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A Love Story in hindi- प्यार शायद सोच कर….

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प्यार शायद सोच कर नहीं बस हो जाता है


मैं जल्दी-जल्दी घर से निकला था क्योंकि ऑफिस के लिए देर हो रही थी. बेटी को फिर स्कूल भी तो छोड़ना था आखिर मां और पिता दोनों ही रिश्तें जो मैं निभा रहा था. जैसे-तैसे भागते हुए बस पकड़ने के लिए बस स्टैंड पहुंचने के दौरान मोबाइल पर अपनी मां से बातें भी कर रहा था कि “मां अब शादी का नाम मत लो क्योंकि अब मुझे इन रिश्तों में विश्वास नहीं रहा है.” अचानक मेरे नजदीक ही एक आवाज सुनाई दी ‘कि रिश्तों में विश्वास से ही तो सब होता है, बिना विश्वास के भला कोई रिश्ता कैसे चल सकता है. हैरानी से मैंने उसकी तरफ देखा पर उसका चेहरा नहीं देख पाया क्योंकि बस आ गई थी और फिर वो ही रोज की तरह धक्का-मुक्की हो रही थी. हैरानी हो रही थी अपने आप पर कि मेरी आंखें किसी हरी चुन्नी पहने हुए लड़की को खोज रही हैं. फिर क्या था कि अचानक वो ही आवाज सुनाई दी कि ‘अम्मा आप मेरी जगह पर बैठ जाएं’. ऐसा लग रहा था कि आज कुछ अजीब मेरे साथ हो रहा है पर इस बार तो मन ने और दिल ने सोच रखा था कि अब तो उसका चेहरा देखना ही है.



अगर गर्लफ्रेंड को मैसेज में ‘किस’ भेजना चाहते हैं तो….



_oimages_rubenlullabyमन बोला जैसे प्यारा सा चेहरा हजारों बातें बोलना चाहता हो. ना जानें आंखें क्या बोल रही थीं…….शायद मैं सुन रहा था. कितना अजीब हैं ना कि बिना किसी के कुछ बोले सुन लेना. अजीब नहीं बहुत अजीब था पर मेरे साथ ये हो रहा था. मैं खुद को रोक भी नहीं पा रहा था. शायद मैं रोकना ही नहीं चाहता था. मन बोल रहा था कि “बहुत प्यारा है तेरा चेहरा, आंखें हटा भी लो तो दिल तुझे ही देखता है और मन तुझे ही देखना चाहता है.” पर सच ही तो है हर सुन्दर चीज अपनी नहीं होती है.


कभी-कभी नसीब भी राहें जोड़ती है

उसी शाम मां के बोलने पर जिस लड़की से मिलने जाना था वहां पहुंच कर पता चलता है कि वो ही लड़की जिसे आज बस में देखा था, मेरे सामने है. फिर क्या था हमें कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया गया जिससे हम आपस में बातें कर सकें. मैंने कहा – आपको मेरा नाम तो पता है. मेरा नाम सौरभ है और आपका? उसने एकदम से कहा, ‘सुरभि’.


अगर गर्लफ्रेंड से ब्रेक-अप करना चाहते हैं……


………………….

सौरभ: आपको पता है ना कि मेरी एक बेटी है और मेरी पत्नी बस अब मेरी यादों में है.

सुरभि: मुझे पता है कि आपकी पत्नी अब इस दुनिया में नहीं है. पर आपकी बातें सुन कर विश्वास हो गया कि मैं जिस के साथ तमाम उम्र साथ दे सकती हूं वो आप ही हैं.

सौरभ: ऐसा क्यों?

सुरभि: कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हम समझ जाते हैं पर किसी और को समझा पाना मुश्किल होता है. इसलिए मैंने फैसला ले लिया.


सौरभ शादी के कुछ साल बाद अपनी डायरी में लिखते हुए…………

सच ही है कुछ प्रेम कहानी हम बनाते हैं और कुछ खुद ही बन जाती हैं और प्यार शायद समझने में समय लगता है जो जरूरी भी है. “पहली नजर थी उनकी मैं ना जानें कहा खोने लगा, प्यार क्या होता है शायद अब समझ पाया.”


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