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लाॅकडाउन में प्रकृति

geetasingh

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जैसे ही मैं  छत पर गई तो अचानक से मेरी आंखों में कुछ धुआँ लगने लगा और मैं अपनी आंखें ठीक से खोल भी नहीं पा रही थी। मुझे लगा कि छत पर ताज़ा हवा होगी परंतु मुझे तो सांस लेने में भी फ्रैश  फील नहीं हो पा रहा था। लगा कि इस तरह कैसे जिया जाएगा। मेरे घर के आस-पास मॉल, बिल्डिंग मेटीरियल की दुकानें हैं जिससे यहां का वातावरण प्रदूषित हो रहा था, यह था लाॅकडाउन से पहले।
तभी अचानक सुना की कोरोना वायरस इंडिया में आ गया है जिस के चलते हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने 21 दिन का लॉकडाउन कर दिया। कुछ दिन बीते थे कि मैं फिर से छत पर टहलने के लिए गई और मैंने वहां जो महसूस किया वह आश्चर्यचकित कर देने वाला था! मेरे घर के आगे जो अशोक का पेड़ है, वह पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत लग रहा था, उसके हरे हरे कोमल पत्ते लुभावने लग रहे थे। ठंडी हवाएं चल रही थी अशोक का पेड़ ऐसे लहरा था मानो कह रहा हो कि अब मुझे या मेरे पत्तों को कोई हानि नहीं पहुंचा सकता क्योंकि वाहन रुक गए हैं जो मुझे धुए से परेशान करते थे, सारे इंसान अपने-अपने घरों में है मुझे कोई नहीं काटेगा, प्रदूषण खत्म हो गया है और मैं अब आजाद हूं, और इधर-उधर कैसे भी लहरा सकता हूं। मॉल बंद है, बाजार बंद है मेरे हरे पत्तों को कोई हानि नहीं पहुंचा सकता।
यह सब सोच ही रही थी कि दो प्यारी छोटी सुंदर चिड़िया उस पेड़ पर आकर बैठ गई और फिर मेरे घर की बालकनी में खिड़की पर वह चहचहा रही थीं। ऐसा लग रहा था मानो सारी प्रकृति खुशी से झूम उठी हो और उसमें वह चिड़िया नाच गा रही हों काली नीली तथा छोटी लाल पूछ वाली चिड़िया, सिर पर कलंगी वाली, छोटी सी कई रंगों वाली चिड़ियों को मैं एकटक देखे ही जा रही थी। दोपहर के समय में भी इतनी खूबसूरती! गर्मियों के दिनों में भी पक्षी अब हमारे शहर में खिड़की पर! यह सब आश्चर्यचकित कर देने वाला था।
इस लाॅकडाउन में प्रकृति ने अपने आप को संतुलित कर लिया है। गंगा, यमुना और अन्य नदियां बेहद निर्मल जल देने वाली हो गई हैं। और हरियाली छा गई है। जंगली जानवर मदमस्त होकर भ्रमण कर रहे हैं कि मानो उन्हें अब शिकारियों से डर नहीं लगता। समुद्र में मछलियां तथा अन्य जीव-जंतु खुला विचरण कर रहे हैं क्योंकि अब वे इंसान द्वारा हुए पकड़े नहीं जाएंगे। पृथ्वी की चाल धीमी पड़ गई है, सब कुछ अद्भुत अकल्पनीय तथा अविश्वसनीय है। मैं सोचती हूं कि लॉक डाउन ख़त्म होने पर फिर वैसी ही स्थिति हो जाएगी, प्रदूषित! क्या हम सब मिलकर अपनी हरियाली पृथ्वी को सांस लेने के लिए समय-समय पर लॉक डाउन नहीं कर सकते? यदि हां तो यह संपूर्ण मानव जाति के लिए कल्याणकारी होगा।।
-गीता सिंह
26/06/2020

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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