Menu
blogid : 3738 postid : 2713

Nag Panchami 2012 नागपंचमी: नागों को समर्पित एक पर्व

Special Days

  • 1020 Posts
  • 2122 Comments

Nag Panchami in Hindi

भारतीय संस्कृति में जीव का विशेष महत्व है. हमारे लिए गाय अगर माता है तो पीपल के पेड़ को भी हम देवता स्वरूप में पूजते हैं. हमारी इसी संस्कृति का एक अहम हिस्सा है नागपंचमी. नागपंचमी नागों को समर्पित हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है.

नाग को दुध क्यूं पिलाते है?


NAGPANCHMINagpanchami and Indian Culture: नाग और हमारी संस्कृति

नाग हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है. जहां एक तरफ नाग भगवान शंकर के आभूषण के रूप में उनके गले में लिपटे रहते हैं तो वहीं शिवजी का निर्गुण-निराकार रूप शिवलिंग भी सर्पों के साथ ही सजता है. भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर ही शयन करते हैं. शेषनाग विष्णुजी की सेवा से कभी विमुख नहीं होते. मान्यता है कि जब-जब भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते हैं, तब-तब शेषनाग जी उनके साथ अवतरित होते है. रामावतार में लक्ष्मणजी तथा कृष्णावतार में बलराम जी के रूप में शेषनाग ने भी अवतार लिया था.


Nag Panchami : नागपंचमी कब मनाते हैं

पवित्र श्रावण (सावन) माह के शुक्ल पक्ष में पांचवें दिन को या पंचमी को नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि श्रावण मास के शुक्लपक्ष की पंचमी नागों को आनंद देने वाली तिथि है, इसलिए इसे नागपंचमी के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मातृ-शाप से नागलोक जलने लगा, तब नागों की दाह-पीड़ा श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन ही शांत हुई थी. इस कारण नागपंचमी पर्व लोकविख्यात हो गया.


Nag Panchami 2012 Dates: नागपंचमी 2012

नागपंचमी 2012 में 23 जुलाई को पड़ रही है.


nagpanchmiNag Panchami Vart pujan vidhi: नागपंचमी व्रत पूजन विधि

यह त्यौहार सांप या नाग की सफेद कमल से पूजा कर मनाया जाता है. सामान्यतः लोग मिट्टी से विभिन्न आकार के सांप बनाते हैं तथा उसे विभिन्न रंगों से सजाते हैं. मिट्टी से बने सांप की मूर्ति को किसी मंच पर रखा जाता है तथा उन पर दूध अर्पित की जाती है. महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ भागों में नाग देवता के स्थायी मंदिर हैं जहां उनकी विशेष पूजा काफी धूमधाम से की जाती है. यह दिन सपेरों के लिए भी विशेष महत्व का होता है, उन्हें दूध और पैसे दिए जाते हैं. इन दिनों मिट्टी की खुदाई पूरी तरह से प्रतिबंधित है.


गरुड़ पुराण के अनुसार घर के प्रवेश द्वार पर नाग का चित्र बनाया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है. इसे ‘भित्ति चित्र नाग पूजा के नाम से भी जाना जाता है. महिलाएं ब्राह्मणों को भोजन, लड्डू तथा खीर ( चावल, दूध तथा चीनी से बना एक विशेष खाद्य)  देती हैं. ये ही वस्तुएं सांप को तथा सांप के बिल पर भी अर्पण की जाती हैं.


Nag Panchami Katha or Story in Hindi: नाग पंचमी कथा

नाग पंचमी की पूजा के पीछे कई कथाएं हैं जिसमें से एक काफी प्रचलित है.


एक समय एक किसान था जिसके दो पुत्र तथा एक पुत्री थी. एक दिन जब वह अपने खेत में हल चला रहा था, उसका हल सांप के तीन बच्चों पर से गुजरा और सांप के  बच्चों की मौत हो गई. अपने बच्चों की मौत को देख कर उनकी नाग माता को काफी दुख हुआ.. नागिन ने अपने बच्चों की मौत का बदला किसान से लेने का निर्णय किया. एक  रात को जब किसान और उसका परिवार सो रहा था, नागिन ने उनके घर में प्रवेश कर गई. उसने किसान, उसकी पत्नी और उसके दो बेटों को डस (काट) लिया. इसके परिणाम स्वरूप सभी की मौत हो गई.  किसान की पुत्री को नागिन ने नहीं डसा था जिससे वह जिंदा बच गई. दूसरे दिन सुबह नागिन फिर से किसान के घर में किसान की बेटी को डसने के इरादे से गई. किसान की पुत्री काफी बुद्धिमान थी . उसने नाग माता को प्रसन्न करने के लिए कटोरा भर कर दूध दिया तथा हाथ जोड़कर प्रार्थना की नागिन उसके पिता को अपने प्रिय पुत्रों की मौत के लिए माफ कर दे. उसने नागिन का स्वागत किया और उसके माता-पिता को माफ कर देने की प्रार्थना की. नाग माता इससे काफी प्रसन्न हुई तथा उसने किसान, उसकी पत्नी और उसके दोनों पुत्रों को, जिसे उसने रात को काटा था, जीवन दान दे दिया. इसके अलावा नाग माता ने इस वायदे के साथ यह आशीर्वाद भी दिया कि श्रावण शुक्ल पंचमी को जो महिला सांप की पूजा करेगी उसकी सात पीढ़ी सुरक्षित रहेगी .


वह नाग पंचमी का दिन था और तब से सांप दंश से रक्षा के लिए सांपों की पूजा की जाती है.


नाग गायत्री मंत्र

ओम नवकुलाए विदमाह् विषदन्ताय् धीमही तनो सर्पः प्रचोदयात


नाग पंचमी और वर्तमान समय

सही मायने में नागपंचमी का त्यौहार हमें नागों के संरक्षण की प्रेरणा देता है. पर्यावरण की रक्षा और वनसंपदा के संवर्धन में हर जीव-जंतु की अपनी भूमिका तथा योगदान है, फिर सर्प तो लोक आस्था में भी बसे हुए हैं.


लेकिन अब भारतीय संस्कृति में पूजनीय नागों को व्यापारिक लाभ के लिए मारा और बेचा जाता है. सांपों की खाल, जहर और अन्य उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मंहगे बिकते हैं जिनकी मांग भी काफी है और यही वजह भी है कि सांपों या नागों को अंधाधुंध मारा जाता है. वन विभाग और सरकार की तरफ से सांपों को संरक्षित करने के कई उपाए तो किए जा रहे हैं लेकिन सांपों के इलाके में मानवों की चहल पहल ने इन शांत जीवों को उग्र होने पर विवश कर दिया है.


नाग पंचमी का त्यौहार मनाते हुए हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि आगे से किसी भी ऐसे प्रसाधन या उत्पाद का इस्तेमाल नहीं करेंगे जिसमें सांपों या नागों का प्रयोग हुआ हो. आशा करते हैं कि भविष्य में हमारे बच्चे भी इन सांपों या नागों को देख सकेंगे और हमारी संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे.


Tag: नाग पंचमी, हिन्दी में ब्लॉग, ब्लॉग़, नाग पंचमी, नाग पंचमी की कथा, Nag Panchami, Nag Panchami Festival, Hindu Festivals, Festivals of Hindu, Legends behind Nag Panchami, Stories of Nag Panchami, Shravan month Festivals

Read Comments

Post a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *