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योगदिवस: सुझाव पर तमाशा क्यों?

दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा

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2014 में सत्ता हासिल करने के बाद भाजपा की अगुवाई वाली नरेंद्र मोदी सरकार ने आयुष मंत्रालय का गठन किया था, ताकि शरीर को स्वस्थ रखने की भारत की पुरातन पद्धति योग को बढ़ावा दिया जा सके. लेकिन विगत दोनों वर्षो की तरह इस बार फिर 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बेवजह राजनितिक बहस बिना पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है. जिस तरह पिछले दोनों वर्षो में योग दिवस पर ओ३म और सूर्य नमस्कार को लेकर राजनितिक तू तू में में हुई थी ठीक उसी तरह इस वर्ष भी केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय की गर्भवती महिलाओं के दी गई सलाह काफी चर्चा का विषय बनी हुई है. मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में स्वस्थ्य जच्चा और सेहतमंद बच्चे के लिए सलाह दी है कि गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान इच्छा, क्रोध, लगाव, नफरत और वासना से खुद को अलग रखना चाहिए. साथ ही बुरी संगत से भी दूर रहना चाहिए. हमेशा अच्छे लोगों के साथ और शांतिप्रिय माहौल में रहें. आयुष मंत्रालय ने मदर एंड चाइल्ड केयर नामक बुकलेट जारी की है जिसमें, ये सलाह दी गई हैं.

आयुष मंत्रालय की सलाह यहां तक सीमित नहीं रही. मंत्रालय आगे कहता है कि यदि आप सुंदर और सेहतमंद बच्चा चाहती हैं तो महिलाओं को “इच्छा और नफरत” से दूर रहना चाहिए, आध्यात्मिक विचारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. अपने आसपास धार्मिक तथा सुंदर चित्रों को सजाना चाहिए. इस बुकलेट में गर्भकाल के दौरान योग और अच्छी खुराक के फायदों के बारे में भी बताया गया है. साथ में यह भी बताया गया है कि इस दौरान महिलाओं को स्वाध्याय करना, अध्यात्मिक विचार, महान हस्तियों की जीवनी पढ़ने आदि में खुद को व्यस्त रखना चाहिए.

हालांकि यह बात समझ से परे है कि इन बातों को राजनेता विवादित क्यों बता रहे है! जबकि हमारी संस्कृति हमारे धर्म ग्रन्थ इन सब चीजों को बगेर किसी विवाद के स्वीकारते है. कांग्रेस ने इस सुझाव पर जहां भाजपा नीत सरकार की असंवेदनशील होने के लिए आलोचना की और कहा कि प्राचीन भारत का विषय योग भगवा दल का नहीं है, वहीं जद यू ने इसे भारतीय जनमानस पर सांप्रदायिक एजेंडा को थोपने का एक और प्रयास करार दिया.

जबकि हमारे प्राचीन ग्रन्थों, प्रकृति और मनुष्य पर शोध करने वाले ऋषि मुनियों के अनुसार इस धरती पर रहनेवाले सभी जीवों को भगवान का अंश माना जाता हैं. इनमें से किसी भी जीव की हत्या करना शास्त्रों के मुताबिक पाप है. मांसाहार भोजन के लिए रोजाना न जाने कितने ही बेजुबान जानवरों की बलि चढ़ाई जाती है. जबकि हमारी संस्कृति में मांसाहार के सेवन को वर्जित माना गया है और मांसाहार भोजन इंसानों का खाना नहीं बल्कि राक्षसी भोजन है. मांस और मदिरा जैसी चीजें तामसिक भोजन कहलाती हैं. इस तरह का भोजन करनेवाले लोग अक्सर कुकर्मी, रोगी, दुखी और आलसी होते है.

