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पर्दे पर महिलाओं को मजबूती देने वाली शबाना आजमी के नाम दर्ज है नेशनल अवॉर्ड का रिकॉर्ड

Rizwan Noor Khan

18 Sep, 2020

हिंदी सिनेमा में नायक के आगे नायिकाओं को कम ही तवज्जो मिलती रही है। बावजूद कई फिल्मों में दिग्गज अभिने​त्रियों ने अपने बलबूते पर फिल्मों को बॉक्स आफिस पर अच्छा कलेक्शन दिलाया और क्रिटिक्स की अच्छी समीक्षाएं हासिल कीं। ऐसी अभिनेत्रियों में शबाना आजमी का नाम प्रमुख तौर पर लिया जाता है। शबाना आजमी के जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें।

Image courtesy : REUTERS

कला के क्षेत्र में रुझान के चलते बॉलीवुड पहुंची
हैदराबाद में 18 सितंबर 1950 को जन्मीं शबाना आजमी को शुरुआती दिनों से ही कला के क्षेत्र में गहरी रुचि रही। इसी वजह से वह अभिनय के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए हिंदी सिनेमा में आ गईंं। उन्हें सीरियस कंटेंट वाली फिल्मों और अर्थपूर्ण फिल्मों में अभिनय के लिए दुनियाभर में ख्याति हासिल हुई।

ग्लैमरस अभिनेत्रियों की भीड़ से अलग पहचान बनाई
शबाना ने ग्लैमरस अभिनेत्रियों की भीड़ में स्वयं को अलग साबित किया। स्मिता पाटिल और शबाना आजमी उस दौर की समानांतर फिल्मों की जरूरत बन गईं थीं। अर्थ, निशांत, अंकुर, स्पर्श, मंडी, मासूम, पेस्टॅन जी में शबाना आजमी ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।

एक के बाद एक हिट देने के लिए चर्चित रहीं
शबाना आजमी ने गंभीर फिल्मों के अलावा मुख्य धारा की कमर्शियल फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखी। अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, मैं आजाद हूं जैसी व्यावसायिक फिल्मों में अपने अभिनय के रंग भरकर शबाना आजमी ने दर्शकों के बीच अपनी पहुंच बना ली। उनकी एक के बाद एक फिल्मों ने सफलता के झंडे गाड़े। उनके अभिनय को क्रिटिक्स से भी अच्छे रिव्यू हासिल हुए।

महिला किरदारों की मजबूती की समर्थक
वह आज भी महिला किरदारों को मजबूती देने के पक्षधर हैं। उनका मानना है कि 60 के दशक में ‘मैं चुप रहूंगी’ जैसी फिल्में बनती थीं, जिनमें फिल्म की जो मुख्य किरदार थी वो अपने पर हुए हर जुल्म और अत्याचार के बाद भी चुप रहती है। हालांकि बदलते वक्त के साथ महिला पात्र भारतीय फिल्मों में मजबूत हुई हैं, लेकिन अभी इस दिशा में और प्रयास किए जाने की जरूरत है।

नेशनल अवॉर्ड हासिल करने में रिकॉर्ड बनाया
शबाना आजमी रिकॉर्ड पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें पहली बार 1975 में फिल्म अंकुर, फिर 1983 में अर्थ, 1984 में खंडहर, 1985 में पार और 1999 में फिल्म गॉडमदर के लिए यह सम्मान दिया गया था।


प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित
शबाना आजमी को चार बार फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया है। 1978 में स्वामी, 1983 में अर्थ, 1985 में भावना और 1999 में फिल्म गॉडमदर के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। साल 1988 में शबाना आजमी को पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।…NEXT

 

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