्यु हो गई थी. परिवार पर आए संकट की इस घड़ी में कपिल अपने परिवार का सहारा बने.

बहुमुखी प्रतिभा के धनी कपिल ने स्टेज आर्टिस्ट, सिंगर, मिमिक्री आर्टिस्ट, कॉमेडियन सहित अनेक छोटे-बड़े काम किये और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया लेकिन जीवन का पहला बड़ा ब्रेक उन्हें “द ग्रेट इण्डियन लॉफ्टर चैलेन्ज” से मिला. पहली बार में कपिल ऑडीशन में रिजेक्ट हुए लेकिन हार मानना तो उन्होंने सीखा ही नहीं था. उन्होंने दोबारा कोशिश की और ना केवल सिलेक्ट हुए बल्कि उस दौर के नामचीन स्टैण्ड अप कॉमेडियन्स को पीछे छोड़कर ट्रॉफ़ी भी अपने नाम कर ली..

कपिल एक लम्बे अर्से तक “कॉमेडी सर्कस” का हिस्सा रहे और लगातार विजेता की ट्रॉफियाँ अपने नाम करते रहे लेकिन हमेशा कुछ अलग, कुछ नया करने की ललक और नई चुनौतियों से खेलने की प्रबल इच्छाशक्ति ने उन्हें ख़ुद के बैनर तले, भारतीय टेलीविज़न इतिहास के सबसे बेहतरीन, क़ामयाब और चर्चित शो “कॉमेडी नाइट्स विद कपिल” का निर्माण करने की प्रेरणा दी.. ये शो इतना अधिक सफ़ल-चर्चित और प्रसिद्द हुआ कि बड़े से बड़े और नामी-गिरामी कलाकार, फ़िल्म निर्माता-निर्देशक जहां अपनी फ़िल्मों के प्रमोशन सबसे पहले और सबसे ज़्यादा इस शो पर करने के लिये आते तो खेल एवं अन्य क्षेत्रों की नामचीन और प्रसिद्द हस्तियां भी इस शो में आने को सदैव तत्पर रहतीं. इस दौरान कपिल ने ना केवल अपने बेहतरीन शो के मुख्य और स्तम्भ क़िरदार बल्कि अनेक रियेलिटी शोज़ के होस्ट के रूप में भी भरपूर वाहवाही लूटते हुए सफ़लता के परचम लहराए.

बेहद संघर्षमयी परिस्थितियों को झेलते भी ये मक़ाम कपिल ने सिर्फ़ और सिर्फ़ अपनी प्रबल इच्छाशक्ति, जीतोड़-कड़ी मेहनत के बल पर हासिल किया.

कहते हैं कि सफ़लता हासिल करने के बाद उसे स्थायी रूप से बनाए रखने के लिये पहले से कहीं ज़्यादा और जीतोड़ मेहनत करनी पड़ती है और वो भी ईर्ष्यालुओं की कड़ी ईर्ष्या के बीच. इन ईर्ष्यालुओं में कभी कुछ अपने बेहद क़रीबी भी होते हैं. सफ़लता के साथ उतार-चढ़ाव का दौर भी चलता है और दुनियां का कोई भी सफ़ल इन्सान उस दौर से अछूता नहीं रहा है. साथ ही ये भी सच है कि ग़लतियाँ इन्सान से ही होती हैं, यदि ना होतीं तो वो भगवान् की श्रेणी में रखा जाता. लेकिन कुछ लोग अपनी गिद्ध दृष्टि केवल दूसरों की ग़लतियाँ या कमियाँ निकालने पर ही गढ़ाए होते हैं. ऐसे लोग किसी भी तरह उन सफ़ल लोगों को नीचा दिखाने-गिराने की ताक में ही लगे होते हैं.

कपिल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उनकी मामूली और नज़रअन्दाज़ की जा सकने
वालीं ग़लतियों को भी बहुत बढ़ा-चढ़ा कर और बेहद ग़लत तरीक़े से प्रस्तुत किया गया. स्क्रीन पर हँसता-खिलखिलाता चेहरा लेकर लोगों को हँसाने वाले कपिल के चेहरे के पीछे के दुःख, दर्द, तक़लीफ़ों को किसी ने नहीं देखा और कपिल को बदनाम करने, नीचा दिखाने, मानसिक रूप से तोड़ने और प्रताड़ित करने की घिनौनी कोशिशों और साज़िशों में जी-जान से जुट गए.

उनकी घिनौनी कोशिशें और साज़िशें कुछ समय के लिये क़ामयाब हो भी गईं. एक कलाकार का मन बेहद भावुक होता है. कपिल भी अन्दर से बेहद भावुक हैं. इसीलिये वो कुछ समय के लिये अन्दर से टूट गए. यहां तक कि अपना अच्छा-ख़ासा चलता शो भी छोड़ दिया और दुनियां से कटकर अपनी अकेली दुनियां में एकान्त जीवन जीने लगे..

लेकिन अपने घोर संघर्षों के बल पर ख़ुद अपने सफ़लता की गाथा रचने वाले कपिल अपनी ढृढ़ इच्छाशक्ति-निश्चय, आत्मबल के सहारे फ़िर अपने चहेतों की दुनियां लौट आए..

अब भी कोशिशें-साज़िशें जारी हैं उन्हें गिराने-हराने-नाक़ाम करने, तोड़ने-प्रताड़ित करने की. लेकिन अबकी बार उन सबको मुँह की खानी पड़ेगी. उनकी कोई कोशिश, कोई साज़िश, कोई हथकण्डे अब नहीं चलेंगे… अब चलेगा तो केवल “कपिल का जादू”…

भारत के अब तक के सबसे बेहतरीन हँसते-हँसाते कलाकार को जन्मदिवस (०२ अप्रैल) एवं उज्जवल भविष्य हेतु हृदय के अन्तःकरण से अनन्त शुभकामनाएँ …..

शिशिर भालचन्द्र घाटपाण्डे
मुम्बई
०९९२०४ ००११४, ०९९८७७ ७००८०

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