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बनावट की वजह से हारी दुनिया

KuchKehnaZaruriHai

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बनावट की वजह से हारी दुनिया
ऐसे तो बहुत थी ये प्यारी दुनिया

लोगों में बट गया है इबादत का जुनून
वैसे तो मोहब्ब्त थी सारी दुनिया

दुनिया ने बिगाड़ी है मेरी मंज़िल
मंज़िल ने बिगाड़ी है मेरी दुनिया

सब लोग मतलब का मज़ा लेते हैं
मतलब की बीमारी से मारी दुनिया

बैठूं तो दुनिया बेदखल कर दे
चलने के सबब में है गुज़ारी दुनिया

 

 

डिस्क्लेमर: उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी भी दावे या आंकड़े की पुष्टि नहीं करता है।

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