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फ़िल्मी सितारों का बेतुका बयान

National Issues

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पहले आमिर खान ने इसकी घोषणा की कि उन्हें भारत में डर लगता है. आमिर खान ने अपनी पत्नि के साथ इस विषय में विचार विमर्श किया कि समय आ गया है जब उन्हें अपनी पत्नि और बच्चे को लेकर किसी अन्य देश जाकर शरण लेना चाहिए. यह घटना 2015 की है. लेकिन आमिर खान अपने परिवार के साथ मुंबई में ही विराजमान हें. इसका अर्थ यह हुआ कि जिहाद का काम जो बुध्धिजीविओं ने लिया है वह चलता रहेगा.
उसके बाद 2018 में फिल्म एक्टर नसीरुद्दीन शाह को डर लगने लगा. और उनके हिसाब से हिंदू असहिष्णु हो गया है. यह जनाब भी अब तक यहीं विराजमान हें. इन्हें जाना कहीं नहीं है इनका काम सिर्फ आतंकवाद जो मुख्यतया इस्लाम से सम्बन्ध रखता है को प्रोत्साहन देना और हिंदू समुदाय को आतंकवाद के लिए बदनाम करने का है.

अभी हाल में फिल्म जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आज़मी को यह एहसास हुआ कि वर्त्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार के खिलाफ अगर बोला जाए तो बोलने वाला राष्ट्र द्रोही घोषित हो जाएगा और यह भारत सरकार की सहमती से होगा यदि यह सच होता तो मुख्य धारा की लगभग सभी समाचार पत्रों चाहे अंग्रेजी पत्र हो या समान रूप से पिट्ठू हिंदी या किसी और भारतीय भाषा में हो के कार्यालयों में ताला लग जाता. और अनुभवी समझे जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक के रूप में भारत के हिदू समुदाय के खिलाफ ज़हर नहीं उगलते होते. इस प्रकार के इस्लाम के हक में एकतरफा बयान देना और हिन्दुओं को बुराइयों का पुलिंदा कहना इन समाचार पत्रों के DNA में समाहित है.

मेरा विश्लेषण यह कहता है कि लम्बी ग़ुलामी की अवधि के कारण और फिर आज़ादी के बाद अंग्रेजी परस्त सरकार के कारण हिंदू कुंठा में जी रहा था और चूँकि कांग्रेस की सरकार हिन्दुओं को दबाती रही इस कारण हिंदू आत्मसम्मान खो रहे थे. जबकि मुसलमानों की ग़द्दारी और हिन्दुओं के खिलाफ आवाज़ बुलंद रखने की आदतों को बढ़ावा मिलता रहा. इन परिस्तिथियों में आमिर खान,नसीरुद्दीन शाह, शब्बाना आज़मी सरीखे हस्तियों से सक्रिय सहायता मिलना भारत के लिए खतरनाक है. मुख्य धारा के समाचार पत्रों का योगदान हिंदू समुदाय को कुंठित रखने में महत्त्वपूर्ण रहा है.

राजनेताओं का योगदान धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में इस्लाम की ज़हरीली गतिविधिओं को बढाने में बहुत ही सक्षम प्रमाणित हुआ है. यदि हम कांग्रेस के साथ ही साथ अन्य राजनीतिक दलों जैसे सपा बसपा रजद जदू एनसीपी जेडीएस तृणमूल कांग्रेस को देखें और इनकी राजनीतिक गति विधियों पर ध्यान डालें तो स्पष्ट हो जाएगा कि किसी तरह इनकी मंशा सत्ता में आ जाने की होती है देश किस दिशा में जा रहा है इस ओर नहीं होती. इनका लक्ष्य किसी तरह सत्ता की कुर्सी पर बैठ जाने तक ही सीमित है. इसके लिए इन पार्टिओं का ध्यान सामाजिक तुष्टिकरण की ओर केन्द्रित रहता है. और इससे मुसलमानों की अभद्रता को सहायता मिलती है. इस्लाम के नाम पर हिंदू धार्मिक स्थलों पर तोड़ फोड़ करना हिन्दुओं को हमेशा दबाना और हिंदू के मकानों पर कब्जा करना इन इस्लामिक आतंकियों का लक्ष्य होता है और इसके लिए उल्लिलिखित पार्टिओं का सक्रिय योगदान होता है.

मेरा उद्देश्य सामाजिक सौहार्द्र को असंतुलित करना नहीं है. उल्लेखनीय है कि चुपचाप रहने वाला मुस्लिम वर्ग हिन्दुओं के साथ मिलजुल कर रहना चाहता है और उनकी भी अपेक्षा है कि हिंदू समाज अपने हक के लिए आगे आयें और आतंकियों के साजिशों को सफल नहीं होने दें. हमे हमेशा इसका एहसास है कि भारत का बुद्धिजीवी देश द्रोहियों आतंकियों और समाज में शाति को भंग करने वालों के साथ है. इस कारण सोते हुए हिन्दुओं को जगाने की आवश्यकता है ताकि शांतिप्रिय मुस्लिम भाईओं और बहनों को साथ लेकर हम सभी एक साथ प्रगति की ओर आगे बढ़ें.
जयहिंद!

 

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