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हमेशा याद रहेंगे यह डायलॉग – evergreen dialogues in Hindi movies

हिन्दी सिनेमा का सफरनामा

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भगवान के लिए मुझे छोड़ दो, अपने आप को कानून के हवाले कर दो, कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, आज भले ही यह डायलॉग सुनकर हंसी आती हो लेकिन यह भी सच है कि एक समय था जब ऐसे डायलॉग के बल पर ही फिल्में चला करती थीं, दर्शक ऐसे डायलॉग को सुनकर सीटियां बजाया करते थे. वैसे भी बॉलिवुड मसाला फिल्मों में गीत-संगीत के अलावा डायलॉग ही तो है जो फिल्म सुपरहिट करवाने का एक अचूक तरीका है.


हिन्दी सिनेमा के सौ साल पूरे होने जा रहे हैं और इस लेख में हम आपको हिंदी फिल्मों के ऐसे ही कुछ बेहद लोकप्रिय और चर्चित डायलॉग्स से रूबरू करवा रहे हैं जिन्होंने ना सिर्फ फिल्म को हिट करवाया बल्कि संबंधित किरदार को भी हमेशा के लिए जीवित कर दिया.

1. कौन कमबख्त है जो बर्दाश्त करने के लिए पीता है, मैं तो पीता हूं कि बस सांस ले सकूं – दिलीप कुमार (देवदास, 1955)

2. सलीम तुम्हें मरने नहीं देगा और अनारकली हम तुम्हें जीने नहीं देंगे – पृथ्वीराज कपूर (मुगल-ए-आजम, 1960)

3. जिनके घर शीशे के होते हैं वे दूसरों के घरों में पत्थर नहीं फेंका करते – राज कुमार (वक्त, 1965)

4. आपके पांव देखें, बहुत हसीन हैं इन्हें जमीन पर मत उतारिएगा मैले हो जाएंगे – राज कुमार (पाकीजा, 1972)

स्वतंत्रता संग्राम के दर्द और देश प्रेम को दर्शाता बॉलिवुड !!


5. खामोश – शत्रुघ्न सिन्हा (बदला, 1974)

6. सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है – अजीत (कालीचरण, 1976)

7. कितने आदमी थे – अमजद खान (शोले, 1975)

8. मैं इसका खून पी जाउंगा – धर्मेंद्र (शोले, 1975)

9. चल धन्नो आज तेरी बसंती की इज्जत का सवाल है – हेमा मालिनी ( शोले, 1975)

10. तेरा क्या होगा कालिया – अमजद खान (शोले, 1975)

11. मेरे पास मां है – शशि कपूर (दीवार, 1975)

12. डॉन को पकड़ना मुश्किल नहीं नामुमकिन है – अमिताभ बच्चन (डॉन, 1978)

13. इंग्लिश इज अ वेरी फन्नी लैंगुएज – अमिताभ बच्चन (नमक हलाल, 1982)

14. मोगैंबो खुश हुआ – अमरीश पूरी (मिस्टर इंडिया, 1987)

बॉलिवुड की मनमोहक अभिनेत्रियां !!


15. रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते हैं – अमितबह बच्चन (शहंशाह, 1988)

16. यह ढाई किलो का हाथ किसी पर पड़ता है ना तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है – सनी देयोल ( दामिनी, 1993)

17. बड़े-बड़े शहरों में छोटी-छोती बातें होती रहती हैं – शाहरुख खान (दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे, 1994)


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