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बलात्कार ‘इंडिया’ में ज्यादा और ‘भारत’ में कम – क्या सोचते हैं आप ?

जागरण जंक्शन फोरम

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रेप की घटनाएं भारत में कम इंडिया में ज्यादा होती हैं, क्योंकि वहां विदेशी सभ्यता का असर ज्यादा दिखाई देता है, आप देश के गांवों और जंगलों में देखें जहां कोई सामूहिक बलात्कार या यौन अपराध की घटनाएं नहीं होतीं. यह शहरी इलाकों में होते हैं. महिलाओं के प्रति व्यवहार भारतीय परंपरागत मूल्यों के आधार पर होना चाहिए. – आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत


हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में हुई बेहद खौफनाक और घिनौनी गैंग रेप की घटना के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान एक विवादस्पद मसला बन गया है. अपने सिलचर दौरे के दौरान भारत के ग्रामीण और शहरी इलाकों को भारत और इंडिया के रूप में संबोधित करते हुए मोहन भागवत का कहना था कि रेप और बलात्कार की घटनाएं ‘भारत’ में कम ‘इंडिया’ में ज्यादा होती हैं. एक ओर जहां अपना पक्ष रखते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जैसे-जैसे हम अपनी परंपराओं और मूल्यों से दूर होते जाएंगे वैसे-वैसे आपराधिक वारदातों में संलिप्त होते जाएंगे.


वहीं दूसरी ओर उनके इस बयान की भरपूर आलोचना करने वाले लोगों का कहना है कि सर्वप्रथम तो भारत और इंडिया में कोई अंतर नहीं है. इसीलिए सबसे पहले तो मोहन भागवत को देश को दो भागों में बांटने के लिए माफी मांगनी चाहिए. ऐसे लोगों का कहना है कि आमतौर पर ऐसा नहीं होता कि बलात्कार की घटनाएं शहरी क्षेत्रों में ज्यादा हों, जबकि देखा यह जाता है कि ग्रामीण और छोटे कस्बों में दबंग ऐसी घटनाएं कर पीड़िता को थाने तक पहुंचने ही नहीं देते. उसे डरा-धमका कर किसी भी प्रकार की शिकायत करने से रोक लिया जाता है. पुलिस और प्रशासन की उन दबंगों के साथ सांठ-गांठ होने के कारण पीड़िता को यह ज्ञात होता है कि उसके आरोपों को अहमियत नहीं मिलेगी इसीलिए वह खुद ही अपनी शिकायत दर्ज करवाने नहीं जाती. क्रिमिनिल लॉ जर्नल में प्रकाशित आंकड़ों पर नजर डालें तो हाई कोर्ट में 80 फीसदी और सुप्रीम कोर्ट में 75 फीसदी रेप केस ग्रामीण इलाकों से दर्ज थे. वहीं गैंग रेप के जो मामले हाईकोर्ट (75%) और सुप्रीम कोर्ट (68%) में दर्ज हैं उनमें से अधिकांश मोहन भागवत के ‘भारत’ में से ही हैं. बस मीडिया और लाइमलाइट में ना आने के कारण यह मामले दबा दिए जाते हैं. शहरी क्षेत्रों में बलात्कार के जो आंकड़े सामने आए हैं उनका महिलाओं के पहनावे और संस्कृति से कुछ भी लेना देना नहीं है, क्योंकि यह तो संस्कारों के अभाव में उत्पन्न मानसिक विकृति और मनोविकार का परिणाम है. ऐसा एक बार नहीं कई बार देखा है गया जब ऐसे मानसिक रोगी छोटी-छोटी मासूम बच्चियों और असहाय युवतियों को अपना निशाना बनाते हैं.


उपरोक्त मसले और मोहन भागवत के बयानों के दोनों पक्षों पर विचार करने के बाद निम्नलिखित प्रश्न हमारे सामने प्रस्तुत हैं जिनका जवाब ढूंढ़ना नितांत आवश्यक है, जैसे:


1. मोहन भागवत का यह कहना कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में बलात्कार की घटनाएं ज्यादा होती हैं कहां तक सही है?

2. क्या वाकई शहरी क्षेत्रों में संस्कार और परंपरा तथा उनका मूल्य समाप्ति की ओर अग्रसर है?

3. भारत और इंडिया को दो भागों में विभाजित कर मोहन भागवत क्या कहना चाहते हैं?

4. क्या केवल महिलाओं के पहनावे और पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण बलात्कार और गैंग रेप जैसी घटनाओं में वृद्धि हो रही है?


जागरण जंक्शन इस बार के फोरम में अपने पाठकों से इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे पर विचार रखे जाने की अपेक्षा करता है। इस बार का मुद्दा है:


बलात्‍कार इंडियामें ज्‍यादा और भारतमें कम – क्या सोचते हैं आप ?


आप उपरोक्त मुद्दे पर अपने विचार स्वतंत्र ब्लॉग या टिप्पणी लिख कर जाहिर कर सकते हैं।


नोट: 1. यदि आप उपरोक्त मुद्दे पर अपना ब्लॉग लिख रहे हैं तो कृपया शीर्षक में अंग्रेजी में “Jagran Junction Forum” अवश्य लिखें। उदाहरण के तौर पर यदि आपका शीर्षक “मोहन भागवत का बयान”  है तो इसे प्रकाशित करने के पूर्व  मोहन भागवत का बयान – Jagran Junction Forum लिख कर जारी कर सकते हैं।


2. पाठकों की सुविधा के लिए Junction Forum नामक नयी कैटगरी भी सृजित की गई है। आप प्रकाशित करने के पूर्व इस कैटगरी का भी चयन कर सकते हैं।


धन्यवाद

जागरण जंक्शन परिवार


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