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ओम पुरी: आर्ट फिल्मों से घर नहीं चलता

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भले ही चरित्र किरदारों के लिए निर्माताओं की पहली पसंद अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर हों, लेकिन दम तो मुझमें और नसीर में भी कम नहीं है. एक साक्षात्कार में फिल्म अभिनेता ओम पुरी (Om Puri) ने अपने किरदारों को लेकर ऐसी ही बात कही थी. भारतीय फिल्म उद्योग में शुरु से ही उन अभिनेताओं को तवज्जो दी जाती रही है जिन्हें भले ही एक्टिंग करना ना आता हो लेकिन अपने डांस और नायक छवि वाले चेहरे से सबको अपनी ओर आकर्षित किया.


om puriइसी तरह भारतीय फिल्म उद्योग में कुछ ऐसे भी नायक है जो फिल्मों में तो साइड रोल निभाते हैं लेकिन अपने दमदार अभिनय की वजह से मुख्य किरदार से भी ज्यादा असरदार साबित होते हैं. ओम पूरी ने अपने 35 साल के फिल्मी कॅरियर में ऐसे ही असरदार रोल निभाए हैं जिन्हें आज तक याद किया जाता है. ओम पूरी को उन अभिनेताओं में नहीं गिना जाता जो व्यावसायिक फिल्म निर्माताओं को पैसे कमा कर देते हैं. अभिनय के लिहाज से इनकी गिनती क्वालीफाइड एक्टर्स में की जाती है.


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ओम पुरी (Om Puri) एक्टिंग के नस-नस से पूरी तरह से वाकिफ है. उन्होंने फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (Film and Television Institute of India) से स्नातक के बाद ओम पुरी ने दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल आफ ड्रामा (एनएसडी) से अभिनय का कोर्स किया.  यहीं उनकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों से भी हुई.


ओम पूरी (Om Puri) की पहली फिल्म 1976  आई ‘घासीराम कोतवाल’ थी. घासीराम की संवेदनशील भूमिका में अपनी अभिनय-क्षमता का प्रभावी परिचय ओम पुरी (Om Puri) ने दिया और धीरे-धीरे वे मुख्य धारा की फिल्मों से अलग समानांतर फिल्मों के सर्वाधिक लोकप्रिय अभिनेता के रूप में उभरने लगे. जिन फिल्मों के लिए उन्हें सबसे ज्यादा याद किया जाता है उनमे ‘आक्रोश’, ‘आरोहण’, ‘अर्ध सत्य’, ‘ भवनी भवई’ के लिए याद किया जाता है. 1981 में फिल्म ‘आक्रोश’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया जबकि  1982 में फिल्म ‘आरोहण’ (Arohan) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया. 1987 में प्रदर्शित भीष्म साहनी के उपन्यास पर आधारित धारावाहिक ‘तमस’ में ओम पुरी ने काम किया था. इसमे उनके अभिनय को काफी सराहा गया.


चाची 420, हेरा फेरी, मेरे बाप पहले आप, मालामाल वीकली में ओम पुरी (Om Puri) हंसती-गुदगुदाती भूमिकाओं में दिखे तो शूट ऑन साइट, महारथी, देव और दबंग में चरित्र अभिनेता के रूप में वे दर्शकों से रू-ब-रू हुए. ओमपुरी हिंदी फिल्मों की उन गिने-चुने अभिनेताओं की सूची में शामिल हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनायी है. ईस्ट इज ईस्ट, सिटी ऑफ ज्वॉय, वुल्फ, द घोस्ट एंड डार्कनेस जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी उन्होंने अपने उम्दा अभिनय की छाप छोड़ी है.


आज बॉलीवुड में आर्ट फिल्मों को काफी सराहा जा रहा है लेकिन ऐसी फिल्में करने वाले अभिनेता ग्लैमर और चकाचौंध भरी फिल्मी दुनियां में या तो अपने आप को बदल देते हैं या फिर आर्ट फिल्मों के माध्यम से अपनी कलाकारी से सबको रूबरू करा रहे हैं. लेकिन ऐसे कलाकारों की मजबूरी है कि वह इस तरह की फिल्मों से अपना घर नहीं चला सकते है. यह बात स्वयं ओम पुरी भी मानते हैं. उन्हें ‘स्पर्श’ पांच सौ रुपए में की जबकि ‘आक्रोश’ में सिर्फ नौ हजार रुपए मिले थे.

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