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भारत कुमार : देशप्रेम को फिल्मों में उतारने वाला जादूगर

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हिन्दी फिल्मों में मसाला फिल्मों का दौर है. आज के दौर में देशप्रेम और भक्ति से भरी फिल्में बॉक्सऑफिस पर चल ही नहीं पाती. वैसे इसकी एक मुख्य वजह यह भी है कि आजकल देशभक्ति से भरी फिल्में बहुत कम बनती है. मसाला विषयों सॆ हटकर फिल्मकार कुछ और सोच ही नहीं पाते. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे भी लोग थे जो लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए प्रसिद्ध थे. और ऐसे ही एक महान अभिनेता और फिल्मकार थे मनोज कुमार.


मनोज ने अपने कॅरियर में शहीद, उपकार, पूरब और पश्चिम और क्रांति जैसी देशभक्ति पर आधारित अनेक बेजोड़ फिल्मों में काम किया. इसी वजह से उन्हें भारत कुमार भी कहा जाता है. अपने कॅरियर में अधिकतर देश-प्रेम की फिल्में बनाने वाले इस फिल्मकार ने कभी  भी नीजि स्वार्थ के लिए फिल्में नहीं बनाई बल्कि यह अपनी फिल्मों से जनता में देश-प्रेम फैलाना चाहते थे. आज फिल्मकारों में ऐसा साहस देखने को ही नहीं मिलता कि वह अपना बजट देशभक्ति जैसी फिल्मों पर लगा सकें. लेकिन मनोज कुमार तो चाहे फिल्म हिट हो या फ्लॉप कोई परवाह किए बिना अपना विषय देश-भक्ति ही रखते थे और उनकी फिल्में हिट भी होती थी.


Manoj Kumarमनोज कुमार का जीवन : The patriotic hero


मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को मौजूदा पाकिस्तान के अबोटाबाद में हुआ था. उनका असली नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी है. देश के बंटवारे के बाद उनका परिवार राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में बस गया था.दस साल की उम्र में उनका परिवार दिल्ली में बस गया था. मनोज कुमार ने दिल्ली के ही हिंदु कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. और स्नातक की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने फिल्म उद्योग में काम करने का निश्चय किया.


Manoj Kumar in Krantiमनोज कुमार का कॅरियर : Manoj Kumar’s Career


हरिकिशन (मनोज कुमार) दिलीप कुमार से बेहद प्रभावित थे और उन्होंने अपना नाम फिल्म शबनम में दिलीप के किरदार के नाम पर मनोज रख लिया था. मनोज कुमार ने वर्ष 1957 में बनी फिल्म फैशन के जरिए बड़े पर्दे पर कदम रखा. प्रमुख भूमिका की उनकी पहली फिल्म कांच की गुडि़या (1960) थी. उसके बाद उनकी दो और फिल्में पिया मिलन की आस और रेशमी रुमाल आई लेकिन उनकी पहली हिट फिल्म हरियाली और रास्ता (1962) थी.


Shaheed-1965-Hindi-Movie-Watch-Online1965 में उन्होंने फिल्म “शहीद” में भगत सिंह के किरदार को निभा कर दिखा दिया कि उनमें अभिनय किस कदर कूट-कूट कर भरी है. मनोज को शहीद के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानीकार का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था. मनोज कुमार ने शहीद फिल्म में सरदार भगत सिंह की भूमिका को जीकर उस किरदार के फिल्मी रूपांतरण को भी अमर बना दिया था.


शहीद के दो साल बाद 1967 उन्होंने बतौर निर्देशक अपनी पहली फिल्म उपकार का निर्माण किया. उसमें मनोज ने भारत नाम के किसान युवक का किरदार निभाया था जो परिस्थितिवश गांव की पगडंडियां छोड़कर मैदान-ए-जंग का सिपाही बन जाता है.जय जवान जय किसान के नारे पर आधारित वह फिल्म उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के विशेष आग्रह पर बनाई थी.उपकार खूब सराही गई और उसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ कथा और सर्वश्रेष्ठ संवाद श्रेणी में फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था. फिल्म को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार तथा सर्वश्रेष्ठ संवाद का बीएफजेए अवार्ड भी दिया गया.


1970 में आई फिल्म पूरब और पश्चिम को आज भी लोग उतने ही चाव से देखते हैं जैसे उसे पहले देखा जाता था. “पूरब और पश्चिम” में भारतीय संस्कृति की अमिट छाप को बहुत ही खुबी दे दर्शाया गया है. इसके बाद ‘वो कौन थी’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘गुमनाम’, ‘दो बदन’, ‘पत्थर के सनम’, ‘यादगार’, ‘शोर’, ‘सन्यासी’, ‘दस नम्बरी ‘और ‘क्लर्क’ जैसी अच्छी फिल्मों में काम किया.


साल 1980 में आई फिल्म “क्रांति” ने तो दर्शकों में देशप्रेम की ऐसी लहर फैलाई की फिल्म सुपरडुपर हिट हो गई. “क्रांति” में पहली बार मनोज कुमार को अपने आदर्श हीरो दिलीप कुमार के साथ काम करने का मौका मिला था. यह फिल्म हिन्दी सिनेमा की एक बहुत ही सफल फिल्म मानी जाती है.


उनकी आखिरी फिल्म मैदान ए जंग (1995) थी.


manoj-kumarहर डायलॉग के बाद मुंह को हाथ से छुपा लेना का उनका स्टाइल बहुत ही अलग था. आज भी उनके इस अंदाज की बहुत कॉपी होती है. मनोज कुमार को लोग उनकी अदाकारी की बजाय उनकी फिल्मों की वजह से याद करते हैं. अधिकतर फिल्म समीक्षक उन्हें एक औसत स्तर का अभिनेता मानते हैं लेकिन जिस तरह से उन्होंने बॉलिवुड में सफलता हासिल की उससे साबित होता है कि सफल होने के लिए रिस्क लेना ही पड़ता है. अपनी फिल्मों में वह एक ऑलराउंडर की तरह काम करते थे. फिल्मों से इतर वह अपनी नीजि जिंदगी में भी हमेशा देश-प्रेम की ही बातें करते हैं.


मनोज कुमार ने शशि अग्रवाल से शादी की थी. आज उनके दो बेटे है. विशाल कुमार और कुनाल दोनों ही फिल्म उद्योग में हैं लेकिन वह अपने पिता की तरह नाम नहीं कमा सके हैं.


मनोज कुमार की उपलब्धियां


  • मनोज कुमार को वर्ष 1972 में फिल्म ‘बेईमान’ के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेता’ और वर्ष 1975 में रोटी कपड़ा और मकान के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर अवार्ड’ दिया गया था.
  • मनोज को ‘शहीद’ के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ कहानीकार’ का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया था.
  • फिल्म ‘उपकार’ के लिए मनोज कुमार को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ कथा और सर्वश्रेष्ठ संवाद श्रेणी में फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था.
  • 1999 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचिवमेंट अवार्ड दिया गया था.
  • वर्ष 1992 में मनोज कुमार को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया.
  • 2009 में मनोज कुमार को दादा साहेब फाल्के अकादमी द्वारा फाल्के रत्न अवार्ड से नवाजा गया था.


आज के समय जो निर्देशक और फिल्मकार देशप्रेम पर आधारित फिल्में करने से पीछे हटते हैं उन्हें मनोज कुमार से सीख लेने की जरुरत है. सही विषय और कथा के साथ अगर फिल्में बनाई जाएं तो वह जरुर सफल होंगी.


मनोज कुमार की ज्योतिषीय विवरणिका देखने के लिए यहां क्लिक करें.


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