इन्सान के स्वभाव पर शोध करने वाले बताते है कि मांसाहार भोजन करने से इंसान के भीतर चिड़चिड़ापन आने लगता है वो स्वभाव से उग्र होने लगता है. मांसाहार भोजन तन और मन दोनों को अस्वस्थ कर देता है. यही नहीं मांसाहारी लोगों में कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा शाकाहारी लोगों के मुताबिक कहीं ज्यादा होता है. इससे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल की बीमारी, कैंसर, गुर्दे का रोग, गठिया और अल्सर जैसी कई बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार मांसाहार इंसान के शरीर के लिए उतना ही खतरनाक है जितना कि धूम्रपान. इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पके हुए मांस से जानलेवा कैंसर का खतरा होता है. मांसाहारी भोजन की तुलना में शाकाहारी भोजन सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है. शाकाहारी भोजन इंसान को स्वस्थ, दीर्घायु, निरोग और तंदरुस्त बनाता है. शाकाहारी व्यक्ति हमेशा ठंडे दिमागवाले, सहनशील, सशक्त, बहादुर, परिश्रमी, शांतिप्रिय और आनंदप्रिय होते हैं

बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां मुर्गियों और सूअरों के जरिए इंसानों को अपना शिकार बनाती हैं. इन प्राणियों का मांस खाना इसकी सबसे बड़ी वजह मानी जाती है. जबकि शाकाहारी जीवनशैली को अपना कर इनसे होनेवाली बीमारियों से खुद को बचाया जा सकता है.बहरहाल हमारे कई धर्म ग्रंथों में यही उल्लेख मिलता है कि मांसाहार नहीं करना चाहिए. अगर आप खुद को तन और मन से तंदरुस्त रखना चाहते हैं तो शाकाहार सबसे बेहतर जरिया बन सकता है.यही वजह है कि मानसिक स्वास्थ और शारारिक स्वास्थ के लिए आजकल ज्यादातर लोग मांसाहार को छोड़कर शाकाहार को अपना रहे हैं.

अक्सर जाकिर नाइक जैसे कुछ लोग मांसाहार को सही साबित करने के लिए कहते है की पौधों में भी जीवन होता है. इस कुतर्क को देने से पहले जाकिर नाइक ये नहीं सोचते की पौधों में उनका दिमाग नहीं होता परन्तु किसी जीव को आप जब मारते है तो उसे, दुःख, दर्द, पीड़ा होती है और उसको मारकर खाना बहुत ही बड़ा पाप है. जाकिर नाइक जैसे कुछ लोग हमारे पैने वाले दातों का हवाला भी देते है और कहते है की भगवान् ने इंसान को पैने दांत मांस खाने के लिए ही दिए है लेकिन अगर ईश्वर की दी हुई हर चीज का प्रयोग करना जरूरी है तो नाखून क्यों काटे जाते है ??

एक सबसे बड़ा कुतर्क ये है की अगर जानवरों को नहीं मरेंगे तो उनकी संख्या बहुत बढ़ जाएगी लेकिन देखा जाये तो कुछ जानवर ऐसे हैं जिनको कोई नहीं खाता लेकिन फिर भी वो विलुप्ति की कगार पर है.खाने वाले जानवरों को सिर्फ खाने के लिए फॉर्मों में पाला जाता है और कृत्रिम रूप से बड़ा किया जाता है. अगर मांसाहार बंद हो जाएगा तो ये मांस उद्योग भी बंद हो जाएगा।

भारत के महान वैज्ञानिक जैसे श्री अब्दुल कलाम जी भी शाकाहारी ही थे. अभिनेता अमिताभ बच्चन से लेकर फिल्म अभिनेत्री रेखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक विश्व के अनेकों स्वस्थ और प्रभावशाली व्यक्ति शाकाहार भोजन करते है मांस मनुष्य का स्वाभाविक भोजन नहीं है. किसी भी धर्म में मांस खाना अनिवार्य नहीं है. ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि जो मांस नहीं खाएगा, वह अच्छा हिंदू या अच्छा मुसलमान या अच्छा ईसाई या अच्छा सिख नहीं होगा. सभी धर्मों के मुखियाओं को चाहिए कि वे अपने अनुयायियों को जीव-हिंसा से मुक्त रखकर एक स्वस्थ समाज की स्थापना करें…

विनय आर्य

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