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#एससीएसटीऐक्टकाअत्याचार

Shishir Ghatpande Blogs

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#एससीएसटीऐक्टकाअत्याचार

साथियों आज हम किसी भी पार्टी, दल, राजनेता या व्यक्ति विशेष के समर्थन या भक्ति से ऊपर उठकर, ‘देशहित’ की बात करेंगे।

सारी पार्टियाँ हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, पारसी, बौद्ध, बहाई, दलित, महादलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, जाति, धर्म, भाषा, प्रान्त में लगी हैं… किसी एक वोटबैंक को आकर्षित करने के लिये दूसरे पक्ष को प्रताड़ित करने से भी नहीं चूका जा रहा है.. समझ से परे है कि आख़िरकार इस ऐक्ट को लाने की क्या ज़रूरत थी.. क्या न्याय व्यवस्था/प्रणाली भी जाति-धर्म के आधार पर चलेगी ? क्या सरकार को भी न्यायव्यवस्था/प्रणाली पर विश्वास नहीं था ?

सबसे पहले तो आरक्षित वर्ग से सम्बद्ध हमारे दलित भाई-बहन-युवा-बच्चे ये समझने का प्रयास करें कि ये तथाकथित #एससीएसटीऐक्ट जिसे #एट्रोसिटीऐक्ट या #हरिजनऐक्ट भी कहा जाता है, आपको अन्य वर्गों से, समाज से, देश से अलग करने, तोड़ने, बांटने, काटने का षड़यन्त्र और गहरी साज़िश है। देश के नेताओं और हमारे ‘तथाकथित’ जनप्रतिनिधियों द्वारा केवल और केवल वोटबैंक की राजनीति के लिये इस क़ानून को लागू कर जानबूझकर हमारे बीच के आपसी प्रेम, सद्भाव, भाईचारे और सौहार्द्र को ख़त्म करने का घिनौना षड़यन्त्र रचा जा रहा है।

यदि सभी पार्टियों को केवल अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े वर्ग के ही वोट चाहियें और देश का सवर्ण समाज भी एकजुट होकर ये तय कर ले कि केवल और केवल सवर्ण प्रत्याशी को ही अपना वोट देगा, भले ही वो किसी भी पार्टी से हो या निर्दलीय ही क्यों न हो और सुरक्षित सीट पर मतदान में हिस्सा ही न ले या नोटा दबाए तो क्या होगा ?

इस बेतुके क़ानून ने समूचे हिन्दू समाज के दो वर्गों के बीच कभी बीच कभी न भरी जा सकने वाली गहरी खाई बना दी है.. अब इन दो वर्गों के बीच किसी भी प्रकार के व्यापारिक सम्बन्ध तो दूर, व्यक्तिगत सम्बन्ध तो दूर, औपचारिक-अनौपचारिक सम्बन्ध तो दूर, सामान्य बोलचाल भी सहज नहीं हो पाएगी..

एकदूसरे के सुख-दुःख में सहभागी होना, साथ मिलकर तीज-त्यौहार मनाना, एक-दूसरे से मेल-मिलाप, एक-दूसरे से विचारों का आदान-प्रदान तो अब कहानी-क़िस्से-इतिहास बन जाएँगे..

इसीलिये तमाम दलित भाई-बहनों-युवाओं-बच्चों से विनम्र निवेदन है कि वो भी इस आन्दोलन का हिस्सा बनकर इन षड़यन्त्रकारियों के घिनौने इरादों को नाकामयाब करने में सहभागी बनें, अपना साथ दें।

समाज के सभी वर्गों से विनम्र निवेदन है कि दलगत या व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर अपने और अपने प्रियजनों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिये ‘एकजुट’ होकर, ‘संगठित’ होकर, इस अन्यायपूर्ण-मनमाने, देश को तोड़ने-बांटने-काटने वाले इस षड़यन्त्रकारी क़ानून का पूरी शक्ति के साथ विरोध करें।
अपने तथाकथित जनप्रतिनिधियों पंचों, पार्षदों, विधायकों, सांसदों को मजबूर कर दें कि वो देश और समाज पर जबरन थोपे गए इस ‘देशविरोधी क़ानून’ को वापस लें।

याद रहे साथियों, “यदि अभी नहीं, तो कभी नहीं”

!!जयहिन्द!!
सदैव आपका शुभाकांक्षी,
शिशिर घाटपाण्डे,
मुम्बई,
०९९२०४ ००१२४, ०७०००८ ५०५०५

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