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World Peace Day 2012: इतिहास विश्व शांति दिवस का

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International Peace Day 2012

विश्व शांति दिवस का इतिहास

आज विश्व शांति दिवस है. विश्व में फैली हिंसा और युद्ध की अशांति को आज दूर करने का हर देश में प्रण लिया जा रहा है लेकिन क्या सिर्फ एक दिन विश्व शांति के नाम कर हम इसे पा सकते हैं? क्या विश्व शांति दिवस आज प्रसांगिक रह गया है? आइए जानें क्या है विश्व शांति दिवस का इतिहास.

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History and Theme of World Peace Day 2012विश्व शांति की दिशा में यूएन के कदम

दुनिया भर में शांति कायम करना संयुक्त राष्ट्र का मुख्य ध्येय है. संयुक्त राष्ट्र चार्टर में भी इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को रोकने और शांति की संस्कृति विकसित करने के लिए ही यूएन का जन्म हुआ है. संघर्ष, आतंक और अशांति के इस दौर में अमन की अहमियत का प्रचार-प्रसार करना बेहद जरूरी और प्रासंगिक हो गया है. इसलिए संयुक्त राष्ट्रसंघ, उसकी तमाम संस्थाएं, गैर-सरकारी संगठन, सिविल सोसायटी और राष्ट्रीय सरकारें प्रतिवर्ष 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस का आयोजन करती हैं. शांति का संदेश दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कला, साहित्य, सिनेमा, संगीत और खेल जगत की विश्वविख्यात हस्तियों को शांतिदूत भी नियुक्त कर रखा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आज से तीन दशक पहले यह दिन सभी देशों और उनके निवासियों में शांतिपूर्ण विचारों को सुदृढ़ बनाने के लिए समर्पित किया था.


History and Theme of World Peace Day 2012: विश्व शांति दिवस का इतिहास

1982 से शुरू होकर 2001 तक, सितंबर महीने का तीसरा मंगलवार अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस या विश्व शांति दिवस के लिए चुना जाता था. लेकिन 2002 से इसके लिए 21 सितंबर का दिन घोषित कर दिया गया. इस वर्ष 21 सितंबर विश्व शांति दिवस की थीम है- धारणीय भविष्य के लिए धारणीय शांति


History  of World Peace Day 2012India and World Peace: भारत और विश्व शांति

स्व. जवाहरलाल नेहरू जी ने विश्व में शांति और अमन फैलाने के लिए पांच मूलमंत्र दिए थे. इन्हें पंचशील के सिद्धांत भी कहा जाता है. यह पंचसूत्र जिसे पंचशील भी कहते हैं मानव कल्याण तथा विश्वशांति के आदर्शों की स्थापना के लिए विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्था वाले देशों में पारस्परिक सहयोग के पांच आधारभूत सिद्धांत हैं. इसके अंतर्गत ये पांच सिद्धांत निहित हैं-


(1) एक दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और प्रभुसत्ता का सम्मान करना.

(2) एक दूसरे के विरुद्ध आक्रामक काररवाई न करना.

(3) एक दूसरे के आंतरिक विषयों में हस्तक्षेप न करना.

(4) समानता और परस्पर लाभ की नीति का पालन करना तथा.

(5) शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की नीति में विश्वास रखना.


माना जाता है अगर विश्व इन पांच बिंदुओं पर अमल करे तो हर तरफ चैन और अमन का ही वास होगा. विश्व शांति दिवस के उपलक्ष्य में हर देश में जगह-जगह सफेद कबूतरों को उड़ाया जाता है जो कहीं ना कहीं पंचशील के ही सिद्धांतों को दुनिया तक फैलाते हैं. विश्व शांति दिवस के मौके पर सफेद कबूतर उड़ाने की परंपरा बहुत पुरानी है पर इन कबूतरों को उड़ाने के पीछे एक शायर का निम्न शेर बहुत ही विचारणीय है:

लेकर चलें हम पैगाम भाईचारे का,

ताकि व्यर्थ खून न बहे किसी वतन के रखवाले का.


इस सदी में विश्व में फैली अशांति और हिंसा को देखते हुए हाल के सालों में शांति कायम करना टेढ़ी खीर ही लगता है लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है और हम भी यही उम्मीद करते हैं कि जल्द ही वह दिन आएगा जब हर तरफ शांति ही शांति होगी.

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