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Teacher’s Day 2012: शिक्षक की खट्टी-मीठी बातें

Special Days

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Teacher’s Day in India

किसी भी देश का आने वाला कल इसी बात पर निर्भर करता है कि उस कल को दिशा देने वाले कौन हैं.विनोबा भावे


विनोबा भावे के बोले गए यह शब्द साफ करते हैं कि किसी भी समाज या देश के लिए शिक्षकों का महत्व कितना अधिक है. समाज की कल्पना बिना शिक्षकों के अधूरी है. शिक्षक सिर्फ वही नहीं है जो आपको किताबी ज्ञान दे बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर आपको सही राह दिखाने वाले भी शिक्षक ही होते हैं. हमारा पूरा जीवन ही शिक्षकों को समर्पित होता है लेकिन इसके बावजूद भी गुरु पूर्णिमा और शिक्षक दिवस जैसे विशेष दिनों को हम अपने गुरुओं को ही समर्पित करते हैं.


Tag: गुरु गोविन्द दोउ खड़े


Teacher’s day in India
Teacher’s day in India

Teacher in Life

जीवन की आधारभूत जरूरतों रोटी-कपडा के बाद मानव को मानव कहलाने के लिए जिस चीज की जरूरत शायद सबसे ज्यादा होती है वह है-शिक्षा. सरकार भी शिक्षा को देश के विकास की प्रमुख शर्त व राष्ट्रीय चरित्र की गारंटी मानती है. यही कारण है कि देश में हर स्तर पर शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए हर मुमकिन कदम उठाए जा रहे हैं. लेकिन ये कोशिशें उस शिक्षक के बगैर पूरी नहीं हो सकती हैं, जो इस पूरी प्रक्रिया की रीढ है. शिक्षक अक्षरों व मात्राओं का जोड सिखाकर ऐसे इंसान की रचना करता है जो देश की किस्मत को नई दिशा देते हैं. यही कारण है कि 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस हर वर्ष मनाया जाता है.


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 Teacher’s day  2012Teacher’s in India

भारत में गुरु-शिष्य की परंपरा बहुत पुरानी है. भगवान कृष्ण के प्राचीन कथाओं से लेकर आज के हाइटेक जीवन में हमें हर तरफ शिक्षकों की महत्ता दिखाई देती है. भारत में गुरु और शिष्य का रिश्ता एक परंपरा के रूप में बंधा होता है. यहां गुरु अपना ज्ञान शिष्य को देता है तो शिष्य भी गुरु दक्षिणा देकर गुरु का ऋण चुकाने की परंपरा का निर्वाह करता है. गुरु द्रोणाचार्य के बिना अर्जुन को धनुष विद्या का ऐसा ज्ञान नहीं हो पाता तो वहीं अगर रामकृष्ण परमहंस ना होते तो भारतीय संस्कृति का वैश्विक महानाद करने वाले विवेकानंद को सही दिशा कौन देता?


लेकिन समय के साथ कई बार गुरु और शिष्य के रिश्ते को नजर लगी है. कभी शिष्यों ने गुरुओं की महिमा को खंडित किया है तो कभी कुछ गुरुओं ने अपनी ओछी हरकतों से गुरु समाज का नाम कलंकित किया है.


सिर्फ 05 सितंबर को शिक्षक दिवस मना लेने भर से हम शिक्षकों के प्रति अपना आदर नहीं दर्शा सकते. अगर हमें शिक्षकों का सही आदर करना है तो हमको अपने गुरु का आदर-सत्कार करना चाहिए. हमें अपने गुरु की बात को ध्यान से सुनना और समझना चाहिए.


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शिक्षक दिवस जिस महान व्यक्ति के जन्मदिन पर मनाया जाता है उसके बारें में जाननें के लिए यहां क्लिक करें: Dr. Sarvepalli Radhakrishnan


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(Photos courtesy: newspaper.li )

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