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बेटे की मौत से टूट गए थे जगजीत सिंह, अटल बिहारी बाजपेयी से रहा ये ख़ास रिश्ता

Shilpi Singh

8 Feb, 2019

गजल सम्राट जगजीत सिंह आज हमारे बीच होते तो अपना 78 वां बर्थडे मना रहे होते। 8 फरवरी, 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्में जगजीत सिंह ने अपनी गायकी से सारी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी भी उनके मुरीद थे। बहरहाल, न जाने कितनी ही पीढ़िया हैं जो जगजीत सिंह के गाये गज़लों में सुकून पाती रही हैं। आज वो हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी आवाज आज भी लोगों को सुकून दे जाती है।

 

 

जगमोहन था असली नाम

 

 

8 फरवरी को ही जगजीत का जन्म हुआ था, 1941 को राजस्थान के गंगानगर में जगजीत पैदा हुए थे। पहले उनका नाम जगमोहन था, लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने अपना नाम बदल लिया। बचपन से उन्हें संगीत का शौक था, उन्होंने उस्ताद जमाल खान और पंडित छगनलाल शर्मा से संगीत की शिक्षा ली थी।

 

क्लासिकल संगीत की शिक्षा ली

 

 

पढ़ाई के बाद जगजीत सिंह ने ऑल इंडिया रेडियो जालंधर में एक सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर के रूप में काम शुरू कर दिया। उसके बाद कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी हरियाणा से पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई भी की। जगजीत सिंह ने गुरुद्वारे में पंडित छगनलाल मिश्रा और उस्ताद जमाल खान से क्लासिकल संगीत की शिक्षा ली।

 

विज्ञापन में जिंगल गाया करते थे

 

 

1965 में बॉलीवुड में सिंगर बनने की तमन्ना लेकर जगजीत मायानगरी मुंबई पहुंचे। करियर के शुरुआत में जगजीत विज्ञापन फिल्मों में जिंगल गाया करते थे। दो साल बाद ही 1967 में उनकी मुलाकात गज़ल गायिका चित्रा से हुई और 1969 में दोनों विवाह बंधन में बंध गए। साल 1976 में जगजीत सिंह और चित्रा की एल्बम ‘The Unforgettable’ रिलीज हुई, जिसे काफी सराहा गया।

 

बेटे की मौत से टूटे जगजीत

 

 

जगजीत और चित्रा सिंह दोनों संगीत कार्यक्रमों में अपनी जुगलबंदी से समां बांध दिया करते थे। दोनों एक बेटे के माता-पिता बने। उन्होंने उसका नाम विवेक रखा। लेकिन, साल 1990 के एक कार हादसे में जगजीत-चित्रा के बेटे विवेक की मौत हो गई। उस समय उसकी उम्र 18 साल थी। इकलौते बेटे की असमय मौत ने चित्रा को पूरी तरह तोड़ दिया और उन्होंने गायकी से दूरी बना ली।

 

कई मशहूर गानों की दी आवाज

 

 

‘चाहे छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो वो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी’ हो या ‘चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश, जहां तुम चले गये’। जैसे सैकड़ों भाव समेटे जीवन के हर पड़ाव और सवालात जगजीत सिंह की गजलों में रचे बसे हैं।

जगजीत सिंह के मुरीद थे अटल बिहारी बाजपेयी

 

 

पद्मभूषण जगजीत सिंह के बारे में बता दें कि भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी भी उनके बड़े मुरीद रहे। जगजीत इकलौते ऐसे गायक-संगीतकार हैं जिन्होंने अटल जी के शब्दों को संगीत भी दिया है और गाया भी। अटल जी एक जाने-माने कवि भी थे तो जगजीत सिंह ने उनकी कविताओं को संगीतबद्ध भी किया और अपनी रूहानी आवाज़ में गाया भी। 10 अक्टूबर, 2011 को समय ने जग को जीतने वाले इस जादूगर को हमसे छीन लिया। आज भले वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी जादुई आवाज़ आने वाली तमाम नस्लों को अपना बनाकर रखने का माद्दा रखती हैं।…Next

 

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