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अनु मलिक : एक विवादित संगीतकार

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आज बॉलिवुड में अकसर हर दूसरे संगीतकार पर धुनों को चुराने का आरोप लगता रहता है. धुनों को चुराना बॉलिवुड में कोई नई बात नहीं है. लेकिन माना जाता है इस ट्रेंड की शुरूआत कुछ ऐसे संगीतकारों ने की जो खुद तो बहुत अच्छा संगीत दे सकते थे मगर बाजार की मांग ने उनसे काफी अधिक चाह रखी जिसकी वजह से वह मौलिकता से भटक चुराने में विश्वास करने लगे. बॉलिवुड में बाजार की वजह से अपने असली रंग को भूल चुके एक ऐसे ही संगीतकार हैं अनु मलिक. कभी अपने संगीत से राष्ट्रीय अवार्ड जीतने वाले अनु मलिक को अब लोग मात्र एक धुन चुराने वाला संगीतकार और रियलिटी शो में प्रतियोगियों पर गुस्सा करने वाले जज के रूप में जानते हैं. आज अनु मलिक का जन्मदिन है तो चलिए जानते हैं आखिर कैसे अनु मलिक ने जमीन से शिखर तक और फिर नीचे की तरफ का सफर पूरा किया.


anu-malikअनु मलिक का जीवन

अनु मलिक के नाम से मशहूर अनवर मलिक आज भारतीय सिने जगत में एक खासे मुकाम पर हैं. चाहे बालीवुड हो अथवा हालीवुड अनु मलिक से कोई अछूता नहीं है. उनका गाना छम्मा-छम्मा अंग्रेजी फिल्म में भी इस्तेमाल किया गया था.


अनु मलिक  का जन्म 02 नवंबर, 1960 को हुआ था. उनके बचपन का नाम अनवर सरदार मलिक था. उनके पिता संगीतकार सरदार मलिक थे. अनु मलिक ने पंडित राम प्रसाद शर्मा से संगीत की शिक्षा प्राप्त की.


अनु मलिक का कॅरियर

मनमोहन देसाई, प्रेमनाथ, मोहन चौधरी तथा एफ.सी. मेहरा जैसे लोगों के साथ काम करने वाले अनु मलिक को पहले अच्छा संगीतकार नहीं माना जाता था. अपने कॅरियर की शुरूआत उन्होंने 1977 की फिल्म “हंटरवाली” से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने “एक जान हैं हम”, “सोनी महिवाल” तथा “गंगा जमुना सरस्वती” जैसी फिल्मों में अपने हाथ आजमाए लेकिन वह सफलता नहीं मिली जिसकी उन्हें तलाश थी.


लेकिन 1992 में आई फिल्म “बाजीगर” ने उन्हें रातों रात युवा दिलों की धड़कन बना दिया. बाजीगर के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला. इसके बाद फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और सफलता ने उनके कदम चूमे. जन्म, सर, तहलका जैसी फिल्मों में उनके संगीत की बहुत प्रशंसा हुई.


इसके बाद दौर आया बार्डर, रिफ्यूजी, एलओसी कारगिल, अक्स, फिजा और मै हूं ना का. इन फिल्मों ने उन्हें बालीवुड में एक अलग पहचान दिलाई. रिफ्यूजी में उनके बेहतरीन काम के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया था.


अनु मलिक ने कुमार सानू, उदित नारायण, शान, सोनू निगम जैसे कई गायकों को भी मौका देकर बुलंदियों तक पहुंचाया. आलिशा चिनॉय के साथ भी उन्होंने विजयपथ और नो एंट्री जैसी फिल्मों में काम किया पर आलिशा ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगा उनके साथ आगे काम करने से इंकार कर दिया.


हाल के दिनों में अनु मलिक टीवी शो इंडियन आइडल और एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा जैसे शो को होस्ट करते नजर आए हैं. टीवी पर भी वह अपनी विवादित छवि के लिए ही मशहूर हैं जो प्रतियोगियों को डांट-डांट कर बाहर निकालते हैं.


अनु मलिक ने कई गीत भी गाए हैं जिनमें गीत एक गर्म चाय की प्याली हो (फिल्म :हर दिल जो प्यार करेगा), गोरी गोरी (मैं हूं ना), यह काली काली आंखें (बाजीगर), ऊंची है बिल्डिंग, लिफ्ट तेरी बंद है (जुड़वा) खास हैं.


अनु मलिक को मिले पुरस्कार

अनु मलिक को दो बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का खिताब दिया गया है. उन्हें यह पुरस्कार फिल्म बाजीगर और मैं हूं ना के लिए दिए गए हैं. इसके अलावा उन्हें एक बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिया गया है. फिल्म रिफ्यूजी में बेहतरीन संगीत के लिए उन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया था.


अकसर अनु मलिक पर धुनें चुराने का आरोप लगता है. साथ ही लोगों को उनका बर्ताव भी बनावटी लगता है. पर्दे पर रियलिटी शो के दौरान वह जिस तरह की बेतुकी शायरी करते हैं उसे झेल पान कई दर्शकों के लिए बुरा अनुभव होता है. शायद यह सब बाजार का असर है जिसने एक संगीतकार से उसकी मौलिकता छीन ली है.

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