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क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं?

जागरण जंक्शन फोरम

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भारतीय राजनीतिक इतिहास में कांग्रेस की लोकसभा में यह सबसे बड़ी हार है। 12 राज्यों में उसका खाता तक नहीं खुला। उसके 16 में से 13 कैबिनेट मंत्री चुनाव हार गए। किसी भी राज्य में पार्टी दहाई का आंकड़ा नहीं छू पाई। इस बार का 19.3 फीसदी उसे अब तक मिला सबसे कम मत प्रतिशत है। 1999 में 114 सीटों के साथ अपना तब तक का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली पार्टी इस बार 44 सीटों पर सिमट गई।


चुनाव परिणाम आने के इतने दिनों बाद भी आज भी हर जगह यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इतिहास में इतनी बड़ी हार कांग्रेस को नसीब कैसी हुई? आजादी के बाद जिस पार्टी के सर्वेसर्वा में कभी जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे कद्दावर नेता रहे हैं वह आज ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है कि मजबूत विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा सकती।


16वीं लोकसभा का चुनाव परिणाम जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के लिए खुशियों की सौगात लेकर आई तो वहीं कांग्रेस के लिए भारी दर्द दे गई। आज कांग्रेस पार्टी की हार के लिए भले ही पिछली यूपीए की सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा हो लेकिन जिस तरह का नेतृत्व पिछले कुछ सालों से पार्टी का रहा है या है उससे तो यह साफ है कि कांग्रेस का बचा हुआ कुनबा भी अब ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकता। जानकार मानते हैं कि जिस तरह से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में लगातार परिवारवाद को बढ़ावा दिया जा रहा था उससे आने वाले वक्त में कांग्रेस को और ज्यादा नुकसान होने वाला है। आज कांग्रेस के पास ऐसा कोई नेता नहीं है जो अगले 15 साल तक अपने विरोधियों को टक्कर दे सके।


वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीति विशेषज्ञ इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। इतिहास खुद को दोहराता है। उनका मानना है कि बुरा दौर हर किसी के साथ आता है। आज भले ही कांग्रेस जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी हो लेकिन जल्द ही वह दिन आएगा जब जनता सत्तारूढ पार्टी के कुशासन से तंग आकर कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर विकल्प के रूप में चुनेगी।


उपरोक्त मुद्दे के दोनों पक्षों पर गौर करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. भारतीय राजनीतिक इतिहास की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का दौर अब समाप्त हो गया है?

2. क्या आज कांग्रेस में ऐसा कोई नेता नहीं है जो पार्टी की स्थिति को सुधार सके?

3. क्या कांग्रेस की हार की वजह परिवारवाद है?

4. मनमोहन को यूपीए सरकार का जिम्मा सौंपना क्या पार्टी की सबसे बड़ी भूल है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं? ” है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व “क्या अब कांग्रेस के दिन लद गए हैं?” – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा केलिए Junction Forum नामक कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


3. अगर आपने संबंधित विषय पर अपना कोई आलेख मंच पर प्रकाशित किया है तो उसका लिंक कमेंट के जरिए यहां इसी ब्लॉग के नीचे अवश्य प्रकाशित करें, ताकि अन्य पाठक भी आपके विचारों से रूबरू हो सकें।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


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