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जब नमक ने बदल दी देश की तकदीर

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salt satyagrahaयह वह दौर था जब देश आजादी के लिए हुंकार भर रहा था. हर किसी के दिल में ब्रिटिश राज के खिलाफ एक अलग तरह की कसक थी. कसक ऐसी जो कभी भी एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती थी. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) अभी पूरी तरह से लाइम लाइट में आए थे. असहयोग आंदोलन समाप्त होने के कई वर्ष बाद तक गांधी जी ने अपने को समाज सुधार कार्यों पर केंद्रित रखा. वह सक्रिय राजनीति से पूरी तरह से दूर रहे. लेकिन जब वह दोबारा आंदोलन में सक्रिय हुए तब उन्होंने न केवल ब्रिटिश सरकार की बल्कि पूरी दुनिया की आत्मा को झकझोर दिया था.


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बात मार्च 1930 की है जब गांधी जी ने नमक पर कर लगाए जाने के विरोध में नया सत्याग्रह चलाया जिसे 12 मार्च से 6 अप्रैल तक नमक आंदोलन (Salt March in Hindi) के रूप में लगातार 24 दिनों तक 400 किलोमीटर का सफर अहमदाबाद (साबरमती आश्रम) से दांडी, गुजरात तक चलाया गया ताकि स्वयं नमक उत्पन्न किया जा सके. नमक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल गरीब से लेकर हर अमीर करता है. पशुओं को खिलाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. ऐसी सर्वव्यापी और सार्वकालिक वस्तु को आजादी के आंदोलन से जोड़ना ही गांधी विचार और कर्म की विशिष्टता है. यही वजह रही कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के दांडी कूच और नमक सत्याग्रह ने दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया.


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दांडी की ओर इस यात्रा में हजारों की संख्‍या में भारतीयों ने भाग लिया. लगभग तीन हफ्तों बाद गांधी जी अपने गंतव्य स्थल पर पहुंचे और मुट्‌ठी भर नमक बनाकर स्वयं को कानून की निगाह में अपराधी बना दिया. इसी बीच देश के अन्य भागों में समानांतर नमक यात्राएं अयोजित की गईं. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के इस आन्दोलन को जगह-जगह से समर्थन मिलने लगा. भारत में अंग्रेजों की पकड़ को विचलित करने वाला यह एक सर्वाधिक सफल आंदोलन था जिसमें अंग्रेजों ने 80,000 से अधिक लोगों को जेल भेजा. इस आंदोलन का प्रभाव इतना रहा कि इसकी चिंगारी की लपट ने आगे चलकर सविनय अवज्ञा आंदोलन की आधारशिला रखी.


2011 में अमेरिका की मशहूर पत्रिका टाइम ने वर्ष 1930 में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के नेतृत्व वाले दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) को दुनिया को बदल देने वाले 10 महत्वपूर्ण आंदोलनों की सूची में दूसरे स्थान पर रखा है. टाइम पत्रिका ने नमक सत्याग्रह के बारे में लिखा कि भारत पर ब्रिटेन की लंबे समय तक चली हुकूमत कई मायने में चाय, कपड़ा और यहां तक की नमक जैसी वस्तुओं पर एकाधिकार कायम करने से जुड़ी थी. टाइम पत्रिका के अनुसार दांडी यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में बापू के समर्थक उनके साथ जुड़ गए थे. रिपोर्ट में टाइम ने लिखा कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) और उपस्थित जनसमुदाय ने समुद्र से नमक बनाया.


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