Menu
blogid : 15605 postid : 1387257

जिंदगी के परम बान

VOICES

  • 90 Posts
  • 16 Comments

पेड् हरे हैं, भरे हैं और घने हैं,

रखते काली दुनिया को साफ हैं,

प्रक्रति मां को रखते ठीक हैं,

जग को सुंदरता करते बहाल हैं।

 

झर-झर करती वर्षा आती है,

धरा को नहला कर करती साफ है,

नये पौधे धरा को दिखाते आंख है,

नर-नारी करते हर्ष-नाद हैं।

 

आप जैसा दानी, कोई दुसरा नहीं है,

तुम ना हो तो, जीवन नहीं है,

जिसको सींचा प्रभु ने, ये बही नाम है,

जग लुभाती, ये वही राग है।

जग की शक्ति, यही शान है,

जिंदगी के लिये परम बागबान है।

 

डिस्कलेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण डॉट कॉम किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *