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श्रमिकों के अधिकारों की पैरवी करता मई दिवस

Special Days

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may dayमई माह के पहले दिन अर्थात 1 मई को विश्व के लगभग सभी देशों में मई दिवस या श्रमिक दिवस मनाया जाता है. श्रमिकों के काम के घंटों को कम करने और उन्हें अधिकार दिलाने के लिए अमेरिका में एक मुहिम की शुरूआत हुई. धीरे-धीरे यह मुहिम एक आंदोलन में परिवर्तित हो गई और भारत पहुंच गई. अमरीका में तो श्रमिक दिवस मनाने की परंपरा बहुत पुरानी है लेकिन भारत में इसे पहली बार 15 जून, 1923 को मनाया गया. इसके अलावा कई राष्ट्रों और संस्कृतियों में यह दिवस पारंपरिक बसंत महोत्सव के तौर पर भी मनाया जाता है और इस दिन सार्वजनिक अवकाश रखने का भी प्रावधान है.


मई दिवस का इतिहास

अमरीका में शुरू हुआ मजदूर आंदोलन, वहां उमड़े औद्योगिक सैलाब का ही एक हिस्सा था. इसका सीधा संबंध अमरीका की आजादी के लिए चल रही लड़ाई तथा 1860 में हुआ गृहयुद्ध भी था. 19वीं शताब्दी तक पहुंचते-पहुंचते मजदूर संगठन एवं मजदूर यूनियन बेहद मजबूत और अपने अधिकारों के लिए जागरुक भी हो गए थे.

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सबसे पहले मजदूरों के जो भी संगठन बने उनमें बुनकर, दर्जी, जूते बनाने वाले लोग, फैक्ट्री आदि में काम करने वाले पुरुष तथा महिला मजदूर प्रमुख थे. अपने अधिकारों की मांग करते हुए मजदूरों ने राष्ट्रव्यापी संगठन बनाने की भी कोशिश की और वर्ष 1834 में नेशनल ट्रेड यूनियन का निर्माण किया गया.


संगठन से जुड़े मजदूरों ने सबसे पहले अपने काम के घंटे कम करने के लिए संघर्ष किया, जिसमें सबसे ज्यादा योगदान अमरीकी मजदूर ‘तहरीक’ का था. नेशनल ट्रेड यूनियन और अन्य मजदूर संगठनों ने मिलकर यह निर्णय लिया कि 1 मई, 1886 को श्रमिक दिवस मनाया जाएगा. कुछ राज्यों में बहुत पहले से ही मजदूरों के लिए आठ घंटे काम करने का चलन था परंतु इसे कानूनी मान्यता नहीं दी गई थी. इस चलन को पूरी तरक वैधानिक बनाने के लिए पूरे अमेरिका में 1 मई, 1886 को हड़ताल हुई. जिसके बाद पहले जहां मजदूरों को 10 घंटे प्रतिदिन काम करना पड़ता था वहीं अब उनके लिए 8 घंटे निश्चित कर दिए गए.


may day 2भारत में मई दिवस

भारत में मई दिवस पहली बार वर्ष 1923 में मनाया गया जिसका सुझाव सिंगारवेलु चेट्टियार  नाम के एक प्रभावी कम्यूनिस्ट नेता ने दिया. उनका कहना था कि दुनियां भर के मजदूर इस दिन को मनाते हैं तो भारत में भी इसकी शुरूआत की जानी चाहिए. मद्रास में मई दिवस मनाने की अपील की गई. इस अवसर पर वहां कई जनसभाएं और जुलूस आयोजित कर मजदूरों के हितों के प्रति सभी का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया.


आज भी विश्व के सभी बड़े देशों में श्रमिक दिवस या मई दिवस मनाया जाता है. भले ही अलग-अलग राष्ट्रों में इस दिन को मनाने का तरीका भिन्न है लेकिन इसका एकमात्र उद्देश्य मजदूरों को मुख्य धारा में बनाए रखना और उनके अधिकारों के प्रति समाज को और स्वयं उन्हें जागरुक करना है.


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