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सचिन के वे पांच अनमोल क्षण

sachin tendulkar 1क्रिकेटिंग कॅरियर के तौर पर किसी भी खिलाड़ी के लिए 24 साल कम नहीं होते. दुनिया के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने इन्हीं 24 सालों में कई रिकॉर्ड तोड़े तो कई नए कीर्तिमान बनाए. वैसे तो बतौर एक क्रिकेटर सचिन ने अपने चाहने वालों को कई बेहतरीन क्षण दिए हैं लेकिन हम उनमें से किन्ही पांच क्षणों के बारे में चर्चा करेंगे.


यादगार क्रिकेट विश्वकप

जैसा कि हम जानते हैं कि सचिन का एक सपना था कि वह भारत को विश्वकप दिलाने में अपना योगदान दें. उनका यह सपना उस समय पूरा हुआ जब वर्ष 2011 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने दूसरी बार विश्वकप अपने नाम किया. सचिन के लिए यह मौका काफी भावनात्मक था क्योंकि जिस समय सचिन का यह सपना पूरा हुआ उस समय वह परिवार और अपने होम ग्राउंड के दर्शकों के सामने खेल रहे थे.

टीम के इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने सचिन को अपने कंधों पर उठा लिया. उस समय का एक वाकया याद आता है कि जब टीम के युवा खिलाड़ी विराट कोहली ने सचिन को अपने कंधों पर उठाया तब उन्होंने कहा था कि इस महान खिलाड़ी ने लगभग दो दशक तक भारतीय टीम के बोझ को उठाया है.


सिडनी में धमाल

सिडनी क्रिकेट ग्राउंड मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के लिए पसंदीदा ग्राउंड में से एक है. यही वह ग्राउंड है जहां पर सचिन तेंदुलकर के 40वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले उनकी मोम की प्रतिमा का अनावरण किया गया. सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर सचिन ने कई कीर्तिमान रचे हैं. उनमें से 241 रन की वह पारी सबसे ज्यादा यादगार रही है जब उन्होंने 2003/04 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान लगाई थी. सचिन ने अपनी इस पारी में न केवल डबल सेंचुरी लगाई बल्कि आस्ट्रेलिया के खिलाफ दीवार की तरह खड़े होकर चौथे टेस्ट मैच को ड्रा कराने में अहम योगदान दिया.


हीरो कप का वह क्षण

हीरो कप 1993 में मोहम्मद अजहरुदीन की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रिका के खिलाफ 195 रन का स्कोर खड़ा किया था. उस समय भारत के युवा खिलाड़ी सचिन को अंतिम ओवर में गेंदबाजी की जिम्मेदारी सौंपी गई. कपिल देव, अजय जड़ेजा, अजहरुदीन और सचिन के बीच लंबी चर्चा के बाद आखिरकार सचिन को गेंदबाजी करने के लिए कहा गया. सचिन की गेंदबाजी से न केवल भारतीय टीम ने उस मैच को जीता बल्कि टीम ने फाइनल में भी जगह बनाई.


पाक खिलाड़ियों को दिया जवाब

लगभग 20 हजार लोगों से भरे साउथ अफ्रीका के सेंचुरियन स्टेडियम में लिटिल मास्टर सचिन तेंदुलकर ने 2003 विश्व कप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ 75 गेंद में 98 रनों की पारी खेली जो उनके कॅरियर की सर्वश्रेष्ठ यादगार पारी है. बेहद उत्तेजनापूर्ण माहौल में वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 273 रन का लक्ष्य दिया था. उन्होंने न केवल दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज शोएब अख्तर की जमकर पिटाई की बल्कि अनुभवी वसीम अकरम, वकार यूनुस और अब्दुल रज्जाक की भी अच्छी खबर ली. सचिन को इस बेहतरीन पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया. सचिन की इस पारी की बदौलत ही भारतीय टीम 20 साल बाद वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची थी.


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