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उदासी

ग़ज़ल

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सांसों से तेरी खुसबू उतर गई केसे
ये रात तो टहरी थी गुजर गई केसे
ये रेगजार तो वीरान सा था अहले चमन मैं
सूखे हुए मंजर मैं आँख भर गई केसे

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